जैसा आप सभी जानते हैं, कि हिन्दी पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नए संवत अर्थात् नये वर्ष की शुरूआत होती है । साथ ही जब पृथ्वी सूर्य का एक चक्कर पूर्ण करती है, तब सूर्य पुनः मेष संक्रान्ति में शून्य अंश का होता है । उस समय जो लग्न उदित होता है, वह पूरे वर्ष की वर्ष कुण्डली होती है । इसके आधार पर उस वर्ष सारे संसार में अप्राकृतिक व प्राकृतिक घटनाओं के पूर्वानुमान ज्योतिष विज्ञान द्वारा किया जाता है । १४ अप्रैल २०११ को दोपहर १ बजकर २५ सेकेण्ड में सूर्य मेष संक्रान्ति में प्रवेश कर रहा है, उस समय कर्क राशि का लग्न उदित हो रहा है । जिसके अंतर्गत नवम् भाव में गुरू, बुध व मंगल की युति है, वृहस्पति आग्नेय प्रवृत्ति के होते हैं ।
यह पूर्व दिशा एवं दक्षिण दिशा तथा एशियाई देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं । वहीं दूसरी तरफ शनि, शुक्र, बुध क्षारीय प्रवृत्ति के होने के कारण बेसिकली पश्चिमोत्तर क्षेत्र, विशेषकर यूरोपीय देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं । देखा जाए तो इस वर्ष चक्र में तृतीयस्थ शनि व अष्टमस्थ शुक्र की प्रबलता यूरोपीय देशों के लिए बड़ा ही अच्छा संकेतक नहीं है ।
इस चक्र के नवमांश में भी गौर करें तो वृश्चिक लग्न के नवमांश के आठवें घर में शुक्र, शनि की युति यूरोपीय देशों में कुछ प्राकृतिक आपदाओं का सूचक बन रहा है, साथ ही साथ लग्नस्थ मंगल का बुध के नक्षत्र में पाया जाना और तृतीय भाव में मंगल का होना मुस्लिम देशों में हिंसक घटनाओं का सूचक है । लेकिन एशियाई देशों में धार्मिक एवं शांतिप्रिय देशों में प्रगति देखने को मिलेगी । जिसमें विशेषकर भारत, चीन आदि देखा जाय तो शुरू के दिनों मुख्यतः 3 मई से 15 मई, 13 जून से 2 जुलाई, 26 दिसम्बर से 25 जनवरी 2012, 22 फरवरी 2012 से 12 मार्च 2012, आदि इस वर्ष के खराब समय होंगे, जिसमें अप्राकृतिक घटनाओं की आशंका है, लेकिन इस वर्ष में 5 जुलाई 2011 से 23 जुलाई, 23 अगस्त 2011 से 13 सितंबर सामान्यतः ठीक कहा जायेगा ।
व्यावसायिक दृष्टिकोण से यूरोपीय देशों की आर्थिक स्थिति बिगड़ती दिखाई दे रही है, जिसमें अमेरिका का आर्थिक नुकसान कहीं ज्यादा होने की संभावना है, लेकिन एशियाई देशों में विशेषकर भारत व चाइना की आर्थिक प्रगति काफी तेजी से होती दिखाई दे रही है । आर्थिक व विश्वस्तर पर सरल व उदार नीति के साथ भारत मजबूत भूमिका में साबित होगा । उपरोक्त खराब समय में पूरब दक्षिण कुछ समुद्रतटीय देशों को तथा पश्चिमोत्तर बर्फीली क्षेत्रों के कुछ देशों को प्राकृतिक घटनाओं से संभलना चाहिए । इसी प्रकार ३ अप्रैल २०११ को रात्रि ८ बजकर ४ मिनट में चैत्र शुक्ल पक्ष प्रारम्भ हो रहा है । इस स्थिति में हिंदी पंचांग के अनुसार नया वर्ष प्रारम्भ हो रहा है, इसके अनुसार यह तुला लग्न था, और इसे नये वर्ष प्रवेश के चक्र के अनुसार छठें भाव में शुक्र, मंगल, वृहस्पति तथा चन्द्रमा की युति कुछ अप्रत्याशित परिवर्तन के सूचक हैं ।
कट्टरपंथी देशों में जहां उन्माद, सत्ता परिवर्तन कराये गये वहीं विश्व में कुछ नये देश भी उभरकर अपनी कीर्ति स्थापित करेंगे । वह देश मुख्यतः एशिया से होगा और मुख्य रूप से शांति व सौहार्द्र पूर्ण एवं धर्म निरपेक्ष देश होगा । भारत में काफी परिवर्तन की आशंका है, तथा भारत की आर्थिक समृद्धि भी बढ़ेगी विशेषकर व्यावसायिक दृष्टिकोण से आईटी, शिक्षा, शेयर-बाजार के क्षेत्रों में काफी ज्यादा आर्थिक प्रगति बढ़ेगी और इस क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावना है । इस प्रकार यह नया वर्ष भारत एवं एशियाई क्षेत्र के देशों के लिए ठीक तो है, लेकिन इस वर्ष में धार्मिक कट्टरपंथी वालों देशों को अपने अंदर बदलाव लाना चाहिये अन्यथा उन्हें अत्यधिक हानि उठानी पड़ सकती हैं, साथ ही साथ विश्व में भी अशांति के कारण बन सकते हैं ।
