Thursday, July 16, 2009

प्रगति मैदान के प्रगति की गाथा


एक बार फ़िर से प्रगति मैदान में ऎसी चीज प्रस्तुत की जा रही है जो पूरे एशिया महाद्वीप भर के किसी भी अन्य प्रदर्शनी क्षेत्र में नहीं की जा सकती । भारत अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेला ( आई आई टी एफ़ ) की गणना भारत में आयोजित होने वाले अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के गिने-चुने व्यापार मेलों में की जाती है । यह मेला विश्‍व के सामने भारत की अनेकता में एकता विशेषता की झांकी प्रस्तुत करता है- यह विश्‍व में आर्थिक महाशक्ति के रूप में ही नहीं उभर रहा है अपितु अत्यन्त सुसंस्कृत, सहशील, शान्ति प्रिय एवं सार्वभौ‍मिक देश है । भारतीय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेले का आयोजन इण्डिया ट्रेड प्रमोशन आर्गनाइजेशन ( आई टी पी ओ ) द्वारा १४ से २७ नवम्बर २००९ तक प्रगति मैदान में किया जाएगा । यह मेला बड़ी तीव्र गति से बदलते नये भारत की भव्य झांकी है । यह एक ऎसे भारत की तस्वीर है जो बहुत आश्‍वस्त है तथा बड़े गौरव एवं महत्वाकांक्षा के साथ तेजी से प्रगति कर रहा है । विश्‍व शान्ति एवं अहिंसा के बारे में गांधी दर्शन के सच्चे अनुयायी- भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के जन्म दिवस से शुरू हो रहा ये मेला एक माननीय और सजग समाज के अन्तर्गत अपने पडोसी राष्ट्रों के लिए भी प्रगतिशील एवं दीर्घकालिक सामाजिक- आर्थिक विकास का सुनिश्‍चित करने वाले सिद्घान्त के अनुपालनार्थ भारत की बचनबद्घता की दृढ़ अभिव्यक्ति है । इस मेले की थीम - का यथोचित रूप में प्रदर्शन थीम मण्डपों के अलावा राज्यों एवं केन्द्ग शासित प्रदेशों के मण्डपों में भी किया जाता है । इस बर के २९ वें मेले का थीम "सेवाओं का निर्यात" है। यह मेला विभिन्न देशों के लिए अन्तरक्षेत्रीय व्यापार एवं वाणिज्यिक सहयोग पूर्ण सम्बन्ध बनाने के उदेश्य से और भी महत्वपूर्ण हो गया है। हर वर्ष इस मेले में एक प्रदेश को ‘ साझेदार राज्य’ तथा एक अन्य के ‘फ़ोकस राज्य’ का दर्जा मिला है। यूनियन फ़ोयर्स डी- इण्टरनेशनले डी पेरिस ( यू.एफ़ ) आई. द्घारा अनुमोदित यह मेला नयी और अत्यधिक तीव्र गति से विकसित हो रहे विदेशी बाजार में पांव जमाने के इच्छुक भारत के उद्योगों के लिए स्प्रिंग बोर्ड का काम करता है । राजनेता, निर्णायक, प्रौद्योगिकीविद और व्यापारी वर्ग जानकारी प्राप्त करने तथा सम्पर्क बढाने और बाजार में पैठ बनाने के प्रयोजन से आई आई टी एफ़ को एक अद्घितीय मौके के रूप में मानते हैं ।यह मेला पिछले अठाईस वर्षो से लेकर अब तक लगातार आयोजित होता ही नहीं आया है अपितु अपने ग्राहकों एवं भागीदारों- प्रदर्शकों की मौलिक आवश्यकताओं एवं हितों को प्रतिबिम्बित करने वाली सुस्पष्ट रणनीति के साथ एक प्रगतिशील एवं नवीनतापरक कार्यक्रम के रूप में विकसित हो चुका है । इस तरह से मेला सामान्यतः व्यापारिक ट्रेण्डों का मापक ( बैरोमीटर ) अथवा उद्योगों एवं व्यापारी वर्ग के विश्‍वस्तरीय मंच के रूप में जाना जाने लगा है । इसमें सक्रियता पूर्वक लेन-देन एवं विचार विनिमय को प्रोत्साहन मिलत है जिससे आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक विकास के निर्धारण में मदद मिलती हैं । यह मेला अपनी शुरूआत से ही व्यापारी वर्ग को परस्पर मिलाने तथा मांग और पूर्ति के मिलन स्थल के रूप में कार्य करने के अपने मूल एवं महत्वपूर्ण लक्ष्य को पूरा करने के अलावा भी उपयोगी भूमिका निभायी है । व्यापार एवं वाणिज्य जगत में उत्प्रेरक की भूमिका अदा करने के अलावा यह मेला