<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385</id><updated>2011-07-29T01:12:12.074-07:00</updated><category term='- श्रीमती भुवनेश्‍वरी मालोत साभार - जतन से ओढ़ी चदरिया'/><category term='[धर्म-अध्यात्म]'/><category term='के.एन. गोविन्दाचार्य'/><category term='मोनिका जैन'/><category term='संवाद दर्पण'/><category term='[समाज]'/><category term='- रौशन कुमार'/><category term='स्वास्थ्य'/><category term='-गोपाल प्रसाद'/><category term='विचार मंथन'/><category term='डा. राजकरण हमदम'/><category term='- गोपाल प्रसाद'/><category term='- रीतू अग्रवाल'/><category term='कृष्ण गोपाल मिश्रा'/><category term='-ज्ञान दीपक दुबे'/><category term='डॉ अ.कीर्तिवर्धन'/><category term='- विनोद बंधु'/><category term='साहित्य'/><category term='- सुरेन्द्र अग्निहोत्री'/><category term='[राजनीति]'/><category term='(विचार मंथन)'/><category term='रवि कुमार पटवा'/><category term='- पं० शक्‍तिमोहन श्रीमाली'/><category term='- मुकेश पाण्डेय'/><category term='6- डॉ. भरत मिश्र प्राची'/><category term='देबलीना बनर्जी'/><category term='- डॉ० भरत मिश्र प्राची'/><category term='- अर्पना चन्देल'/><category term='डॉ अ कीर्तिवर्धन'/><category term='- डॉ. गौरी शंकर राजहंस'/><category term='अजय कुमर पान्डेय'/><category term='- नवीन कुमार'/><category term='[समसामायिक]'/><category term='हर्ष वी. पंत'/><category term='- पं. कृष्णगोपाल मिश्र'/><category term='- हनीफा'/><category term='अखिल वोहरा'/><category term='आचार्य महाप्रज्ञ'/><category term='पायल अग्रवाल'/><category term='कृष्णगोपाल मिश्रा'/><category term='संजय कुंदन'/><category term='- ए. के. पाण्डेय'/><category term='ज्योतिष'/><category term='डॉक्टर राजीव श्रीवास्तवा'/><category term='धर्म-अध्यात्म'/><category term='राजनीति'/><category term='एनके सिंह'/><category term='- आकांक्षा यादव'/><category term='चंडीगढ़'/><category term='- अंजलि सिन्हा'/><category term='- अडनी ब्यूरो'/><category term='चाँद खाँ रहमानी'/><category term='कला -संस्कृति'/><category term='अंतर्राष्ट्रीय'/><category term='शिक्षा'/><category term='पं. कृष्ण मुरारी मिश्रा'/><category term='- नंदन नीलकनी'/><category term='आपका कृष्णगोपाल मिश्र संपादकीय'/><category term='अन्तर्राष्ट्रीय'/><category term='गोपाल प्रसाद'/><category term='(पुस्तक समीक्षा)'/><category term='- कमल उपाध्याय'/><category term='आपका                                                               कृष्ण गोपाल मिश्र'/><category term='समय दर्पण प्रतिनिधि'/><category term='नवीन कुमार'/><category term='समाज'/><category term='(बाल जगत)'/><category term='- मानस'/><category term='[व्यापार]'/><category term='- जौली अंकल'/><category term='मुकेश पाण्डेय'/><category term='- अजय कुमार पाण्डेय'/><title type='text'>Samay Darpan</title><subtitle type='html'>नर्मदा क्रि‌एटिव प्रा० लि० दिल्ली स्थित एक ऐसी कंपनी है जिसने रचनात्मकता उत्पन्‍न करने की शक्‍ति वाले समूह को संयोजित कर अपने आपको स्थापित किया है । कंपनी का का मुख्य ध्येय ऐसे कार्यक्षेत्र में प्रवेश करना है जिससे उसका वर्णन महसूस किया जा सके । कंपनी का मुख्य कार्य वेबसा‌इट निर्माण एवं रखरखाव, ज्योतिष परामर्श तथा मैरिज ब्यूरो पोर्टल ( samaychakra.com , 7 pherenet.com) मीडिया कंसलटेंसी तथा ऑनला‌इन हिंदी मासिक पत्रिका (samaydarpan.com) का प्रकाशन आदि है ।</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><link rel='next' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default?start-index=101&amp;max-results=100'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>219</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-7887468982474804376</id><published>2011-06-28T06:13:00.000-07:00</published><updated>2011-06-28T06:16:44.861-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='- पं० शक्‍तिमोहन श्रीमाली'/><title type='text'>रंगों से सँवारें जीवन</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/-y0igm2ObG_I/TgnUME_DeSI/AAAAAAAAAbw/-NkXW2wDM14/s1600/color.jpg"&gt;&lt;img style="float: left; margin: 0pt 10px 10px 0pt; cursor: pointer; width: 320px; height: 320px;" src="http://3.bp.blogspot.com/-y0igm2ObG_I/TgnUME_DeSI/AAAAAAAAAbw/-NkXW2wDM14/s320/color.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5623258913710504226" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;span id="ctl00_lbltext" class="txt" style="width: 100%;font-size:14px;" &gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px;"&gt;       प्रकृति स्वयं को विभिन्‍न रंगों में अभिव्यक्‍त करती है और व्यक्‍ति  प्रकृति के इन्हीं रंगों के माध्यम से अपनी संवेदनाओं, भावनाओं, एवं पसंद  को अभिव्यक्‍त करता है । रंग अपनी ओजस्विता एवं प्रकाश द्वारा मानव  मस्तिष्क एवं शरीर को प्रभावित करते हैं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     सूर्य के श्‍वेत उज्‍जवल प्रकाश में सात रंग अर्न्तनिहित होते हैं ।  लाल, पीला, आसमानी, हरा, नीला तथा बैंगनी ये सातों रंग वस्तुतः सात रंगों  की रश्मियां हैं इन्हें त्रिआयामी (प्रिज्म) नामक शीशे से देखा जा सकता है ।  जम कालिक ग्रहों की प्रबल या निर्मल अवस्था के अनुरूप इन ग्रहों की  रश्मियां मनुष्य के जीवन पर सकारात्मक अथवा नकारात्मक प्रभाव डालती हैं इसी  कारण हर व्यक्‍ति का भाग्य एवं व्यक्‍तित्व दूसरे से भिन्‍न होता है ।  वैज्ञानिकों ने भी अपने परीक्षणों के आधार पर रंगों के लक्षणों एवं  प्रभावों की व्याख्या की है । वर्तमान में प्रचलित ‘रंगों द्वारा चिकित्सा’  मानव जीवन में रंगों की महत्त्वता का ज्वलन्त उदाहरण है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     पौराणिक ग्रंथों में श्रीकृष्ण एवं राम को पीले पीताम्बर पहने, माँ  भगवती व लक्ष्मी को लाल साड़ी पहने, सरस्वती को श्‍वेत वस्त्र पहने दिखाया  गया है । साधु-संयासी सदैव भगवा वस्त्र धारण करते हैं । डॉक्टर सफेद व हरे  वस्त्र का उपयोग करते हैं । जज व वकील काले रंग का चौगा इस्तेमाल करते हैं ।  वास्तव में इन सब के पीछे रंगों का मनोवैज्ञानिक सांकेतिक अर्थ है । रंगों  का ज्योतिष शास्त्र, रत्‍न शास्त्र, धार्मिक परम्पराओं व चिकित्सा शास्त्र  में भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है । कुछ रंग आकर्षण उत्पन्‍न करते हैं,  हमे पॉजीटिव एनर्जी देते हैं तो कुछ रंगों को हमारी आँखें दुबारा देखना  नहीं चाहती । कुछ रंग मन को शान्ति प्रदान करते हैं, आँखों को ठण्डक देते  हैं, जबकि कुछ रंग शरीर में गरमी पहुंचाते हैं, हमको उत्तेजित करते हैं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     वस्त्र, कमरे, टेबल, क्लॉथ, बिस्तरों, कम्बलों सॉज-सज्जा के सामानों  में किन रंगों का प्रयोग किया जाये इसकी जानकारी सर्व साधारण  को नहीं होती  । वास्तव में रंगों को उनके प्रभावों व परिणामों को ध्यान में रखते हुए  प्रयोग में लाया जाना चाहिये । जीवन में अनुकूल रंगों को प्रयोग में लाकर न  केवल भाग्य को बलवान बनाया जा सकता है बल्कि प्राकृतिक तौर पर रोगों का  निदान भी किया जा सकता है । वैसे तो सात रंगों के सम्मिश्रण से हजारों रंग  बन जाते हैं, किन्तु मनुष्य के शरीर एवं मस्तिष्क को प्रभावित करने वाले  कुछ रंग इस प्रकार हैं-       &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;      &lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; color: rgb(214, 208, 208);"&gt;       सफेद -       &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;      &lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px;"&gt;       यह रंग पवित्रता, शुद्धता, शांति, विद्या, नीति एवं सभ्यता का प्रतीक  है । सफेद रंग के प्रयोग से मन की चंचलता समाप्त होती है । व्यक्‍ति की  सोच सकारात्मक बनती है । सफेद रंग पसंद करने वाला व्यक्‍ति संयमी, सहनशील व  शुद्धता का ध्यान रखने वाला होता है । सात्त्विक विचार का होता है ।  विद्यार्थियों के लिये यह रंग शुभ फलदायक है ।       &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;      &lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; color: red;"&gt;       लाल -       &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;      &lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px;"&gt;       लाल रंग ऊर्जा, स्फूर्ति शक्‍ति महत्त्वाकांक्षा, उत्तेजना, क्रोध,  पराक्रम, बल व उत्साह का द्योतक है । यह रंग अनुकूल परिणाम, सफलता,  संघर्षों से जूझने व खतरों से खेलने में अदम्य साहस प्रदान करता है । यह  स्नायु व रक्‍त की क्रियाशीलता को बढ़ाता है तथा एड्रीनल ग्रन्थि व संवेदी  तंत्रिकाओं को उत्तेजित करता है । क्रोधी, चिड़चिड़े व हाई ब्लड प्रेशर से  पीड़ित लोगों को इस रंग के प्रयोग से बचना चाहिये । शारीरिक दुर्बलता,  मानसिक क्षीणता, भय, ह्रदय सम्बन्धी विकार तथा नपुंसकता को दूर करने के  लिये लाल रंग का प्रयोग लाभदायक होता है ।       &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;      &lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; color: blue;"&gt;       नीला -       &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;      &lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px;"&gt;       यह रंग स्नेह, शांति, सौजन्य, पवित्रता, बल, पौरूष और वीर भाव का  परिचायक है । नीला रंग व्यक्‍ति को सत्य भाषी, धार्मिक, धैर्यवान बनाता है ।  इस रंग में प्रेम-माधुर्य, त्याग, कोमलता, अनुराग और विश्‍वास के भाव  निहित रहते हैं । यह रंग रक्‍त संचार व्यवस्था को ठीक रखता है । नीले रंग  की बोतल में पानी भर कर पीने से एवं इस रंग के अधिकाधिक प्रयोग से हाई ब्लड़  प्रेशर, जोड़ों के दर्द, दमा, श्‍वांस के रोग, स्नायु तंत्र व आँखों के रोग  दूर हो सकते हैं ।       &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;      &lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; color: yellow;"&gt;       पीला -       &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;      &lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px;"&gt;       पीला रंग आनन्द, ऐश्‍वर्य, कीर्ति, भव्यता, सुख, आरोग्यता, एवं  योग्यता का परिचायक है । हल्का या मिश्रित पीला रंग दरिद्रता व बीमारी का  सूचक है । माँस-पेशियों को मजबूत बनाये रखने व पाचन संस्थान को ठीक रखने के  लिये इसका प्रयोग लाभदायक है किन्तु अधिक समय तक इसके प्रयोग से पित्त दोष  उत्पन्‍न हो सकता है । पीला रंग पसंद करने वाले व्यक्‍ति प्रशंसा के भूखे,  बातों को बढ़ा चढ़ा कर कहने वाले, लोगों को टीका-टिप्पणी पर ध्यान न देने  वाले तथा कुछ डरपोक होते हैं ।       &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;      &lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; color: green;"&gt;       हरा -       &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;      &lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px;"&gt;       हरा रंग व्यक्‍ति की राजसी ठाट, गर्वशीलता, अपरिवर्तन और निंरकुश  प्रवृत्ति की ओर संकेत करता है । यह रंग मन को प्रसन्‍नता, ताजगी, हृदय को  शीतलता, सुख-शांति व नेत्रों को ठण्डक प्रदान करता है । हरा रंग पसंद करने  वाले व्यक्‍ति हास्य प्रिय, चंचल, कर्मशील, सक्रिय व आत्म विश्‍वासी होते  हैं । हर रंग के प्रयोग द्वारा नाड़ी सम्बन्धी रोग, आमाशय, आँतों, वाणी,  जिह्‌वा व लीवर के रोग दूर किये जा सकते हैं । हरा रंग मन में उत्तम  भावनाओं को विकसित कर मानसिक तनाव से छुटकारा दिलाता है ।       &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;      &lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; color: orange;"&gt;       नारंगी -       &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;      &lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px;"&gt;       नारंगी रंग लाल व पीले रंग का सम्मिश्रण है । यह रोगाणु प्रतिरोधक  क्षमता को बढ़ाता है । नाड़ी की गति को बढ़ाता है किन्तु रक्‍त चाप को सामान्य  बनाये रखता है । यह जीवन में उत्तेजना व बल प्रदान करता है । इस रंग को  पसंद करने वाले व्यक्‍ति नर्म दिल, दयालु, एकाग्रता से काम करने वाले तथा  धीरे-धीरे मित्रता को विकसित करने वाले होते हैं । ये लोग व्यर्थ वाद-विवाद  के झमेले में उलझना पसंद नही करते हैं । नारंगी रंग धार्मिकता,  दार्शनिकता, एवं साधना का द्योतक है ।       &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;      &lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; color: black;"&gt;       काला -       &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;      &lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px;"&gt;       सभी रंगों के सम्मिश्रण से तैयार काला रंग रंगों की सत्ता को नकारता  है तथा विमुखता को व्यक्‍त करता है । यह रंग बदला, घृणा तथा द्वन्द्व की ओर  संकेत करता है । काला रंग पसंद करने वाले व्यक्‍ति परिस्थितियों के  विरूद्ध विद्रोह करने व हार न मानने की क्षमता रखते हैं । न्याय व समर्पण  की भावना रखने वाले ये लोग समय आने पर सबको तिलांजलि देने से भी नहीं चूकते  । तामसिक प्रवृत्ति का यह रंग सुरक्षात्मक कवच के रूप में भी प्रयोग में  लाया जाता है । इस रंग का प्रयोग सर्दियों में अनुकूल रहता है ।       &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-7887468982474804376?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/7887468982474804376/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/06/blog-post_9094.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/7887468982474804376'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/7887468982474804376'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/06/blog-post_9094.html' title='रंगों से सँवारें जीवन'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' 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फिल्म के जन्मदाता चार्ली चैप्लिन के  बारे में बहुत कुछ नई जानकारियां दी हैं । पापा क्या आप जानते हो कि चार्ली  चैप्लिन दुनिया के सबसे बड़े आदमियों में से एक थे । वीरू ने मज़ाक करते हुए  कहा क्यूं वो क्या १२ नंबर के जूते पहनते थे? बेटे ने नाराज़ होते हुए कहा  अगर आपको ठीक से सुनना हो तो मैं उनके बारे में बहुत कुछ बता सकता हूँ ।  जैसे ही वीरू ने हामी भरी तो उसके बेटे ने कहना शुरू किया कि हमारे टीचर ने  बताया है कि चार्ली चैप्लिन का नाम आज भी दुनिया के उन प्रसिद्ध हास्य  कलाकारों की सूची में सबसे अव्वल नंबर पर आता है जिन्होंने अपनी जुबान से  बिना एक अक्षर भी बोले सारा जीवन दुनिया को वो हंसी-खुशी और आनंद दिया है  जिसके बारे में आसानी से सोचा भी नहीं जा सकता । इस महान कलाकार ने जहां  अपनी कॉमेडी कला की बदौलत चुप रहकर अपने जीते जी तो हर किसी को हंसाया वहीं  आज उनके इस दुनिया से जाने के बरसों बाद भी हर पीढ़ी के लोग उनकी हास्य की  इस जादूगरी को सलाम करते हैं । 16 अप्रैल 1889 को इंग्लैंड में जन्मे इस  महान कलाकार की सबसे बड़ी विशेषता यही थी कि लोग न सिर्फ उनके हंसने पर उनके  साथ हंसते थे बल्कि उनके चलने पर, उनके रोने पर, उनके गिरने पर, उनके  पहनावे को देखकर दिल खोलकर खिलखिलाते थे । अगर इस बात को यूं भी कहा जाये  कि उनकी हर अदा में कॉमेडी थी और जमाना उनकी हर अदा का दीवाना था, तो गलत न  होगा ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     पांच-छह साल की छोटी उम्र में जब बच्चे सिर्फ खेलने कूदने में मस्त  होते हैं इस महान कलाकार ने उस समय कॉमेडी करके अपनी अनोखी अदाओं से  दर्शकों को लोटपोट करना शुरू कर दिया था । चार्ली-चैप्लिन ने अपने घर को ही  अपनी कॉमेडी की पाठशाला और अपने माता-पिता को ही अपना गुरू बनाया । इनके  माता-पिता दोनों ही अपने जमाने के अच्छे गायक और स्टेज के प्रसिद्ध कलाकार  थे । एक दिन अचानक एक कार्यक्रम में इनकी मां की तबियत खराब होने की वजह से  उनकी आवाज चली गई । थियेटर में बैठे दर्शकों द्वारा फेंकी गई कुछ वस्तुओं  से वो बुरी तरह घायल हो गईं । उस समय बिना एक पल की देरी किये इन नन्हें  बालक ने थोड़ा घबराते हुए लेकिन मन में दृढ़ विश्‍वास लिये अकेले ही मंच पर  जाकर अपनी कॉमेडी के दम पर सारे शो को संभाल लिया । उसके बाद चार्ली  चैप्लिन ने जीवन में कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     सर चार्ली चैप्लिन एक सफल हास्य अभिनेता होने के साथ-साथ फिल्म  निर्देशक और अमेरिकी सिनेमा के निर्माता और संगीतज्ञ भी थे । चार्ली  चैप्लिन ने बचपन से लेकर 77 वर्ष की आयु तक अभिनय, निर्देशक, पटकथा,  निर्माण और संगीत की सभी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया । बिना शब्दों और  कहानियों की हॉलीवुड में बनी फिल्मों में चार्ली चैप्लिन ने हास्य की अपनी  खास शैली से यह साबित कर दिया कि केवल पढ़-लिख लेने से ही कोई विद्वान नहीं  होता । महानता तो कलाकार की कला से पहचानी जाती है और बिना बोले भी आप  गुणवान बन सकते हैं । यह अपने युग के सबसे रचनात्मक और प्रभावशाली  व्यक्‍तियों में से एक थे । इन्होंने सारी उम्र सादगी को अपनाने हुए कॉमेडी  को ऐसी बुलदियों तक पहुंचा दिया जिसे आज तक कोई दूसरा कलाकार छू भी नहीं  पाया । इनके सारे जीवन को यदि करीब से देखा जाये तो एक बात खुलकर सामने आती  है कि इस कलाकार ने कॉमेडी करते समय कभी फूहड़ता का सहारा नहीं लिया ।  