पश्चिमी देश भी अपनी शक्ति का नाज़ायज फायदा ना उठायें, इससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में उनकी छवि भी खराब होगी । अतः उन्हें अप्राकृतिक आपदाओं से भी संभलकर रहना होगा । इस वर्ष में प्रॉपटी, ऊर्जा संयंत्रों में पेट्रोल एवं कमोडिटी मार्किट में खासकर सोना आदि के भाव आसमान चढ़ेंगे । भ्रष्टाचार भी बढ़ेगा, लेकिन बड़े-बड़े भ्रष्टाचार भी उजागर होंगे । कुछ नये आइडियल एवं अनुशासित राजनेताओं की छवि उभरेगी ।
Friday, May 6, 2011
अपराध की बांहों में राजधानी
जिस दिन पूरा देश महिला दिवस मना रहा था उस दिन देश की राजधानी में दिल्ली में दो हत्यायें हुई । एक दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा राधिका तंवर की और दूसरी नोएडा के चर्चित आरूषि हत्याकांड के राजेश तलवार की वकील रेबेका जॉन की मां एम मेमन की । बात सिर्फ दो हत्या की नहीं है, बल्कि दिल्ली में बढ़ रहे अपराधिक मामले की है । आज आलम ये है कि दिल्ली में ऐसा कोई दिन नहीं गुजरता जब कोई हत्या, बलात्कार, छेड़छाड़ या हिंसा की खबरें मीडिया में नहीं आती और इस पूरे मामले में महिलाओं पर इसका असर सबसे ज्यादा पड़ रहा है ।
दिल्ली में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार यहां लगभग 67 प्रतिशत महिलाएं किसी न किसी रूप में दुर्व्यवहार का शिकार होती है, जबकि 2010 में हर तीन में से दो महिलाएं यौन हिंसा की शिकार हुई हैं, जबकि हर 17 घंटे में एक छेड़खानी होती है । बलात्कार के मामले में अभी तक पुलिस ने 340 पड़ोसी, 94 दोस्त, 62 रिश्तेदार, और 10 अपरिचित लोगों को हिरासत में लिया है । हैरानीजनक बात तो यह है, कि जब ऐसी कोई घटना होती है तभी पुलिस सक्रिय होती है और इसी वजह से दिल्ली में महिलाएं अपने आपको सुरक्षित नहीं मानती और दस में से सात महिलाओं का पुलिस पर से विश्वास उठ गया है । राजधानी की 71 प्रतिशत महिलाएं पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाने में अपने आप को असुरक्षित महसूस करती है और इसका सबसे ज्यादा शिकार स्कूल या कॉलेज जाने वाली लड़कियां और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाएं होती हैं ।
ऐसे में प्रश्न ये उठता है कि दिल्ली में अपराधिक विकृतियां क्यों बढ़ रही हैं? जिसे न तो प्रशासन का डर है और ना ही सामाजिक शक्तियों का । सबसे बड़ी बात तो यह है कि भ्रष्टाचार और अपराध ने हमारी व्यवस्था में अंदर तक पैठ बना ली है और वे हमारे समाज के अभिन्न अंग बन गए हैं और यही हाल है देश की राजधानी का, यहां ऐसी कई बस्तियां हैं जहां मेहनत मजदूरी करने वाले गरीब लोग रहते हैं, और इन्हीं इलाकों में आपराधिक तत्व पोषण प्राप्त कर रहे हैं । तथा यहीं से आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं, चौंकाने वाली बात तो यह है कि पुलिस तथा प्रशासन इन सबसे वाकिफ है लेकिन अब तक कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है ।