गरीबी दूर करने, स्वास्थ्य की देखभाल, शिक्षा एवं सफ़ाई सहित प्रमुख महत्वपूर्ण विषयों से सम्बन्धित गैर- सरकारी एजेंसियों तथा केन्द्ग एवं राज्य सरकारों के कार्यो का सच्चा आत्मनिरीक्षण करने का माध्यम है । विभिन्न राज्यों/ केन्द्ग शासित क्षेत्रों में ई-गवर्नेंस की अत्यधिक प्रगति को दर्शाते हुए मेले में सूचना प्रौद्योगिकी सेवा, बिजनेस प्रौसेस आउटसोर्सिग ( बीपीओ ) और नवीनतम नाँलिज पौसेस आउटसोर्सिग ( केपी ओ ) जैसी नई भावी प्रवृत्तियों को दर्शाया गया है । अन्य प्रवृतियां जो मेले में दर्शाई गई हैं उनमें विश्‍व अर्थव्यवस्था का एशियाई महाद्वीप की ओर झुकाव के कारण विदेशी नागरिकों द्वारा भारत में नौकरियों के लिए आगमन, विदेशों में रह रहे भारतीय मूल के व्यक्तियों द्वारा इस विश्‍व स्तर प्रमुख उद्यमियों के रूप में आनिर्माण, खुदरा व्यापार में आई क्रान्ति और कुशल संचार एवं परिवहन साधनों के कारण घटती दूरियां शामिल हैं और जिन्होनें शहरी क्षेत्रों के उच्च श्रेणी के निर्माण उद्योगों और सेवा उद्योगों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में परम्परागत शिल्पकार तक सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था को समृद्घ किया है । मेले में सामान्य व्यापारिक वातावरण को सही रूप में दर्शाया गया है और उसने बाजार में पुनजीर्वित करने के लिए भी योगदान किया है । भारतीय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेला २००७ सम्भवतः पिछले एक दशक के दौरान आई टी पी ओ द्घारा शुरू किया गया सर्वाधिक विशाल और महत्वपूर्ण मेला है । शहरी विकास के अलावा मेले में राज्य सरकारॊं और केन्द्गीय सरकार की एजेन्सियों द्घारा निचले स्तर पर ग्राम परिषदों, पंचायतों के माध्यम से गरीब व्यक्तियों को शक्ति प्रदान करने के लिए चलाये जा रहे कार्यक्रमों पर भी फ़ोकस किया गया है । राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने पंचायतों को ग्राम स्वराज नाम दिया था और जिसे अब संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया है तथा जिसमें महिलाओं और अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजतियों के सदस्यों एवं समाज के अन्य वंचित वर्गो को न्यूनतम प्रतिनिधित्व प्रदान किया गया है ।
इसलिए, आप सभी मेलें में आयें और असली भारत की तस्वीर को देखें---मेले में स्थित राज्य मण्डपों और संघ राज्य क्षेत्रों का मण्ड़पों में जीवन्त पतिदृश्य दर्शक देख सकते हैं, जिनमें पिछले वर्ष की तुलना में अधिक प्रभावी प्रदर्शन किया गया है और उदारीकरण के बाद की भारत की अर्थव्यवस्था के निरन्तर विकास को प्रदर्शित किया गया है । इन मण्डपों में एक ऎसा गतिशील मंच प्रस्तुत किया गया है जिसके माध्यम से भारतीय और अन्तर्राष्ट्रीय जगत की विराट जनसंख्या तक एक ओर उच्च तकनीकी सेवाओं के माध्यम से और दूसरी ओर अन्य परम्परागत उपकरणों के माध्यम से व्यापक औद्योगिक परिदृश्य को दर्शाने वाली भारत की पहली सक्षम प्रदर्शन के माध्यम से अन्य परम्परागत उपकरणों को दर्शाया गया है । इसके अलावा रत्न और आभूषणों के अमूल्य संकलन का व्यापक प्रदर्शन किया गया है । इसके अलावा ऎतिहासिक महत्व के आश्‍चर्यजन्क स्थलों, विराट हिमालय पर्वत की श्रृंखलाओं, भव्य पर्वतीय पर्यटन स्थलों, शान्त समुद्ग तटीय विश्राम स्थलों, जीवन्त त्यौहारों विशाल वन्य जीवन जीवन्त शहरों, घने उष्णकटिबंधीय जंगलों, कालातीत मरूस्थलों, रोमांचकारी साहसिक क्रीड़ाओं, भिन्न-भिन्न देशों के हस्तशिल्प असंख्य स्वादिष्ट व्यंजनों का आनन्द ले सकते हैं । इसके अलावा भी बहुत कुछ है ........