इसलिये शायद दुनिया के हर द्वेष में स्टेज और फिल्मी कलाकारों ने कभी इनकी  चाल-ढाल से लेकर कपड़ों तक और कभी इनकी खास स्टाइल वाली मूछों की नकल करके  दर्शकों को खुश करने की कोशिश की है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     हर किसी को मुस्कुराहट और खिलखिलाहट देने वाले मूक सिनेमा के आइकन  माने जाने वाले इन कलाकार के मन में सदैव यही सोच रहती थी कि अपनी तारीफ  खुद ही की तो क्या किया, मजा तो तभी है कि दूसरे लोग आपके काम की तारीफ  करें । चार्ली चैप्लिन की कामयाबी का सबसे बड़ा रहस्य यही था कि इन्होंने  जीवन को ही एक नाटक समझ कर उसकी पूजा की जिस की वजह यह खुद भी प्रसन्‍न  रहते थे और दूसरों को भी सदा प्रसन्‍न रखते थे । इनके बारे में आज तक यही  कहा जाता है कि इनके अलावा कोई भी ऐसा कलाकार नहीं हुआ जिस किसी एक  व्यक्‍ति ने अकेले सारी दुनिया के लोगों को इतना मनोरंजन, सुख और खुशी दी  हो । सारी बात सुनने के बाद वीरू ने कहा कि तुम्हारे टीचर ने चार्ली  चैप्लिन के बारे में बहुत कुछ बता दिया लेकिन यह नहीं बताया कि उन्होंने यह  भी कहा था कि हंसी बिना बीता हमारा हर दिन व्यर्थ होता है ।       सर चार्ली चैप्लिन के महान और उत्साही जीवन से प्रेरणा लेते हुए जौली  अंकल का यह विश्‍वास और भी दृढ़ हो गया है कि जो कोई सच्ची लगन से किसी  कार्य को करते हैं उनके विचारों, वाणी एवं कर्मों पर पूर्ण आत्मविश्‍वास की  छाप लग जाती है । कॉमेडी के मसीहा चार्ली चैप्लिन ने इस बात को सच साबित  कर दिखाया कि कोई किसी भी पेशे से जुड़ा हो वो चुप रहकर भी अपने पेशे की सही  सेवा करने के साथ हर किसी को खुशियाँ दे सकता है ।       &lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-5915719059975905402?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/5915719059975905402/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/06/blog-post_28.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/5915719059975905402'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/5915719059975905402'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/06/blog-post_28.html' title='“कॉमेडी के मसीहा - चार्ली चैप्लिन”'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-3360813672765166456</id><published>2011-06-07T01:28:00.001-07:00</published><updated>2011-06-07T01:28:31.601-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='- ए. के. पाण्डेय'/><title type='text'>केन्द्र सरकार ने दिखाई सख्ती</title><content type='html'>&lt;span id="ctl00_lbltext" class="txt" style="font-size: 14px; width: 100%;"&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px;"&gt;       मनरेगा में हो रहे व्यापक भ्रष्टाचार और घपलेबाजी को रोकने के लिए  केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने एक सख्त निर्णय लिया है जिसके अनुसार,  राज्य सरकार को दिए जाने वाले केन्द्रीय राशि वित्तीय वर्ष में तीन  किश्तों में दी जाती है । ये राशि अब राज्यों को पहले किश्त का काम और खर्च  का ब्यौरेवार रिपोर्ट देने के बाद ही दूसरी किश्त जारी की जाएगी । सरकारी  सूत्रों के अनुसार, मनरेगा के तहत्‌ राज्यों सरकारों को दी जाने वाली राशि,  राज्य सरकार अन्य योजनाओं पर खर्च कर रही है, जिसकी वजह से मनरेगा को  सुचारू रूप से क्रियान्वित करने में समस्या आ रही है ।       &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;       &lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px;"&gt;       केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2011-12 के लिए मनरेगा के तहत राज्यवार राशि आबंटन :-       &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;       &lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px;"&gt;       उत्तर प्रदेश    :-      8.435 करोड़ रूपये&lt;br /&gt;      मध्य प्रदेश    :-      6000 करोड़ रूपये&lt;br /&gt;      पश्‍चिम बंगाल :-      3.713 करोड़ रूपये&lt;br /&gt;      बिहार        :-      3,166 करोड़ रूपये&lt;br /&gt;      छत्तीसगढ़    :-      2,075 करोड़ रूपये&lt;br /&gt;      झारखंड      :-      1,471 करोड़ रूपये&lt;br /&gt;      &lt;/div&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-3360813672765166456?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/3360813672765166456/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/06/blog-post_4962.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/3360813672765166456'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/3360813672765166456'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/06/blog-post_4962.html' title='केन्द्र सरकार ने दिखाई सख्ती'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-7317558705356649991</id><published>2011-06-07T01:20:00.000-07:00</published><updated>2011-06-07T01:20:22.097-07:00</updated><title type='text'>केन्द्र सरकार ने दिखाई सख्ती</title><content type='html'>&lt;a href="http://www.samaydarpan.com/June2011/aavrankatha1.aspx"&gt;केन्द्र सरकार ने दिखाई सख्ती&lt;/a&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-7317558705356649991?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://www.samaydarpan.com/June2011/aavrankatha1.aspx' title='केन्द्र सरकार ने दिखाई सख्ती'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/7317558705356649991/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/06/blog-post_07.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/7317558705356649991'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/7317558705356649991'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/06/blog-post_07.html' title='केन्द्र सरकार ने दिखाई सख्ती'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-5233381751673782403</id><published>2011-06-06T04:46:00.001-07:00</published><updated>2011-06-06T04:46:46.593-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मोनिका जैन'/><title type='text'>ज्योतिष और उससे जुड़े भ्रम</title><content type='html'>&lt;span class="Apple-style-span" style="font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: 14px; -webkit-border-horizontal-spacing: 2px; -webkit-border-vertical-spacing: 2px; "&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; "&gt;ज्योतिष शास्त्र उस विद्या का नाम है जो ब्रह्मांड में विचरने वाले ग्रह - नक्षत्रों की गति, दूरी और स्थिति का गणितीय आधार पर गणना करता है । ज्योतिष शास्त्र का सम्बन्ध वेदों से है परन्तु इसका यह तात्पर्य कादाचित नहीं कि ज्योतिष शास्त्र महज़ बस एक ग्रन्थ है । अपितु यह एक विज्ञान है जो अपने गणतिय समीकरणों के ज़रिये आकाशीय ग्रह नक्षत्रों की चाल बताने के साथ - साथ सूर्य - चन्द्र ग्रहण, तिथि, व्रत - त्यौहार, ऋतु परिवर्तन, आदि का भी इसी के माध्यम से पता लगता है । ज्योतिषीय गणना‌ओं के आधार पर ही एक भविष्यवक्‍ता मानव जीवन से जुड़े अनेक पहलु‌ओं के विषय में हमें जन्मपत्री के माध्यम से बताता है । किसी भी व्यक्‍ति की कुण्डली का अध्ययन भी ज्योतिषीय गणना‌ओं के आधार पर ही किया जाता है । आज बदलते दौर के साथ हम जितना आधुनिक होते जा रहे हैं उतना ही ज़्यादा हम भविष्य को जानने के लि‌ऐ भी आतुर रहने लगे हैं । शायद यही वजह है कि आज ज्योतिष विद्या को अनेक भ्रान्तियों ने आ घेरा है जिस कारण समाज में अन्धविश्‍वास भी बढ़ने लगा है । वहम और वास्तविकता के बीच का सच क्या है यही जानने के लि‌ऐ हमने बातचीत की पण्डित कृष्ण गोपाल मिश्र से -&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; color: rgb(165, 42, 42); "&gt;प्र. - पण्डित जी ज्योतिष क्या है ?