अभी हाल ही में दिल्ली सरकार ने एक आंकड़े जारी किए हैं जिसे देखकर यही लगता है कि दिल्ली में अपराधों की दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि हो रही है जबकि दिल्ली पुलिस के आधुनिकीकरण और लाख दावों के बाद भी कि यहां अपराध कम हुए हैं एक खोखला सच ही सामने आया है क्योंकि इस बात की पुष्टि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित खुद विधानसभा में कर चुकी हैं कि दिल्ली में अपराध पिछले वर्षों में काफी बढ़े हैं । हालांकि दिल्ली में बढ़ रहे अपराध को लेकर मुख्यमंत्री के बयान भी राजनीति से प्रेरित ही लगते हैं क्योंकि, राधिका तंवर हत्याकांड में जब मीडिया ने उनको कठघरे में खड़ा किया तो उन्होंने अपना पल्ला झाड़ते हुए कह दिया कि दिल्ली पुलिस पर मेरा कोई जोर नहीं क्योंकि यहां की पुलिस केन्द्र सरकार के अधीन काम करती है इसलिए अपराधों के प्रति मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती । अब चाहे जो भी हो, इसके लिए चाहे केन्द्र सरकार दोषी हो या राज्य सरकार सबकी निगाहें दिल्ली में बढ़ रहे क्राइम ग्राफ की ओर है, और सरकार में बैठे लोग हो या पुलिस प्रशासन सबकी जिम्मेदारी बनती है कि अपराध की बाहों में जकड़ी हुई दिल्ली को बाहर निकालें ।
क्राइम जोन है दिल्ली का धौलाकुआं
दक्षिण दिल्ली का धौलाकुआं इलाका दिल्ली में बढ़ते हुए अपराधों का जोन बन गया है । एक अध्ययन के अनुसार इस क्षेत्र में पिछले एक महीने में एक बलात्कार, ग्यारह डकैती, एक हत्या, और एक छेड़खानी हुई है, जबकि पिछले वर्ष पांच महीनों का ब्यौरा देखा जाए तो अभी तक तीन बलात्कार और तीन छेड़खानी के मामले दर्ज हुए हैं ।
पिछले दो महीनों में पुलिस द्वारा दर्ज अपराधिक मामले
हत्या ---- 80
हत्या की कोशिश-----51
बलात्कार----- 14
2010 में हुए आपराधिक मामले
आपराधिक मामले--- 53,244
हत्या -----467
बलात्कार-----581
डकैती ----- 1,764
अपहरण ------1,582
वाहन चोरी---- 6867
घरों में चोरी --- 905
दिल्ली में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार यहां लगभग 67 प्रतिशत महिलाएं किसी न किसी रूप में दुर्व्यवहार का शिकार होती है, जबकि 2010 में हर तीन में से दो महिलाएं यौन हिंसा की शिकार हुई हैं, जबकि हर 17 घंटे में एक छेड़खानी होती है । बलात्कार के मामले में अभी तक पुलिस ने 340 पड़ोसी, 94 दोस्त, 62 रिश्तेदार, और 10 अपरिचित लोगों को हिरासत में लिया है । हैरानीजनक बात तो यह है, कि जब ऐसी कोई घटना होती है तभी पुलिस सक्रिय होती है और इसी वजह से दिल्ली में महिलाएं अपने आपको सुरक्षित नहीं मानती और दस में से सात महिलाओं का पुलिस पर से विश्वास उठ गया है । राजधानी की 71 प्रतिशत महिलाएं पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाने में अपने आप को असुरक्षित महसूस करती है और इसका सबसे ज्यादा शिकार स्कूल या कॉलेज जाने वाली लड़कियां और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाएं होती हैं ।
ऐसे में प्रश्न ये उठता है कि दिल्ली में अपराधिक विकृतियां क्यों बढ़ रही हैं? जिसे न तो प्रशासन का डर है और ना ही सामाजिक शक्तियों का । सबसे बड़ी बात तो यह है कि भ्रष्टाचार और अपराध ने हमारी व्यवस्था में अंदर तक पैठ बना ली है और वे हमारे समाज के अभिन्न अंग बन गए हैं और यही हाल है देश की राजधानी का, यहां ऐसी कई बस्तियां हैं जहां मेहनत मजदूरी करने वाले गरीब लोग रहते हैं, और इन्हीं इलाकों में आपराधिक तत्व पोषण प्राप्त कर रहे हैं । तथा यहीं से आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं, चौंकाने वाली बात तो यह है कि पुलिस तथा प्रशासन इन सबसे वाकिफ है लेकिन अब तक कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है ।