मेला है एक आदर्श स्थल ........प्रगति मैदान ने अपने पूरे इतिहास से यह साबित किया है कि वह बाजार की जरूरतों और मांगों के प्रति संवेदनशील रहा है और इस उसने प्रबन्धन और सगंठन के उन उच्च व्यावसायिक मानदण्डों को स्थापित किया है जिनसे आई टी पी ओ विश्‍वव्यापी ख्याति और सराहना प्राप्त हूई । आई टी पी उत्कृष्ट प्रदर्शन के निरन्तर प्रयासरत है । प्रदर्शकों और दर्शकों के सम्बन्धों और सेवाओं के सुधार की ओर विशेष ध्यान दिया जाता है, जो कि कारपोरेट जगत का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है ।
आई टी पी ओ में एक विशाल आधारभूत ढ़ाचा तथा विपणन और सूचना सुविधायें उपलब्ध हैं जिनका आयातक और निर्यातक समान रूप से उपयोग करते हैं । आई टी पी ओ के विदेश स्थित कार्यालय भारत से उत्पादों की उपलब्धता जानकारी प्राप्त करने में क्रेताओं की सहायता करते हैं ।
आई टी पी ओ के न्यूयार्क, फ़ैंकफ़र्ट, टोकियों, मास्को, और साओ पोलो स्थित विदेश कार्यालय निवेश के सुअवसर बढ़ाने के साथ साथ भारत से निर्यात बढ़ाने के लिए आवश्यक कार्यकलापों में कार्यरत हैं
इसी प्रकार बंगलौर, चेन्नई, कोलकत्ता और मुम्बई स्थित आई टी पी ओ के क्षेत्रीय कार्यालय अपनी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से देश भर में एक समेकित और सम्न्वित व्यापार संवर्धन अभियान चलाये जाने को सुनिश्‍चित करते हैं ।
आई टी पी ओ में प्रगति मैदान के अन्दर आवश्यक व्यापार सुचना के लिए भण्डार और आदर्श व्यापारिक परिदृश्य है । भारत का पहला व्यापार पोर्टल www.tradeportalofindia.com के माध्यम से आफ़ लाईन और लाईन दोनों प्रकार से विश्‍वसनीय जानकारी का व्यापक भण्डार प्रस्तुत किया गया है ।
जनवरी २००१ में दि स्टेट आफ़ दि आर्ट चेन्नई व्यापार केन्द्ग और अभी पिछलें दिनों व्यापार केन्द्ग बंगलौर को चालू करने के साथ ही आई टी पी ओ ने दिल्ली के बाहर आधुनिक प्रदर्शनी सुविधाओं को स्थापित करने का पहला चरण सफ़लतापूर्वक पूरा कर लिया है । चेन्नई व्यापार केन्द्ग जो तमिलनाडु में एक स्थायी और आधुनिक प्रदर्शनी स्थल की लम्बे समय से महसूस की जा रही जरूरत की पूर्ति करता है , इस क्षेत्र में व्यापार से संबंधित गतिविधियों के एक केन्द्ग के रूप में पहले ही उभर चुका है ।
इसी प्रकार व्यापार केन्द्ग ट्रेड सेन्टर बंगलौर, जो आई टी पी ओ और कर्नाटक राज्य ओद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड का संयुक्त प्रयास है, से राज्य में मेलों, प्रदर्शनियों और अन्य संबंधित गतिविधियों के माध्यम से व्यापार संवर्धन को बड़ी गति मिलने की संभावना है ।