&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; "&gt;उ. - वैसे ज्योतिष शब्द अपने आप में ही अपना अभिप्राय प्रकट करता है । ज्योतिष खगोलीय ज्योति पिण्डों की स्थिति एवं उनके वातावरण पर प्रभाव आदि ज्ञान को कहा जाता है । प्रकृति से जुड़ा हर ज्ञान अपने आप में विज्ञान है और विज्ञान से भी सर्वोपरि ज्ञान या महाविज्ञान ज्योतिष है जो हमें जीवन की उत्पत्ति या जीवन की रूपरेखा आदि का ज्ञान प्रदान करता है, बल्कि हम यह कह सकते हैं कि हमारे समाज के अधिकतर संस्कार जो वैज्ञानिक सम्मत हैं वो ज्योतिष ज्ञान से ही संभव है । जिस प्रकार से जीवन का आधार बिंदु या पदार्थ मात्र का साकार रूप में होने का आधार है, धनात्मक, तटस्थ और ऋणात्मक नामक तीन ऊर्जा‌ओं के सहसंजन (आपस में जुड़ा होना), जिसे वैज्ञानिक आधार पर पदार्थ का सूक्ष्मतम कण परमाणु संरचना से समझ सकते हैं । इस आधार पर इस ब्रह्माण्ड में हर छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा कण पिण्ड या पदार्थ सूक्ष्म व स्थूल रूप से एक-दूसरे से कहीं न कहीं सम्बंध रखते हैं और ऊर्जा परिवर्तन के आधार संरचना, आकार एवं गुण आदि परिवर्तित होते रहते हैं । ऊर्जा परिवर्तन पिण्डों के आपसी आकर्षण के कारण गतिमान पिण्डों द्वारा कालपरिवर्तन पर निर्भर करता है । जिससे हम सबका जीवन संचालित होता है ।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; color: rgb(165, 42, 42); "&gt;प्र. - क्या ज्योतिष और हस्त रेखा विज्ञान एक दूसरे पर निर्भर हैं ?&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; "&gt;उ. - ज्योतिष खगोलीय पिण्डों की गति दिशा व प्रभाव के गणितीय आंकलन पर निर्भर करता है, जबकि हस्तरेखा समौद्रिक ज्ञान अर्थात्‌ एक लक्षण विज्ञान है, जो हाथों की रूपरेखा, बनावट आदि के आधार पर फलादेश बताता है ।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; color: rgb(165, 42, 42); "&gt;प्र. - क्या जन्म कुण्डली पर ग्रहण जैसी को‌ई अवधारणा है या यह सिर्फ भ्रम है ?&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; "&gt;उ. - कुण्डली में किसी भी प्रकार का को‌ई ग्रहण नहीं होता । कुण्डली में कारक और अकारक ग्रहों को तुलनात्मक आंकलन पर भविष्यफल कथन किया जाता है ।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; color: rgb(165, 42, 42); "&gt;प्र. - ज्यातिषीय गणना‌यें कितने प्रतिशत सही होने की सम्भावनाएंं होती हैं और ज्योतिष पर कितना निर्भर होना चाहिये ?&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; "&gt;उ. - ज्योतिष तो अपने आप में पूर्णतः सही गणना है, परन्तु भविष्य वक्‍ता की गणना सही है या गलत यह इस बात पर निर्भर करता है कि जो व्यक्‍ति गणना कर रहा है, उसके पास ज्योतिष का कितना ज्ञान है, जिस प्रकार एक प्रशिक्षित डॉक्टर या वैद्य किसी बीमारी को डा‌इग्नोस करने में पहले उसके लक्षण व स्वभाव को समझता है फिर उसका इलाज करता है । हालांकि यह और बात है कि आज के मशीनी युग में हम मशीनी परीक्षण पर निर्भर हैं, लेकिन दोनों ही स्थितियों में डॉक्टर व वैद्य का ज्ञान और परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही मरीज़ को सही इलाज मिलना सम्भव है । थोड़ी सी लापरवाही या अल्पज्ञान मरीज़ के लिये घातक सिद्ध हो सकता है ठीक उसी प्रकार ज्योतिष में ग्रहों के स्वभाव, भाव और राशि तथा आपसी ग्रहों के संबंधों के आधार पर भविष्य कथन होता है जो पूर्णतः सही होता है । परन्तु यदि ज्योतिष शास्त्री अगर ग्रहों की स्थिति व भावगत स्वभाव को समझने में थोड़ी सी भी भूल कर देते हैं तो उनका कथन गलत हो जाता है ।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; color: rgb(165, 42, 42); "&gt;प्र. - क‌ई पण्डित जन्मपत्री देख कर दोष निवारण के लिये मंत्र जाप पूजा पाठ आदि का विधान बताते हैं साथ ही वह कहते हैं कि “आप हमें ग्यारह हज़ार या फिर इक्कीस या इकत्तीस हज़ार की धन राशि दे दें तो हम आपके लिये मंत्र जाप, पूजा पाठ आदि विधान कर देंगे और आपकी कुण्डली के दोष निवारण हो जायेंगे तथा आपको मन वांछित फल प्राप्त हो जायेगा“ क्या यह सचमुच सम्भव है ?&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; "&gt;उ. - ज्योतिष का सारा आंकलन काल समय पर निर्भर करता है । ज्योतिष में यह माना जाता है कि जो पदार्थ जीव, सजीव जिस काल में साकार रूप लिया है उस काल की ग्रह स्थिति के अनुसार उसका स्वभाव, गुण, दोष जीवन तय हो जाता है, जिसमें कभी भी विपरीत बदलाव नहीं हो सकते । थोड़ा बहुत उपायों एवं प्राकृतिक आधार पर आचार व्यवहार से उसके कुप्रभाव में कमी लायी जा सकती है, अर्थात सीधे तौर पर किसी की तकदीर बदली नहीं जा सकती है । जहाँ तक पूजा-पाठ का सवाल है पूजा का आधार श्रद्धा है, चूंकि हम साकार ब्रह्म को मानते हैं और उस पर आस्था रखकर उसका पूजन कर हम अपना आत्मबल बढ़ाते हैं तथा उस आस्था के बल पर हम विपरीत परिस्थिति में भी स्वयं को दृढ़ रख पाते हैं, पूजा का यही अभिप्राय है । जहाँ तक मंत्रों की बात है, तो मंत्र एकाग्रता लाते हैं अधिकांश मंत्र स्वर से शुरू होते हैं । स्वर सूक्ष्म रूप से ऊर्जा का द्योतक होता है जो आग्नेय ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है । हमारी वर्णमाला में व्यंजन स्थूल रूप से ठण्डी प्रवृत्ति को क्षारीय ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करते हैं । इन दोनों के संयोजन से शब्द का निर्माण होता है, जिसके उच्चारण से व्यक्‍ति को एकाग्रता आत्मबल व ऊर्जा प्रदान होती है पर यह स्वयं करने से ज्यादा प्रभावी होता है, लेकिन इसका अभिप्राय यह भी नहीं है, कि इंसान की तकदीर बदली जा सकती है । यह ठीक उसी प्रकार है जैसे कि तपती धूप में इंसान स्वयं को धूप से बचाने के लिये छाता तो लगा सकता है, परन्तु सूरज को नहीं हटा सकता । इसलिये ज्योतिष पर विश्वास रखने के साथ - साथ हमें अपने पुरूषार्थ पर भी भरोसा रखना चाहिये ।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; color: rgb(165, 42, 42); "&gt;प्र. - क्या जन्मपत्री के ज़रिये यह पता लगाया जा सकता है कि जातक पर तंत्र - मंत्र या जादू टोना किया गया है या नहीं और क्या कुण्डली के ग्रहों के अनुसार उसका तोड़ किया जा सकता है या यह महज़ भ्रम है ?&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; "&gt;उ. - किसी की तकदीर पर किसी भी विधि द्वारा बदलाव नहीं किया जा सकता । ये महज़ एक भ्रम ही है । मंत्र, जादू, टोने के द्वारा किसी का नुकसान नहीं किया जा सकता अगर ऐसा संभव होता तो अभी तात्कालिक उदाहरण यह है कि ओसामा को मारने के लि‌ए अमेरिका को ११ वर्ष नहीं लगते ।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; color: rgb(165, 42, 42); "&gt;प्र. - क्या कुण्डली में कालसर्प जैसा को‌ई योग होता है ?&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; "&gt;उ. - राहु और केतु सौर मंडल में दो ऐसे बिन्दु‌ओं के नाम हैं, जो 180 अंश पर आमने-सामने स्थित हैं । इसके अन्तर्गत अक्सर सातों ग्रह इकट्‍ठे हो जाते हैं, जिसमें बहुत सारे लोगों का जन्म होता है और इसी के साथ-साथ काफी अच्छी और प्रगतिशील कुण्डली वालों का भी जन्म होता है । इसी संयोग को कुछ लोग कालसर्प योग कह कर लोगों को भयभीत कर उन्हें भ्रमित करते हैं । कालसर्प योग को‌ई ऐसी चीज नहीं है, जिससे भयभीत हु‌आ जाय, इसका को‌ई भी प्रभाव नहीं होता है । कुण्डली हमेशा कारक और अकारक ग्रहों के संतुलन पर ही निर्भर करती है । जिससे यह तय होता है कि आप कितना सफल और सुखद जीवन व्यतीत करेंगे । कुण्डली में काल सर्प योग का को‌ई दुष्प्रभाव नहीं होता है ।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; "&gt;प्र. - प्रश्न कुण्डली क्या है और यह कितनी सार्थक है ?&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; "&gt;उ. - ज्योतिष में हर गणना समय पर निर्भर करती है । प्रश्न कुण्डली ज्योतिष में एक बड़ी ही सार्थक विधि है । जातक के द्वारा किये गये प्रश्न के समय के आधार पर कुण्डली बनाकर उसके ग्रहों का आंकलन किया जाता है जो काफी सार्थक होता है, और उसका कथन काफी हद तक सही होता है ।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; color: rgb(165, 42, 42); "&gt;प्र. - ग्रह - नक्षत्र हर पल अपना स्थान बदलते हैं फिर कुण्डली के ज़रिये भविष्य जानने की सार्थकता कितने प्रतिशत सही है, और जन्म समय का कितना महत्व है ?&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; "&gt;उ. - ग्रह नक्षत्र यदि चलायमान न रहें तो वक्‍त रूक जायेगा और सृष्टि भी अस्तित्वहीन हो जायेगी, इसलि‌ए ग्रह नक्षत्र का चलायमान होना एक प्राकृतिक व्यवस्था है, जो संसार व जीवन का अस्तित्व बनाये रखती है । जहाँ तक ज्योतिष में भविष्य कथन का सवाल है, जन्म के समय में ग्रह नक्षत्रों की स्थिति और आने वाले पूरे जीवन में ग्रह नक्षत्रों की स्थिति का आपस में सम्बन्ध होता है, जिसका जन्म के समय ही सारा आंकलन पता चल जाता है । जिस तरह से कैलेण्डर में आज से सौ साल बाद किस महीने की कौन सी तारीख को कौन सा दिन होगा यह सुनिश्चित है उसी प्रकार सौर मंडल के ग्रहों की चाल, गति बड़े ही सुव्यवस्थित ढंग से चलती है, जिसका सम्बन्ध जन्म के समय से ही निश्चित हो जाता है, बल्कि यूं कहें कि जबसे सृष्टि अस्तित्व में आ‌ई तब से हर दिन की रूपरेखा पूर्व निर्धारित व सुनिश्चित है । इसी प्रकार आदमी का जीवन भी सुनिश्चित होता है । इसलिये जन्मकुण्डली के बनाने के लिये जन्म समय, स्थान और दिनांक की आवश्यकता पड़ती है ।