अभी हाल ही में दिल्ली सरकार ने एक आंकड़े जारी किए हैं जिसे देखकर यही लगता है कि दिल्ली में अपराधों की दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि हो रही है जबकि दिल्ली पुलिस के आधुनिकीकरण और लाख दावों के बाद भी कि यहां अपराध कम हुए हैं एक खोखला सच ही सामने आया है क्योंकि इस बात की पुष्टि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित खुद विधानसभा में कर चुकी हैं कि दिल्ली में अपराध पिछले वर्षों में काफी बढ़े हैं । हालांकि दिल्ली में बढ़ रहे अपराध को लेकर मुख्यमंत्री के बयान भी राजनीति से प्रेरित ही लगते हैं क्योंकि, राधिका तंवर हत्याकांड में जब मीडिया ने उनको कठघरे में खड़ा किया तो उन्होंने अपना पल्ला झाड़ते हुए कह दिया कि दिल्ली पुलिस पर मेरा कोई जोर नहीं क्योंकि यहां की पुलिस केन्द्र सरकार के अधीन काम करती है इसलिए अपराधों के प्रति मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती । अब चाहे जो भी हो, इसके लिए चाहे केन्द्र सरकार दोषी हो या राज्य सरकार सबकी निगाहें दिल्ली में बढ़ रहे क्राइम ग्राफ की ओर है, और सरकार में बैठे लोग हो या पुलिस प्रशासन सबकी जिम्मेदारी बनती है कि अपराध की बाहों में जकड़ी हुई दिल्ली को बाहर निकालें ।
क्राइम जोन है दिल्ली का धौलाकुआं
दक्षिण दिल्ली का धौलाकुआं इलाका दिल्ली में बढ़ते हुए अपराधों का जोन बन गया है । एक अध्ययन के अनुसार इस क्षेत्र में पिछले एक महीने में एक बलात्कार, ग्यारह डकैती, एक हत्या, और एक छेड़खानी हुई है, जबकि पिछले वर्ष पांच महीनों का ब्यौरा देखा जाए तो अभी तक तीन बलात्कार और तीन छेड़खानी के मामले दर्ज हुए हैं ।
पिछले दो महीनों में पुलिस द्वारा दर्ज अपराधिक मामले
हत्या ---- 80
हत्या की कोशिश-----51
बलात्कार----- 14
2010 में हुए आपराधिक मामले
आपराधिक मामले--- 53,244
हत्या -----467
बलात्कार-----581
डकैती ----- 1,764
अपहरण ------1,582
वाहन चोरी---- 6867
घरों में चोरी --- 905
Saturday, April 16, 2011
हिंसक होकर नहीं, प्यार से बताये गलतियों को
बच्चों को अनुशासन में रहने और रखने के लिए हिंसा का सहारा लिया जाता है । ये हिंसा कहीं और नहीं अपने ही घरों और स्कूलों में होती है । बच्चों पर की गई हिंसा किसी भी रूप में हो सकती है, चाहे वह शारीरिक हो, मानसिक हो या फिर भावनात्मक ।
यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में कहा गया हैं, कि दो से 14 साल की आयु के बच्चों को अनुशासन में रखने के लिए तीन चौथाई बच्चों के साथ हिंसा का सहारा लिया जाता है । इसमें आधे बच्चों को शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है । जेनेवा में आयोजित यूएन की मानवाधिकार समिति के बैठक में यूनिसेफ ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत किया । यह रिपोर्ट दुनिया के ३३ निचले और मध्यम आय वाले देशों के 1-14 आयुवर्ग के बच्चों पर आधारित थी, जिसमें बच्चों के अभिभावक भी शामिल थे । बैठक में यूएन विशेषज्ञों ने तय किया कि बच्चों के प्रति हिंसात्मक रवैया न अपनाने के लिए जागरूकता फैलाई जाये। इसको रोकने लिए दुनियाभर की सरकारें कानूनी कदम उठायें ।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि बच्चों को अनुशासन में रखने के लिए घरों में आठ तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है । इसमें कुछ शारीरिक हैं, तो कुछ मानसिक । शारीरिक हिंसा में बच्चों को पीटना या जोर से झकझोरना आदि है, जबकि मानसिक हिंसा में बच्चों पर चीखना या नाम लेकर डांटना आदि है ।