इसके अतिरिक्त एक अन्य संयुक्त प्रयास पश्‍चिम बंगाल ओद्योगिक विकास निगम डब्त्यू बी आई डी और कोलकत्ता नगर निगम के साथ एक सुपर लक्जरी होटल आई टी सी सोनार बांगला के निकट कोलकत्ता में किया गया है जहां कोलकत्ता ट्रेड सेन्टर ( के टी सी ) की आधार शिला का अभी पिछले दिनों अनावरण किया गया है ।
आई टी पी ओ के मुख्य कार्यकलापों और सेवाओं का संक्षेप में नीचे उल्लेख किया जा रहा है ः-
. दिल्ली के ह्‍दय स्थल में प्रगति मैदान में विशाल व्यापार मेला-परिसर का प्रबन्ध करना .. प्रगति मैदान प्रदर्शनी- परिसर में तथा भारत के विभिन्न केन्द्गों में विभिन्न व्यापार मेलों/प्रदर्शनी का आयोजन करना ।. भारत एवं विदेशों के अन्य मेला- आयोजकों को व्यापार मेलों/ प्रदर्शनियों के आयोजन के लिए प्रगति मैदान में स्थान उपलब्ध कराना ।. विक्रेताओं की पहचान करने, भ्रमण- सूची तैयार करने, लोगों से मिलने का कार्यक्रम निर्धारित करने और जरूरत पड़ने पर उनके साथ जाने में विदेशी विक्रेताओं को तथासमय और कुशल सेवाएं उपलब्ध कराना ।. भारतीय आपूर्तिकर्ताओं और विदेशी खरीददारों के बाच में स्थायी दीर्घकालीन संबंध कायम करवाना ।. खरीददारों की अपेक्षाओं के अनुरूप उत्पादों के विकास व अनुकूल में भारतीय कम्पनियों की सहायता करना ।. क्रेताओं और विक्रेताओं को पास लाने की दृष्टि दे क्रेता-विक्रेता बैठकों तथा एकल भारतीय प्रदर्शनियों का आयोजन करना ।. विदेशों में विभागीय भंडारों तथा मेल आर्डर हाउसों के माध्यम से भारतीय उत्पादों का संवर्धन करना ।. विदेशी मेलों/ प्रदशनियों में भागीदारी करना ।. आगन्तुक विदेशी क्रेताओं हेतु य्त्पाद प्रदर्शन का प्रबन्ध करना ।. सेमिनारों/ संगोष्ठीयों/ कार्यशालाओं आदि का आयोजन करना ।. निर्यात संवर्धन प्रयासों में लघु एवं मझौली इकाइयों को प्रोत्साहन देना तथा उनको शामिल करना ।. व्यापार व निर्यात संवर्धन से संबंधित इन-हाउस प्रशिक्षण एवं आवश्यकता आधारित अनुसंधान का प्रबन्ध करना ।. भारत का विदेश व्यापार बढ़ाने में राज्य सरकारों की भागीदारी और सहयोग विश्‍चित करना ।. व्यापार सूचना केन्द्ग पर इलेक्ट्रानिक सुगमता के माध्यम से व्यापार सूचना सेवाएं उपलब्ध कराना ।
एक प्राथमिकता वाला स्थल है प्रगति मैदान ......इण्डिया ट्रेड प्रमोशन आर्गनाइजेशन का मुख्यालय - प्रगति मैदान भारत का प्रमुख प्रदर्शनी परिसर के अलावा भी कुछ है । अपने नाम-“ प्रगति मैदान” के अनुरूप यह व्यापार के माध्यम से विकास एवं प्रगति को द्योषित करता है ।