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; color: rgb(165, 42, 42); "&gt;प्र. - क्या वास्तव में ज्योतिष के माध्यम से जीवन से जुड़ी समस्या‌ओं का निवारण सम्भव है ? मसलन नौकरी न मिलना, बीमारी का ठीक न होना, दरिद्रता दूर करना, वगैरह - वगैरह ?&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; "&gt;उ. - ज्योतिष शास्त्र जीवन का आ‌ईना दिखाने के साथ - साथ जीवन का मार्गदर्शन भी करता है । व्यक्‍ति का जीवन किस दिशा में निर्धारित है और उसे को किस दिशा में प्रयास करना चाहि‌ए । जैसे कि ज्योतिष में पहले से निर्धारित है कि अमुक समस्या का समय अमुक तारीख से अमुक तारीख तक रहेगा, उसके लि‌ए व्यक्‍ति मानसिक तौर पर तैयार हो जाता है और उस समय धैर्य नहीं खोता है । अगर समस्या का समय पता न हो तो व्यक्‍ति धैर्य खो देता है । अतः समस्या का कारण पता होने से सकारात्मक दिशा में सुधार हेतु प्रयास भी काफी हद तक व्यक्‍ति को समस्या‌ओं से निजात दिलाने में सार्थक होते हैं । जहाँ तक नौकरी की बात है तो बच्चे के जन्म के समय से ही पता लग जाता है कि वह नौकरी करेगा या व्यवसाय तो उस दिशा में उसके स्वभाव के अनुरूप दिशा देना उसके कैरियर में काफी महत्वपूर्ण साबित होता है । ठीक उसी प्रकार से बीमारी की जहां तक बात है तो ज्योतिष द्वारा यह आंकलन होता है कि कौन सी बीमारी कब और शरीर के किस हिस्से में होगी उसके अनुरूप ज्योतिष द्वारा कौन से उपाय करने चाहि‌ए यह तय करना आसान हो जाता है । जैसे की अगर किसी को पाचन की समस्या हो रही है तो कुण्डली में यह पता चल जाता है कि उसे यह समस्या मंदाग्नि या जठराग्नि के कारण है । मंदाग्नि, जठराग्नि पित्तज प्रवृति के ग्रहों की प्रबलता या निर्बलता पर निर्भर करते हैं । ऐसी स्थिति में उन ग्रहों को सन्तुलित करने का उपाय स्वास्थ्य के लि‌ए कारगर साबित हो सकता है ।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; color: rgb(165, 42, 42); "&gt;प्र. - क‌ई बार लोग जीवन में सफलता आदि पाने के लिये अपने नाम के अक्षरों में फेर बदल करवाते हैं या फिर नाम ही बदल लेते हैं तो यह क्या ज्योतिष विद्या के ज़रिये सचमुच यह सम्भव है या महज़ भ्रम है ?&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; "&gt;उ. - जैसा कि मैंने पहले भी बताया कि धनात्मक, ऋणात्मक व तटस्थ ऊर्जा‌ओं के संयोजन से सृष्टि संचालित है ठीक उसी तरह से हमारे यहाँ वर्णमाला के अक्षर स्वर और व्यंजन के संयोग से शब्द का निर्माण होता है स्वर धनात्मक ऊर्जा का प्रतीक है और व्यंजन ऋणात्मक ऊर्जा का प्रतीक है । जिस आदमी के शरीर का आधार पित्तज ग्रहों से या आग्नेय प्रवृति के प्रधान ग्रहों द्वारा उसका लग्न निर्धारित हो उसके लि‌ए स्वर अक्षर से नाम ज्यादा लाभकारी होते हैं । जिसमे लग्न कफज या क्षारीय ग्रहों पर आधारित हों उसके लि‌ए व्यंजन अक्षर से नाम लाभकारी होता है इसके साथ-साथ ज्योतिष का ही एक अंग अंक ज्योतिष के अनुसार उन अक्षरों के अंकों से जोड़कर जातक के मूलांक से मिलान कराया जाता है तब वह नाम लाभकारी होता है और प्रसिद्धि दिलाता है, लेकिन नाम बदल देने से ही सब कुछ नहीं होता है आदमी की प्रसिद्धि और प्रगति उसकी कुण्डली पर भी निर्भर करती है ।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-left: 40px; line-height: 20px; "&gt;इसमें कहीं को‌ई दो राय नहीं कि मनुष्य का भाग्य और पुरूषार्थ दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। परन्तु यह भी सच है कि भाग्य से मनुष्य जो पाता है उसे कायम रखने के लि‌ए उसे प्रयास करने होते हैं लेकिन जो भाग्य में नहीं है उसे कर्मयोगी व्यक्‍ति पुरूषार्थ से हासिल कर लेते हैं। जीवन के अनेक पहलु‌ओं को प्रभावित करने वाला ज्योतिष शास्त्र हमारी समस्या‌ओं के हल तो अवश्य देता है परन्तु ज्योतिष विद्या भी कर्म पर बल देती है । इसलि‌ए यदि हम स्वयं पर भरोसा रखेंगे तो भ्रम और भ्रान्तियों के मकड़जाल में भी कम फसेंगे ।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-5233381751673782403?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/5233381751673782403/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/06/blog-post_06.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/5233381751673782403'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/5233381751673782403'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/06/blog-post_06.html' title='ज्योतिष और उससे जुड़े भ्रम'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-4228797151736601256</id><published>2011-06-02T04:52:00.001-07:00</published><updated>2011-06-02T04:52:57.774-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='संवाद दर्पण'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='आपका कृष्णगोपाल मिश्र संपादकीय'/><title type='text'>संपादकीय</title><content type='html'>&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: 14px; line-height: 20px; -webkit-border-horizontal-spacing: 2px; -webkit-border-vertical-spacing: 2px; "&gt;प्रिय सम्मानित पाठकगण,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आप सबके निरन्तर बढ़ते सहयोग व प्यार के लिए दिल से आभार व्यक्‍त करता हूँ । हमारा आगामी जून -२०११ का चौथा अंक ‘मनरेगा में हो रहे राष्ट्रीय अनियमितता एवं भ्रष्टाचार पर केन्द्रित है ।’ हमने यह दिखाने की पूर्णतया कोशिश की है, कि किस तरह से मनोवांछित ढंग से घर बैठे रोजगार द्वारा धन ग्रहण करने की योजना चल रही है । साथ ही साथ उपयुक्‍त एवं सुयोग्य व्यक्‍तियों तक इसका धन ना पहुंचाने के बजाय उच्चस्तरीय अधिकारियों व दबंगों द्वारा इसके धन का दुरूपयोग किया जाना । इस पर सरकार एवं जनता मूक दर्शक बनकर इस विवशता का हिस्सा बनती जा रही है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुछ जगह पर किसी ने आवाज़ उठायी तो या उसकी हत्या हो गई, या फिर उसकी आवाज़ को बंद कर दिया गया । इन बिंदुओं को आपके समक्ष रखने का छोटा-सा प्रयास है । आशा है कि हमारा यह प्रयास आपके दिलों तक पहुँचेगा और इस कुव्यवस्था के खिलाफ एक मजबूत आवाज़ बनकर इसका विरोध करेंगे । साथ ही नियमित स्तम्भों में अंतर्राष्ट्रीय में ओसामा व अमेरिका पर केन्द्रित किया गया है, तथा यह बताने की कोशिश की गई है, कि अभी भी आतंकी खतरे किस तरीके से इस देश व दुनिया को अपने भय के गिरफ़्त में लिए हुए हैं । साथ ही अमेरिका का जो विश्‍व जगत में स्वछन्द रवैया है, उसका आगामी दुनिया पर क्या असर होने वाला है । इस घटना में पाकिस्तान का वास्तविक चेहरा जिस तरह सामने है, उसमें पाकिस्तान व अमेरिका के रिश्तों पर भी चर्चा की गई है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राष्ट्रीय मुद्दे पर जनवृद्धि पर सरकार की असफलता एवं उत्तरांचल के मुख्यमंत्री के साक्षात्कार को शामिल किया गया है । साथ ही साथ उत्तरप्रदेश में भूमि अधिग्रहण मामले में सरकार का नाटकीय रवैया एवं उसमें राजनीति को भी सम्मिलित किया गया है । साहित्य में अच्छी कहानियां, कविताएं एवं ज्योतिष में इस बार और भी रूचिकर विषयों को शामिल किया गया है । जिसमें रंगों का जीवन में महत्व पर विशेष जानकारी दी गई है । आशा है, यह सारी विषय-वस्तु आपको काफी पसन्द आएगी, साथ ही हमें आपकी प्रतिक्रिया का भी इंतजार रहेगा । आपसे अनुरोध है, कि आप निरंतर अपना प्यार बनाए रखें, तथा अपने जानने वाले लोगों को भी इस पत्रिका से जोड़ने का बहुमूल्य सहयोग व सुझाव प्रदान करें ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;धन्यवाद&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: 14px; line-height: 20px; -webkit-border-horizontal-spacing: 2px; -webkit-border-vertical-spacing: 2px; "&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-4228797151736601256?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/4228797151736601256/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/06/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/4228797151736601256'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/4228797151736601256'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/06/blog-post.html' title='संपादकीय'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-471053112655476623</id><published>2011-05-30T01:14:00.000-07:00</published><updated>2011-05-30T01:14:01.879-07:00</updated><title type='text'>ग्रेटर नो‌एडा में सुरक्षा बढ़ा‌ई ग‌ई, निषेधाज्ञा लागू</title><content type='html'>&lt;a href="http://www.samaydarpan.com/May2011/rastriya1.aspx"&gt;ग्रेटर नो‌एडा में सुरक्षा बढ़ा‌ई ग‌ई, निषेधाज्ञा लागू&lt;/a&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-471053112655476623?