थोड़े देर के लिए यह बात ठीक भी है, लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है जो काफी खतरनाक है । बचपन में बोया गया हिंसा का ये बीज युवा होते-होते विषधर वटवृक्ष का रूप ले लेता है, जो किसी भी रूप में अच्छा नहीं है । यह सच है कि शिक्षा और शिष्टाचार सिखाने के लिए अनुशासन जरूरी है । हो सकता है, अनुशासन के लिए दंड भी आवश्यक हो, लेकिन दंड इतना कभी नहीं होना चाहिए कि बच्चों के कोमल मन और उसके स्वाभिमान पर चोट करे, उसकी कोमल भावनाएं आहत हो ।
बच्चों पर किये या हुए हिंसक और हृदय विदारक अत्याचार न केवल उनके बाल सुलभ मन को कुंठित करते हैं, बल्कि उनके मन में एक बात घर कर जाती है, कि बड़ों (सबलों) को छोटों (निर्बल) पर हिंसा करने का अधिकार है । बाल सुलभ मन पर घर कर जाने वाली यही बात, कुंठा आगे चलकर निजी जिंदगी और सामाजिक जीवन में विषवेल के रूप में दिखाई देता है । गलती करना इंसान कि फितरत है, और गलती को सुधार लेना इंसान कि बुद्धिमता का परिचायक । गलती कोई भी करे, एहसास होने पर उसे भी दुख होता है । गलती पर दंड देने या प्रताड़ित करने से हो चुकी गलती को सुधारा नहीं जा सकता है । प्रताड़ित करने और मन को आहत करने के बजाये उसे बताया जाना चाहिए कि गलती हुई तो क्यों और कैसे हुई? उसके नुकसान का आंकलन बच्चों से ही कराएँ।
गलती का एहसास कराने के लिए हिंसक होने की जरूरत नहीं है, प्यार से बताएं । प्यार हर काम को आसन करता है । यह मुश्किल तो है, लेकिन दुश्कर नहीं और परिणाम सौ प्रतिशत ।
यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में कहा गया हैं, कि दो से 14 साल की आयु के बच्चों को अनुशासन में रखने के लिए तीन चौथाई बच्चों के साथ हिंसा का सहारा लिया जाता है । इसमें आधे बच्चों को शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है । जेनेवा में आयोजित यूएन की मानवाधिकार समिति के बैठक में यूनिसेफ ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत किया । यह रिपोर्ट दुनिया के ३३ निचले और मध्यम आय वाले देशों के 1-14 आयुवर्ग के बच्चों पर आधारित थी, जिसमें बच्चों के अभिभावक भी शामिल थे । बैठक में यूएन विशेषज्ञों ने तय किया कि बच्चों के प्रति हिंसात्मक रवैया न अपनाने के लिए जागरूकता फैलाई जाये। इसको रोकने लिए दुनियाभर की सरकारें कानूनी कदम उठायें ।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि बच्चों को अनुशासन में रखने के लिए घरों में आठ तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है । इसमें कुछ शारीरिक हैं, तो कुछ मानसिक । शारीरिक हिंसा में बच्चों को पीटना या जोर से झकझोरना आदि है, जबकि मानसिक हिंसा में बच्चों पर चीखना या नाम लेकर डांटना आदि है ।
थोड़े देर के लिए यह बात ठीक भी है, लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है जो काफी खतरनाक है । बचपन में बोया गया हिंसा का ये बीज युवा होते-होते विषधर वटवृक्ष का रूप ले लेता है, जो किसी भी रूप में अच्छा नहीं है । यह सच है कि शिक्षा और शिष्टाचार सिखाने के लिए अनुशासन जरूरी है । हो सकता है, अनुशासन के लिए दंड भी आवश्यक हो, लेकिन दंड इतना कभी नहीं होना चाहिए कि बच्चों के कोमल मन और उसके स्वाभिमान पर चोट करे, उसकी कोमल भावनाएं आहत हो ।
बच्चों पर किये या हुए हिंसक और हृदय विदारक अत्याचार न केवल उनके बाल सुलभ मन को कुंठित करते हैं, बल्कि उनके मन में एक बात घर कर जाती है, कि बड़ों (सबलों) को छोटों (निर्बल) पर हिंसा करने का अधिकार है । बाल सुलभ मन पर घर कर जाने वाली यही बात, कुंठा आगे चलकर निजी जिंदगी और सामाजिक जीवन में विषवेल के रूप में दिखाई देता है । गलती करना इंसान कि फितरत है, और गलती को सुधार लेना इंसान कि बुद्धिमता का परिचायक । गलती कोई भी करे, एहसास होने पर उसे भी दुख होता है । गलती पर दंड देने या प्रताड़ित करने से हो चुकी गलती को सुधारा नहीं जा सकता है । प्रताड़ित करने और मन को आहत करने के बजाये उसे बताया जाना चाहिए कि गलती हुई तो क्यों और कैसे हुई? उसके नुकसान का आंकलन बच्चों से ही कराएँ।