भारत में विश्‍व स्तर का सबसे बड़ा प्रदर्शनी स्थल होने एवं भारत में आधुनिक मेला संस्कृति का प्रतीक होने के नाते प्रगति मैदान, यहां आयोजित किये जाने वाले मेलों के साथ-साथ विस्तार एवं आयाम- दोनों में बढा है । इस प्रदर्शनी स्थल का विकास किये जाने से पूर्व इसी प्रदर्शनी परिसर का उपयोग भारत में रेलवे की शताब्दी ‘मनाने हेतु १९५२ में रेलवे प्रदर्शनी लगाने हेतु किया गया था । इसके बाद १९५५ में अन्तरराष्टीय ग्राफ़िक्स आर्ट एवं प्रिन्टिंग मशीनरी प्रदर्शनी, १९६० में विश्‍व कृषि मेला तथा १९६१ में भारतीय ओद्योगिक प्रदर्शनी लगायी गयी थी । किन्तु बिखरे हुए परिसर से वर्ष १९५८ में यह अपने सही रूप में अस्तित्व में आया । सार के दशक में भारत की स्वतंत्रता की रजत जयन्ती के साथ-साथ तीसरे एशिया अन्तरराष्टीय व्यापार मेला- एशिया ७२ के आयोजन के साथ ही इस मेला परिसर तथा मेले के स्वरूप में दोनों में ही महत्वपूर्ण परिवर्तन आये । यह एक महत्वपूर्ण घटना थी क्योकि इससे भारतीय व्यापारी समुदाय व्यापार मेलोंं की (व्यापार) संवधर्नात्मक क्षमता को समझ पाये । इन प्रदर्शनी परिसर को “प्रगति मैदान” नाम दिया गया । इन व्यापार मेलों एवं महत्व स्पष्टतः स्वीकार करके व्यापार मेलों का आयोजन करने के ंमुख्य उदेश्य से भारतीय व्यापार मेले एवं प्रदर्शनी परिषद, वाणिज्य मंत्रालय के अन्तर्गत एवं वाणिज्यिक प्रचार निदेशालय तथा भारतीय अन्तरराष्टीय व्यापार मेला संगठन- तीनों निकायों का विलय करके संसद के एक अधिनियम द्घारा १अप्रैल १९७७ को ट्रेड फ़ेयर अथारिटी आफ़ इण्डिया ( टी एफ़ ए आई ) का गठन किया गया था ।
इण्डिया ट्रेड प्रमोशन आर्गनाइजेशन ( आई टी पी ओ ) की स्थापना एक जनवरी १९९२ के बाद भूतपूर्व ट्रेड डेवलेपमेंट अथारिटी ( टी डी ए ) के टी एफ़ ए आई के साथ विलय करके की गई थी । (टी डी ए की स्थापना वाणिज्य मंत्रालय के अधीन पंजीकृत सोसाइटी के रूप में १९७० में की गई थी ) । भारत के अग्रणी प्रदर्शनी परिसर का व्यावसायिक ढंग से प्रबन्धन करने वाले आई टी पी ओ ने भारत सरकार की प्रमुख व्यापार संवर्धन एजेन्सी के रूप में भूमिका का निर्वाह करते हुए विगत वर्षो से अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं ।अक्टूबर १९९४ में प्रगति मैदान में आई टी पी ओ और नेशनल इन्फ़ार्मेटिक्स सेन्टर (एन आई सी) भारत सरकार द्घारा संयुक्त रूप से राष्ट्रीय व्यापार सूचना केन्द्ग (एन सी टी आई) की स्थापना करके उत्पादों एवं बाजारों से संबंधित अपना डाटा बेस तैयार करने के अलावा आई टी पी ओ अपना सूचना आधार बढाने के लिए एन सी टी आई के साथ नियमित रूप से विचार- विमर्श करता है । निष्कर्षतः प्रगति मैदान में ऎसा व्यापारिक वातावरण मिलता है जो चुनौतियों को सुअवसरों के रुप में परिणत कर देता है । प्रगति मैदान में व्यापार में उद्योग जगत के प्रतिनिधि एवं प्रमुख पधारते हैं और विशाल भारतीय बाजार की अपेक्षाओं को पूरा करते हैं ।

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