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://www.samaydarpan.com/May2011/rastriya1.aspx' title='ग्रेटर नो‌एडा में सुरक्षा बढ़ा‌ई ग‌ई, निषेधाज्ञा लागू'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/471053112655476623/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/blog-post_30.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/471053112655476623'/><link rel='self' type='application/atom+xml' 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href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/3031167038321502266/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/web-toolbar-by-wibiya.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/3031167038321502266'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/3031167038321502266'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/web-toolbar-by-wibiya.html' title=''/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-4823680036554314551</id><published>2011-05-28T05:33:00.000-07:00</published><updated>2011-05-28T05:34:32.631-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='- कमल उपाध्याय'/><title type='text'>शहद आपका खूबसूरत साथी</title><content type='html'>शहद की चिकित्सीय महिमा दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है । अधिक से अधिक अनुसंधानकर्त्ता अब इस प्रयास की तरफ बढ़ रहे हैं कि शहद पर जीवनशैली के रोगों का वास्तविक उपचारक के रूप में विश्‍वास किया जा सकता है । और यह उपचार प्राकृतिक है । शहद में भरपूर ऊर्जा :- सुबह गरम पानी के गिलास में आर्गेनिक शहद व आर्गेनिक साइडर सिरके का मिश्रण मिलाकर लेने से भरपूर ऊर्जा मिलती है । शहद के नियमित सेवन से गठिए का रोग भी दूर हो जाता है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कैंसर कोलेस्ट्रॉल व दिल की बीमारियां :- ब्रैड पर शहद व दालचीनी के पाउडर को मिलाकर जैम की जगह प्रयोग करके नियमित रूप से खाने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है । और इससे दिल के दौरों को रोका जा सकता है । पेट व हड्डियों के बढ़े हुए कैंसर को शहद के एक बड़े चम्मच व एक छोटे चम्मच दालचीनी का पाउडर मिलाकर 3 महीने तक दिन में तीन बार लेने से कम किया जा सकता है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;शहद और त्वचा :- शहद में वे गुण होते हैं, जो त्वचा के उपचार व पुनर्योवन में सहायता कर सकते हैं । शहद के प्राकृतिक गुणों के कारण कई सौंदर्य प्रसाधन ब्रांडों ने इसे स्किन क्रीमों, स्किन लोशनों आदि में शामिल किया है । शहद में मौजूद कार्बोहाइड्रेट की प्रचुर स्थिति किसी भी व्यक्‍ति को ऊर्जा का तुरंत स्त्रोत उपलब्ध कराता है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;शहद के अलावा अन्य अधिकांश मिठास वाले पदार्थों के विपरीत शहद में विटामिनों, खनिजों, एमिनो अम्लों व एंटी आक्सीडेंटों की व्यापक श्रेणियों की कम मात्राएं होती हैं, जो प्रत्येक मानव शरीर के लिए आवश्यक है । आधुनिक विज्ञान अब शहद को एंटीमाइक्रोबॉयल एजेंट के रूप में मान्यता देता है ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-4823680036554314551?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/4823680036554314551/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/blog-post_28.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/4823680036554314551'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/4823680036554314551'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/blog-post_28.html' title='शहद आपका खूबसूरत साथी'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-5033953490473151067</id><published>2011-05-26T05:38:00.000-07:00</published><updated>2011-05-26T05:41:58.175-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='- अजय कुमार पाण्डेय'/><title type='text'>एडवरटाइजिंग में है अवसर</title><content type='html'>कोई भी कंपनी चाहे कितना भी अच्छा उत्पाद बना ले उसे प्रचार-प्रसार की जरूरत पड़ती ही है । इस प्रचार-प्रसार की प्रक्रिया में उसकी सही तरीके से मार्केटिंग की जाती है, जिससे वो उत्पाद बाजार में अच्छी तरह से स्थापित हो जाए और उपभोक्‍ताओं तक अपनी पहुँच बना ले । इसी काम को करने के लिए एडवरटाइजिंग या विज्ञापन एजेंसी बनाई जा रही है । आज व्यवसाय में प्रतियोगिता बढ़ रही है । जितनी भी उत्पादक कंपनी हैं, वो अपने उत्पादों को जन-जन तक पहुँचाना चाहती हैं और इसमें विज्ञापन एजेंसी उनकी सहायता कर रही है । विज्ञापन या एडवरटाइजिंग का बाजार बड़ी तेजी से बढ़ रहा है लिहाजा रोजगार के लिए भी यह एक बेहतर विकल्प साबित हो रहा है । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कोर्स और योग्यता :- &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एडवरटाइजिंग एक ऐसा क्षेत्र है जिसकी पढ़ाई में काफी विविधता है । यह क्षेत्र लोगों की क्रिएटिव प्रकृति पर निर्भर करता है, क्योंकि इसमें विशेषज्ञ और कोर्स करने के अलग-अलग प्रभाग हैं । यह प्रभाग अमूमन कापीराइटर्स, स्क्रिप्टराइटर्स, फोटोग्राफर, डिजायनर्स आदि में बँटे होते हैं । अब इन्हीं क्षेत्रों में डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और स्नातक स्तर की पढ़ाई होती है । इस क्षेत्र में अलग-अलग विषय के लोग आते हैं इसलिए इसमें कोर्स और योग्यता के मानक भी अलग-अलग ही होते हैं । मसलन एडवरटाइजिंग एजेंसी में कला प्रभाग होता है जिसके लिए फाइन आर्ट्‌स में स्नातक (B.F.A) डिग्री होना अनिवार्य है । कॉपीराइटर्स के लिए डिप्लोमा इन क्रिएटिव राइटिंग होना चाहिए । इसके अलावा मार्केटिंग के लिए प्रबंधन डिग्री की भी आवश्यकता होती है । इन सबसे अलग मीडिया प्लान २ ग्राफिक्स पब्लिक रिलेशन से जुड़े कोर्स भी इस क्षेत्र के लिए उपयोगी है । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;रोजगार के क्षेत्र :- &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भारतीय बाजार, अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में बदल चुका है, क्योंकि यहाँ बहुराष्ट्रीय कंपनियां तेजी से निवेश कर रही हैं । इस वजह से एडवरटाइजिंग प्रोफेशनल्स के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर है । इस क्षेत्र में आम लोगों की योग्यता, एजेंसी का कार्य-क्षेत्र और कारोबार पर निर्भर करता है । वैसे यहाँ कोई भी फ्रेशर १० हजार से १५ हजार से शुरूआत कर सकता है और ये वेतन कार्य और अनुभव के आधार पर बढ़ता भी है । कारोबार भी खड़ा किया जा सकता है या फिर स्वतंत्र रूप से काम किया जा सकता है । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रशिक्षण संस्थान :- &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;1. नेशनल स्कूल ऑफ एडवरटाइजिंग, नई दिल्ली&lt;br /&gt;2. इंडियन इंस्टीट्‌यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, नई दिल्ली&lt;br /&gt;3. जोवियर इंस्टीट्‌यूट ऑफ कम्युनिकेशन, मुम्बई ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;क्या है एडवरटाइजिंग :- &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;किसी भी उत्पाद के बारे में उपभोक्‍ता के मन में उसके प्रति अच्छी छवि बनाने की प्रक्रिया ही एडवरटाइजिंग कहलाती है । उत्पादक वर्गों में बढ़ती प्रतिस्पर्द्धा के कारण यह प्रक्रिया उत्पादक कंपनियों के लिए आवश्यक हो जाती है । एडवरटाइजिंग एजेंसी भी यही काम करती है जिससे उत्पाद के लिए निश्‍चित ग्राहक तैयार हो सकें । आजकल हर कंपनी में एक एडवरटाइजिंग प्रभाग होता है जो उसके उत्पादों को उपभोक्‍ताओं तक पहुँच आसान करती है &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसके अलावा स्वतंत्र रूप से एडवरटाइजिंग एजेंसी बनाई जाती है जो विभिन्‍न कंपनियों के लिए काम करती है ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-5033953490473151067?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/5033953490473151067/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/blog-post_26.