गलती का एहसास कराने के लिए हिंसक होने की जरूरत नहीं है, प्यार से बताएं । प्यार हर काम को आसन करता है । यह मुश्किल तो है, लेकिन दुश्कर नहीं और परिणाम सौ प्रतिशत ।
Saturday, April 2, 2011
आज इंडिया वर्ल्ड कप जीतेगा - कृष्णगोपाल मिश्र

आज हर हिंदुस्तानी के दिल में वर्ल्ड कप जीत लेने की इच्छा है । वैसे ज्योतिषी गणना के आधार पर आज का वर्ल्ड कप फाईनल इंडिया ही जीतेगी, क्योंकि इंडिया की आजादी की तारीख १५ अगस्त है, जिसका मूलांक ६ है आज की तारीख का मूल्यांक २ है । ६ और २ का आपसी मेल काफी अच्छा होता है । साथ ही इंडिया का वर्ष चक्र तो मजबूत चल ही रहा है, और आपका दैनिक चक्र धनु लग्न का है, जिसके चतुर्थ भाव में सूर्य, मंगल एवं गुरू की अच्छी युति है । जो जीत के लिए अच्छा सूचक है । आज सचिन का प्रदर्शन भी अच्छा रहेगा आज वे संभल कर और प्रारम्भ में धीमी गति से खेलेंगे यदि भारत की बैंटिग पारी पहले रही तो प्रारम्भ से १६:१५ बजे तक सचिन पिच पर टिके रह सकते है । सहवाग की भी शुरूआती पारी काफी धुंआ-धार होगी, लेकिन सहवाग प्रारम्भ के १५ मिनट संभल कर खेलें तो कम से कम ४५ मिनट तक पिज पर रहेंगे ।
युवराज सिंह के लिए भी आज का दिन अच्छा रहेगा, लेकिन वह थोड़ा एकाग्रता एवं धैर्य के साथ खेंले तो ज्यादा अच्छा रहेगा, फिर युवराज सिंह काफी अच्छी पारी खेलेंगे । धोनी के भी खेल में आज काफी सुधार देखने को मिलेगा, क्योंकि उनके आज के दैनिक चक्र के नौमांशा में शनि, चन्द्र दशम् भाव में काफी मजबूत है । आज धोनी अच्छा प्रदर्शन करेंगे, अतः आज टीम इंडिया वर्ल्ड कप अवश्य जीतेगी ।
Thursday, March 24, 2011
ऑस्ट्रेलिया और भारत के २४ तारीख के मैच का ज्योतिषीय आंकलन - पं. कृष्णगोपाल मिश्र

आज ऑस्ट्रेलिया और भारत का मैच है, यह मैच काफी टक्कर का हो सकता है । क्योंकि ऑस्ट्रेलिया का अंक ३ हैं, और भारत का भी अंक ३ है । दोनों ही टीमों का अंक ३ होने के कारण दोनों ही एक-दूसरे से कम नहीं पड़ेंगे । भारत के कप्तान महेन्द्रर सिंह धोनी का अंक ३ है, ये अंक भारत के लिए एक अच्छा व कारगर अंक साबित होगा, जो भारत को मजबूती प्रदान कर रहा है । पर रिकी पोंटिग का अंक ६ हैं, वो अंक भी ऑस्ट्रेलिया को अच्छी मजबूती प्रदान कर रहा है ।
भारत के डेली चार्ट के अनुसार थोड़ा सा आज का दिन खराब बन रहा है, इस कारण यह मैच संघर्षपूर्ण हो सकता है । विरेन्द्र सहवाग का अंक ९ हैं, यह आज के दिन चलने वाले बेस्टमैन कहे जायेंगे, लेकिन लंबे समय तक भरोसा करना मुश्किल होगा, फिर भी चलेगा । २४ तारीक का मूल्यांक ६ है और सहवाग का अंक ९ हैं, जो आपस में मेल खाता है । सचिन का अंक ६ है, और आज का मूल्यांक भी ६ है । इसलिये २४ तारीक के मैच में सचिन भरोसेमंद साबित होंगे, ये अच्छा प्रदर्शन देंगे ।
युवराज सिंह का अंक १ हैं, अतः २४ तारीक के मैच में इनका प्रदर्शन ठीक-ठाक रहेगा । विराट कोहली का अंक ८ है, जो आज की तारीक से काफी मैच करता है, इसलिये इनका अच्छा प्रदर्शन रहेगा । आज के दिन भरोसेमंद खिलाड़ी विराट कोहली, सचिन तेंदुलकर व सहवाग होंगे, लेकिन आज का मैच संघर्षपूर्ण रहेगा । आज का मैच जीतने के बाद २९ तारीक का मैच भारत के लिए बहुत आसान हो जायेगा ।
Saturday, March 19, 2011
आगामी पूर्णिमा जापान की घटना की दोषी नहीं - पं. कृष्णगोपाल मिश्र
