Friday, September 24, 2010

जीवन एक अनंत धरातल

जीवन एक अनंत धरातल
हम है इसका एक छोटा तल
कभी है अवतल कभी है उत्तल
कभी अभिन्न इसी सा समतल


जीवन एक अनंत धरातल
कभी बहुत आनंद समेटे
कभी दर्द की आहट लेके
आता जाता आज और कल


जीवन एक अनंत धरातल
जो बिक जाये दाम उसीका
झूठा जो है नाम उसीका
जो न बिका बेकार है यहाँ


मिथ्या सब संसार है यहाँ
क्या ये सूखे सूखे उपवन
क्या ये बहती नदिया कल-कल
जीवन एक अनंत धरातल
जीवन एक अनंत धरातल

4 comments:

  1. अच्छी पंक्तिया की रचना की है ........

    कृपया इसे भी पढ़े :-
    क्या आप के बेटे के पास भी है सच्चे दोस्त ????

    ReplyDelete
  2. बहुत अच्छी रचना

    ReplyDelete
  3. jivan ki,vastvikta btane vali rachna hai ,badhiya likha hai .aisa hi likhte rahen .

    ReplyDelete
  4. kavyatmak roop me manav jivan ka lekha jokha achha laga .

    ReplyDelete

I EXPECT YOUR COMMENT. IF YOU FEEL THIS BLOG IS GOOD THEN YOU MUST FORWARD IN YOUR CIRCLE.