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/5033953490473151067'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/5033953490473151067'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/blog-post_26.html' title='एडवरटाइजिंग में है अवसर'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-1124775128641469020</id><published>2011-05-20T04:35:00.000-07:00</published><updated>2011-05-20T04:37:36.075-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='- श्रीमती भुवनेश्‍वरी मालोत साभार - जतन से ओढ़ी चदरिया'/><title type='text'>बुजुर्ग घर की रौनक है</title><content type='html'>बुजुर्ग शब्द दिमाग में आते ही उम्र व विचारों से परिपक्व व्यक्‍ति की छवि सामने आती है । बुजुर्ग अनुभवों का वह खजाना है जो हमें जीवन पथ के कठिन मोड़ पर उचित दिशा निर्देश करते हैं । परिवार के बुजुर्ग लोगों में नाना-नानी, दादा-दादी, माँ-बाप, सास-ससुर आदि आते हैं । बुजुर्ग घर का मुखिया होता है इस कारण वह बच्चों, बहुओं, बेटे-बेटी को कोई गलत कार्य या बात करते हुए देखते हैं तो उन्हें सहन नहीं कर पाते हैं और उनके कार्यों में हस्तक्षेप करते हैं जिसे वे पसंद नहीं करते हैं । वे या तो उनकी बातों को अनदेखा कर देते हैं या उलटकर जवाब देते हैं । जिस बुजुर्ग ने अपनी परिवार रूपी बगिया के पौधों को अपने खून पसीने रूपी खाद से सींच कर पल्लवित किया है, उनके इस व्यवहार से उनके आत्म-सम्मान को ठेस पहुँचती है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक समय था जब बुजुर्ग को परिवार पर बोझ नहीं बल्कि मार्ग-दर्शक समझा जाता था । आधुनिक जीवन शैली, पीढ़ियों में अन्तर, आर्थिक-पहलू, विचारों में भिन्‍नता आदि के कारण आजकल की युवा पीढ़ी निष्ठुर और कर्तव्यहीन हो गई है । जिसका खामियाजा बुजुर्गों को भुगतना पड़ता है । बुजुर्गों का जीवन अनुभवों से भरा पड़ा है, उन्होंने अपने जीवन में कई धूप-छाँव देखे हैं जितना उनके अनुभवों का लाभ मिल सके लेना चाहिए । गृह-कार्य संचालन में मितव्ययिता रखना, खान-पान संबंधित वस्तुओं का भंडारण, उन्हें अपव्यय से रोकना आदि के संबंध में उनके अनुभवों को जीवन में अपनाना चाहिए जिससे वे खुश होते हैं और अपना सम्मान समझते हैं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बुजुर्ग के घर में रहने से नौकरी पेशा माता-पिता अपने बच्चों की देखभाल व सुरक्षा के प्रति निश्‍चिंत रहते हैं । उनके बच्चों में बुजुर्ग के सानिध्य में रहने से अच्छे संस्कार पल्लवित होते हैं । बुजुर्गों को भी उनकी निजी जिंदगी में ज्यादा हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए । उनके रहन-सहन, खान-पान, घूमने-फिरने आदि पर रोक-टोक नहीं होनी चाहिए । तभी वे शांतिपूर्ण व सम्मानपूर्ण जीवन जी सकते हैं । बुजुर्गों में चिड़चिड़ाहट उनकी उम्र का तकाजा है । वे गलत बात बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं, इसलिए परिवार के सदस्यों को उनकी भावनाओं व आवश्यकता को समझकर ठंडे दिमाग से उनकी बात सुननी चाहिए । कोई बात नहीं माननी हो तो, मौका देखकर उन्हें इस बात के लिए मना लेना चाहिए कि यह बात उचित नहीं है । सदस्यों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कोई ऐसी बात न करें जो उन्हें बुरी लगे ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार करने से घर में अशांति बनी रहती है । इस जीवन संध्या में उन्हें आदर व अपनेपन की जरूरत है । इनकी छत्रछाया से हमारी सभ्यता व संस्कृति जीवित रह सकती है । बच्चों को अच्छे संस्कार व स्नेह मिलता है । बालगंगाधर तिलक ने एक बार कहा था कि ‘तुम्हें कब क्या करना है यह बताना बुद्धि का काम है, पर कैसे करना है यह अनुभव ही बता सकता है ।’ अंत में-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;‘फल न देगा न सही,&lt;br /&gt;छाँव तो देगा तुमको&lt;br /&gt;पेड़ बूढ़ा ही सही&lt;br /&gt;आंगन में लगा रहने दो ।’&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-1124775128641469020?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/1124775128641469020/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/blog-post_20.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/1124775128641469020'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/1124775128641469020'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/blog-post_20.html' title='बुजुर्ग घर की रौनक है'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-7788833052488922050</id><published>2011-05-14T04:06:00.000-07:00</published><updated>2011-05-14T04:10:12.102-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='- अडनी ब्यूरो'/><title type='text'>उदारवादी नेताओं पर सेना का दबदबा</title><content type='html'>पाकिस्तान में अल कायदा, तालिबान और अन्य आतंकवादी संगठनों को सहायता पहुंचाने वाले दो उच्च सैनिक अधिकारियों के सेवाकाल में विस्तार से यह एक बार फिर स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान अपना इतिहास बदलना नहीं चाहता। दूसरे शब्दों में वह अपनी पुरानी विदेश नीति को ही बरकरार रखना चाहता है। सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज़ कियानी और बदनाम आ‌ई‌एस‌आ‌ई महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शूजा पाशा दोनों ही जाने पहचाने चेहरे हैं और उनके सेवाकाल का विस्तार इस बात का सबूत है कि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक सरकार तो है मगर उस पर दबदबा सेना और उसकी खूफिया एजेंसी आ‌ई‌एस‌आ‌ई का ही है। यह ठीक है कि आसिफ अली ज़रदारी के नेतृत्व वाली पीपीपी सरकार में उदारवादी लोग हैं लेकिन सेना और आ‌ई‌एस‌आ‌ई के सामने वह बेबस हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डॉन में खावर घूमन लिखते हैं कि प्रधानमंत्री युसूफ रज़ा गिलानी ने यह घोषणा कर कि आ‌ई‌एस‌आ‌ई महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शूजा पाशा के सेवाकाल में एक साल की और बढ़ोत्तरी कर दी ग‌ई है, अपनी सरकार की सच्चा‌ई बयान कर दी है। उल्लेखनीय है कि पाशा को दूसरी बार विस्तार मिला है। गत 18 मार्च को उनके पहले विस्तार की अवधि पूरी हो चुकी थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डॉन न्यूज और पाकिस्तान टेलीविजन के साथ बातचीत करते हु‌ए प्रश्नों के उत्तर में गिलानी ने कहा कि देश की सुरक्षा के मद्देनजर सरकार ने पाशा का कार्यकाल और एक साल के लि‌ए बढ़ाने का फैसला किया है। पाशा को नया विस्तार देने के बाद यह पहला सरकारी वक्‍तव्य था जो गिलानी ने स्वयं दिया। कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि सेना की ओर से दो वर्ष के विस्तार की मांग की ग‌ई थी ताकि 2013 तक सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज़ कियानी के साथ पाशा भी आ‌ई‌एस‌आ‌ई महानिदेशक बने रहे। उल्लेखनीय है कि कियानी को तीन वर्ष का विस्तार पिछले वर्ष ही मिल चुका है। डॉन में जाहिद हुसैन लिखते हैं कि सैनिक सूत्रों के अनुसार पाशा और कियानी में बेहतर तालमेल और उनके विचारों में समानता के कारण पाशा का सेवाकाल बढ़ाया गया है। लेकिन विस्तार का कारण अमरीका के साथ सहयोग बढ़ाना भी हो सकता है क्योंकि कुछ विशेषज्ञों के अनुसार अफ़गानिस्तान में युद्ध गम्भीर स्थिति धारण कर चुका है और अमरीका के पास इसके अलावा को‌ई रास्ता नहीं है कि वह आ‌ई‌एस‌आ‌ई को साथ लेकर चले। यह भी खबर है कि अमरीका को जनरल पाशा के विस्तार के बारे में पहले ही बता दिया गया था। वास्तव में सी‌आ‌ई‌ए कंटेक्टर रेमंड डेविस की गिरफ्तारी पर आ‌ई‌एस‌आ‌ई और सी‌आ‌ई‌ए में जो मतभेद पैदा हु‌आ था उसे समाप्त करने के लि‌ए जनरल पाशा को पद पर बरकरार रखना जरूरी था। फ्रा‌इडे टा‌इम्स में नजम सेठी लिखते हैं कि सेना प्रमुख और आ‌ई‌एस‌आ‌ई महानिदेशक लेफ्टिनेंंट जनरल अहमद शूजा पाशा के लि‌ए आसिफ अली ज़रदारी का राष्ट्रपति होना संतोषजनक है क्योंकि जरदारी की सरकार में पहले कियानी को तीन वर्ष का विस्तार मिला जब कि पाशा एक एक वर्ष करके दो बार विस्तार प्राप्त करने में सफल रहे। लेख में कहा गया है कि अगर हम पीपीपी का इतिहास देखें तो यह संगठन सेना विरोधी नज़र आता है लेकिन अभी जो स्थिति है उसके मद्देनजर उसे सेवा समर्थक कहने में को‌ई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहि‌ए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लेख के अनुसार विपक्षी दल पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज़ के नेता चौधरी निसार खान ने आ‌ई‌एस‌आ‌ई महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल पाशा के सेवाकाल में विस्तार पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्‍त करते हु‌ए इसे लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ करार दिया है और कहा है कि आ‌ई‌एस‌आ‌ई को अपनी संविधानिक सीमा से बाहर नहीं जाना चाहि‌ए। लेख में कहा गया है कि यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पी‌एम‌एल‌एन सेना समर्थक संगठन था जबकि अब वह सेना विरोधी नजर आ रहा है। सच तो यह है कि पीपीपी और पी‌एम‌एल‌एन दोनों ही