पिछले दिनों जापान में आई भीषण त्रासदी सुनामी व भूकंप के रूप में प्रकृति का एक खौफनाक चेहरा उभरकर आया है । अलबत्ता इसे बहुत से लोग १९ तारीख की रात्रि को आने वाली पूर्णिमा से जोड़ रहे हैं, जिसमें चन्द्रमा पृथ्वी से काफी निकट कहा जायेगा । बहुत से ज्योतिष व खगोलविद भी इस बात की चर्चा कर रहे हैं, लेकिन देखा जाये तो ये भयानक त्रासदी पूर्णिमा से ९, १० दिन पहले घटित हुई है । चंद्रमा २७ दिन ३ घंटे में पृथ्वी का एक चक्कर लगा लेता है और पूर्णिमा के १० दिन पहले चंद्रमा और पृथ्वी की दूरी सामान्य तौर पर ही थी इस घटना का चंद्रमा से या पूर्णिमा से पृथ्वी पर कोई भी भौगोलिक परिवर्तन का आधार ज्योतिषीय ढंग से नहीं साबित होता है । यह बात अवश्य है, कि पूर्णिमा के समय में समुद्र में ज्वार-भाटा उत्पन्न होना संवेदनशील प्राणियों में संवेदना के वेग का बढ़ना आदि नजर आता है । पर इतनी बड़ी घटना को पूर्णिमा से जोड़े जाने का कहीं से भी औचित्य नहीं बनता ।
संसार तीन तरह की शक्तियों के संयुक्त बन्धन से संचालित हो रहा है, जिसको स्थूल रूप से तीन वर्गों में बाँट कर समझ सकते हैं, पहला भौतिक आधार पर वात, पित्त और कफ आध्यात्मिक आधार पर ब्रम्हा, विष्णु और महेश और वैज्ञानिक रूप से प्रोटान, इलेक्टॉन, व न्यूट्रॉन की बाइन्डिंग एनर्जी इन्हीं के आधार पर यह सृष्टि पदार्थ रूप में साकार दिखाई देती है । इन तीनों शक्तियों में जब संतुलन बिगड़ता है, तो प्रकृति की अप्राकृतिक आपदाएं होती हैं । वर्तमान समय में गोचर के ग्रहों की व्याख्या करेंगे तो हम पायेंगे कि कुंभ राशि में ही गुरू व मंगल का एक साथ मजबूत होना तथा शनि का मंगल व सूर्य से षडाष्टक योग बनाना एक भौगोलिक असंतुलन का तो सूचक है ही साथ ही साथ २०१० में जब सूर्य की मेष संक्रान्ति हुई थी उस समय ग्रह स्थिति के कारण जैसे मेष लग्न का शुक्र लग्न में पाया जाना साथ ही छठें घर में शनि की वक्रीय स्थिति शुक्र, शनि के साथ षडाष्टक योग बनाते हुए अकारक योग का सूचक है । और ऐसे में मंगल लग्नाधिपति जो पृथ्वी का बड़ा ही कारक ग्रह माना जाता है । उसका नीच राशि कर्क में कमजोर होना तथा उसके साथ चन्द्रमा का मीन राशि में मूलत्रिकोण का संबंध बनाना एक भारी प्राकृतिक आपदा विशेषकर सुनामी व भूंकप का असंतुलन तो दिखाई दे रहा है, साथ ही इस चक्र के नवमांश को ध्यान से देखें तो वृश्चिक लग्न राशि का नवमांश बन रहा है । चतुर्थ भाव में शनि व चन्द्रमा तथा द्वादश भाव में सूर्य, मंगल व राहु एक प्राकृतिक आपदा का सूचक है ।
इस चक्र के मुद्दा दशा में ध्यान दें तो जापान की यह घटना शनि की मुद्दा शुक्र की अन्तर मुददा में घटी है, यानि यहां पर हम स्पष्ट रूप से कह सकते हैं कि २०१० के सूर्य के मेष संक्रान्ति में बने चक्र के अनुसार अकारक कफ़स ग्रह काफी मजबूत अवश्था में है । और आग्नेय तत्व के कारक ग्रह सूर्य, मंगल व वृहस्पति जो कि बचाव ग्रह में है, काफी कमजोर स्थिति में दिखाई दे रहे हैं इस कारण यह घटना घटी । साथ ही साथ उस समय की मंगल की स्थिति से घटना के मंगल की स्थिति आठवें स्थान की है, जो कि और ज्यादा खराब बनती है । इस कारण से यह घटना ग्रहों के असंतुलन के कारण घटी है, ना कि चन्द्रमा के निकटता के कारण घटी है । अलबत्ता इस घटना को घटाने में चन्द्रमा एक कारक ग्रह हो सकता है, लेकिन सारा दोष चन्द्रमा का नहीं है । इसमें मुख्य दोष मंगल का दिखाई दे रहा है । भूकंप तथा प्राकृतिक आपदाएं २०११ में पुनः एक बार २६ दिसम्बर २०११ से १३ अप्रैल २०१२ के बाद पुनः प्राकृतिक आपदाओं के लक्षण दिखाई दे रहे हैं । यह सर्वाधिक खराब समय ४ जनवरी २०१२ से १२ जनवरी २०१२ के बीच में ३ मार्च से १२ मार्च के बीच दिखाई दे रहा है ।
यह एशियाई देशों में विशेषकर मुस्लिम बस्तियों में तनाव, युद्ध के कारण कुछ घटनाएं तो घटेंगी साथ ही कुछ अप्रत्याशित घटनाएं घट सकती हैं । विश्व में दो जगह विशेष सावधानी बरतनी चाहिए । पहला तो पश्चिम उत्तर के कुछ देशों में, दूसरा दक्षिण पूर्वी कुछ देशों को शांति व धैर्यपूर्वक इस घटना के ना घटने का उपाय करना चाहिये ।
संसार तीन तरह की शक्तियों के संयुक्त बन्धन से संचालित हो रहा है, जिसको स्थूल रूप से तीन वर्गों में बाँट कर समझ सकते हैं, पहला भौतिक आधार पर वात, पित्त और कफ आध्यात्मिक आधार पर ब्रम्हा, विष्णु और महेश और वैज्ञानिक रूप से प्रोटान, इलेक्टॉन, व न्यूट्रॉन की बाइन्डिंग एनर्जी इन्हीं के आधार पर यह सृष्टि पदार्थ रूप में साकार दिखाई देती है । इन तीनों शक्तियों में जब संतुलन बिगड़ता है, तो प्रकृति की अप्राकृतिक आपदाएं होती हैं । वर्तमान समय में गोचर के ग्रहों की व्याख्या करेंगे तो हम पायेंगे कि कुंभ राशि में ही गुरू व मंगल का एक साथ मजबूत होना तथा शनि का मंगल व सूर्य से षडाष्टक योग बनाना एक भौगोलिक असंतुलन का तो सूचक है ही साथ ही साथ २०१० में जब सूर्य की मेष संक्रान्ति हुई थी उस समय ग्रह स्थिति के कारण जैसे मेष लग्न का शुक्र लग्न में पाया जाना साथ ही छठें घर में शनि की वक्रीय स्थिति शुक्र, शनि के साथ षडाष्टक योग बनाते हुए अकारक योग का सूचक है । और ऐसे में मंगल लग्नाधिपति जो पृथ्वी का बड़ा ही कारक ग्रह माना जाता है । उसका नीच राशि कर्क में कमजोर होना तथा उसके साथ चन्द्रमा का मीन राशि में मूलत्रिकोण का संबंध बनाना एक भारी प्राकृतिक आपदा विशेषकर सुनामी व भूंकप का असंतुलन तो दिखाई दे रहा है, साथ ही इस चक्र के नवमांश को ध्यान से देखें तो वृश्चिक लग्न राशि का नवमांश बन रहा है । चतुर्थ भाव में शनि व चन्द्रमा तथा द्वादश भाव में सूर्य, मंगल व राहु एक प्राकृतिक आपदा का सूचक है ।
इस चक्र के मुद्दा दशा में ध्यान दें तो जापान की यह घटना शनि की मुद्दा शुक्र की अन्तर मुददा में घटी है, यानि यहां पर हम स्पष्ट रूप से कह सकते हैं कि २०१० के सूर्य के मेष संक्रान्ति में बने चक्र के अनुसार अकारक कफ़स ग्रह काफी मजबूत अवश्था में है । और आग्नेय तत्व के कारक ग्रह सूर्य, मंगल व वृहस्पति जो कि बचाव ग्रह में है, काफी कमजोर स्थिति में दिखाई दे रहे हैं इस कारण यह घटना घटी । साथ ही साथ उस समय की मंगल की स्थिति से घटना के मंगल की स्थिति आठवें स्थान की है, जो कि और ज्यादा खराब बनती है । इस कारण से यह घटना ग्रहों के असंतुलन के कारण घटी है, ना कि चन्द्रमा के निकटता के कारण घटी है । अलबत्ता इस घटना को घटाने में चन्द्रमा एक कारक ग्रह हो सकता है, लेकिन सारा दोष चन्द्रमा का नहीं है । इसमें मुख्य दोष मंगल का दिखाई दे रहा है । भूकंप तथा प्राकृतिक आपदाएं २०११ में पुनः एक बार २६ दिसम्बर २०११ से १३ अप्रैल २०१२ के बाद पुनः प्राकृतिक आपदाओं के लक्षण दिखाई दे रहे हैं । यह सर्वाधिक खराब समय ४ जनवरी २०१२ से १२ जनवरी २०१२ के बीच में ३ मार्च से १२ मार्च के बीच दिखाई दे रहा है ।
यह एशियाई देशों में विशेषकर मुस्लिम बस्तियों में तनाव, युद्ध के कारण कुछ घटनाएं तो घटेंगी साथ ही कुछ अप्रत्याशित घटनाएं घट सकती हैं । विश्व में दो जगह विशेष सावधानी बरतनी चाहिए । पहला तो पश्चिम उत्तर के कुछ देशों में, दूसरा दक्षिण पूर्वी कुछ देशों को शांति व धैर्यपूर्वक इस घटना के ना घटने का उपाय करना चाहिये ।
Subscribe to:
Posts (Atom)