न तो सेना समर्थक हैं और न ही सेना विरोधी बल्कि अपनी सुरक्षा के लि‌ए उन्हें कभी सेना समर्थक और कभी सेना विरोधी बनना पड़ता है। - अडनी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आ‌ई‌एस‌आ‌ई-सी‌आ‌ई‌ए मतभेद बढ़े&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह सब जानते हैं कि उपमहाद्वीप ही नहीं बल्कि दुनिया भर में आज जिस आतंकवाद का बोलबाला है उसका जिम्मेदार पाकिस्तान है। अफ़ग़ानिस्तान में कम्यूनिस्ट सरकार और सोवियत सेना से लड़ने के लि‌ए जिन मुजाहिद्दीन को मैदान में उतारा गया था उन्हीं की न‌ई पीढ़ी आतंकवादी बन चुकी है। मजे की बात तो यह है कि उन मुजाहिद्दीन को अमरीका का भी भरपूर सहयोग प्राप्त था और यह उस सहयोग का ही परिणाम है कि आतंकवादी बन चुके मुजाहिद्दीन को अमरीका से लड़ने में भी कठिना‌इयों को सामना नहीं करना पड़ रहा है। अमरीका ने ११ सितम्बर की घटना के बाद मुजाहिद्दीन के विरुद्ध कार्रवा‌ई पाकिस्तान को साथ लेकर शुरू की मगर पाकिस्तान का हमेशा ही दोहरा रवैया रहा ऊपर से वह अमरीका का साथ देता रहा और अंदर से मुजाहिद्दीन को मदद भी पहुंचाता रहा। आज भी वही स्थिति है यानि पाकिस्तान मुजाहिद्दीन की सुरक्षा कर रहा है। अब अनुमान लगाया जा सकता है कि इस वर्ष जब अमरीकी नेतृत्व वाली गठबंधन सेना वापस होगी तब क्या होगा? क्या अमरीका उस दबाव को समाप्त करने में सफल हो पा‌एगा जो पाकिस्तान सरकार पर आ‌ई‌एस‌आ‌ई का है?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार आ‌ई‌एस‌आ‌ई महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल शूजा अहमद पाशा का हाल ही में हु‌आ वाशिंगटन दौरा आ‌ई‌एस‌आ‌ई और सी‌आ‌ई‌ए के बीच उन मतभेदों को समाप्त करने के लि‌ए हु‌आ था जो रेमंड डेविस मामले को लेकर दोनों देशों की गुप्तचर एजेंसियों के बीच उत्पन्न हु‌ए हैं। सूत्रों के अनुसार जनरल पाशा ने बातचीत के दौरान पाकिस्तान के कबा‌इली क्षेत्रों में हाल ही में हु‌ए ड्रोन हमलों का मामला भी उठाया जिनमें 40 व्यक्‍तियों की मृत्यु हु‌ई है। नेशन ने अपने सम्पादकीय में लिखा है कि अगर अमरीका पाकिस्तान में खूफिया नेटवर्क चलाता है तो यह किसी देश के आंतरिक मामले में खुला हस्तक्षेप है। सम्पादकीय में कहा गया है कि जब तक निर्दोष लोगों की हत्या जारी रहेगी तब तक यह नहीं समझा जा‌एगा कि अमरीकी कार्रवा‌ई देश के पक्ष में है। उल्लेखनीय है कि रेमंड डेविस घटना के बाद पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान संयुक्‍त गुप्तचर कार्रवा‌ई रूकी हु‌ई है। इस बीच सी‌आ‌ई‌ए की कार्रवा‌ई में 40 से अधिक कबा‌इलियों की मृत्यु हु‌ई है जिससे पाकिस्तानी गुप्तचर अधिकारियों के साथ आम लोगों में भी नाराजगी है। मीडिया में भी इन हमलों की आलोचना हु‌ई है। डेली टा‌इम्स ने अपने सम्पादकीय में लिखा है कि सी‌आ‌ई‌ए एजेंट रेमंड डेविस द्वारा लाहौर में दो व्यक्‍तियों की हत्या के बाद अमरीका और पाकिस्तान की संयुक्‍त गुप्तचर कार्रवा‌ई बंद है जबकि सी‌आ‌ई‌ए की कार्रवा‌ई में 40 व्यक्‍तियों की मृत्यु हु‌ई है। इस कार्रवा‌ई में पाकिस्तानी सेना शामिल नहीं थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह अमरीका की एकतरफा कार्रवा‌ई थी। लगभग दस वर्षों से जारी आतंकवाद के विरुद्ध लड़ा‌ई के दौरान यह पहला अवसर था जब पाकिस्तान अमरीका से अलग नजर आया अर्थात्‌ उसने आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवा‌ई में न केवल यह कि साथ नहीं दिया बल्कि यह स्पष्ट संकेत भी दे दिया कि वह इस कार्रवा‌ई से नाराज है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उल्लेखनीय है कि आतंकवाद के विरुद्ध लड़ा‌ई मुशर्रफ़ की सरकार में शुरू हु‌ई थी। 11 सितम्बर 2001 को अमरीका पर हमले के बाद अलक़ायदा नेता ओसामा बिन लादेन की तलाश में अमरीका ने पाकिस्तान को साथ लेकर अफ़़ग़ानिस्तान पर हमला बोलकर तालिबान सरकार को इसलि‌ए समाप्त कर दिया कि उसने ओसामा बिन लादेन को मेहमान बना रखा था। इस हमले के बारे में मुशर्रफ़ यह कह रहे हैं कि अमरीका ने धमकी देकर उनसे सहायता ली थी। मुशर्रफ़ के अनुसार तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश ने मदद न करने की स्थिति में पाकिस्तान की ईंट से ईंट बजा देने की बात कही थी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-7788833052488922050?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/7788833052488922050/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/blog-post_14.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/7788833052488922050'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/7788833052488922050'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/blog-post_14.html' title='उदारवादी नेताओं पर सेना का दबदबा'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-3655678171538531596</id><published>2011-05-12T04:37:00.000-07:00</published><updated>2011-05-13T13:52:59.901-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='6- डॉ. भरत मिश्र प्राची'/><title type='text'>देश में बढ़ता आरक्षण का संक्रामक रोग</title><content type='html'>देश में दिन पर दिन आरक्षण का मुद्‌दा ज्वलंत होता जा रहा है । आज यह संक्रामक रोग का स्वरूप धारण कर चुका है । स्वतंत्रता उपरान्त सामाजिक, आर्थिक रूप से पिछड़ी कुछ जातियों के रहन-सहन के स्तर में सुधार हेतु संविधान में पिछड़ी जाति (एस. सी) पिछड़ी जनजाति ( एस. टी) के नाम से आरक्षण की सुविधा प्रदान की गई । धीरे-धीरे यह व्यवस्था राजनीतिक परिवेश के कारण मुद्‌दा विकृति का स्वरूप धारण करती चली गई, जहां इसका मूल उद्देश्य प्रायः गौण ही हो गया । सामाजिक एवं आर्थिक रूप से इन जातियों में सुधार के बावजूद भी इनका आरक्षण ज्यों का त्यों ही नहीं रहा बल्कि मंडल आयोग के तहत पिछड़े वर्ग के नाम से देश की कुछ और जातियां आरक्षण प्रक्रिया के तहत शामिल कर ली गई । जिनका उद्देश्य मात्र राजनीतिक लाभ लेना था । इस उद्देश्य में सक्रिय राजनीतिक दलों को पूर्णतः लाभ भी मिला । जहांं केन्द्र की सत्ता तक बदल गई । यह प्रक्रिया यही बंद नहीं हुई, समय अंतराल में लोकसभा चुनाव के समय राजनीतिक लाभ के तहत राजस्थान में एक और विशेष जाति जाट वर्ग को पिछड़े वर्ग में आरक्षण के तहत शामिल किये जाने की औपचारिक घोषणा भी की गई ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जिसका राजनीतिक लाभ संबंधित दल को मिला तथा केन्द्र में सत्ता परिवर्तन के साथ घोषणा के अनुरूप इस जाति को पिछड़े वर्ग में शामिल कर लिया गया । इसके प्रभाव तत्काल नजर आने लगे जहां पिछड़े वर्ग में पूर्व से शामिल जातियां इस नये समीकरण में पिछड़ती चली गई । इस वर्ग में असंतोष तो उभरा ही जिसका प्रभाव आज तक समय पर उभरते गुर्जर आंदोलन के बीच देखा जा सकता है । यह असंतोष अभी मिटा नहीं कि आरक्षण को लेकर राजस्थान के पड़ोसी राज्य हरियाणा में जाट सड़क पर उतर आये । यह आंदोलन उ.प्र. तक फैल चुका है और बढ़ता ही जा रहा है जिसके कुत्सित परिणाम आस-पास देखने को मिल रहे हैं । आज रेल सेवाएं जिस तरह बाधित हो रही हैं, सभी भलीभाँति परिचित है । होली का पवित्र त्यौहार आज इस आंदोलन के चलते कहीं-कहीं बेरंग होता दिखाई दे रहा है । इस तरह के आंदोलन आज जो संक्रामक रोग का स्वरूप धारण कर चुका है, कहां अंत होगा जिसे स्वहित में राजनीति सहयोग मिल रहा हो, कह पाना मुश्किल है । आज यह समस्या निदान के बजाय समस्या पैदा करने वाला संसाधन हो चुका हैं । जहां स्वार्थ की बलिवेदी पर अनगिनत निर्दोषों की बलि हर आंदोलन में दी जा रही है, फिर भी यह काम जारी है । इस दिशा में मंडल आयोग लागू होने एवं राजस्थान में पिछड़े वर्ग में जाट समुदाय को शामिल किये जाने के उपरान्त उभरे असंतोष भरे जन आंदोलन के प्रतिकूल प्रभाव आसानी से देखे जा सकते हैं, जिसमें आमजन एवं सम्पत्ति दोनों को काफी नुकसान हुआ ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आरक्षण का स्वरूप स्वतंत्रता उपरान्त कुछ काल के लिये देश में पिछड़ेपन एवं गरीबी को दूर करने के उद्देश्य से वास्तविकता में गरीब एवं पिछड़ी जातियों से शुरू किया गया । जिसे उद्देश्य पूरा होने की स्थिति में समाप्त कर देना चाहिए । पर ऐसा राजनीतिक कारणों से आज तक नहीं हो पाया । देश की सम्पन्‍न कई जातियां राजनीतिक प्रभाव एवं दबाव से इस क्रम में जुड़ती ही चली गईं, जो बची हैं वह भी इस दिशा में प्रयत्‍नशील हैं । आरक्षण आज गरीबी एवं पिछड़ेपन का सवाल है, आज प्रायः सभी जातियां इससे प्रभावित हैं । इस तरह के हालात में आरक्षण की सुविधा सभी जातियों को जनसंख्या के आधार पर प्रदान कर देनी चाहिए ताकि जड़ से इस संक्रामक रोग को मिटाया जा सके ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-3655678171538531596?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/3655678171538531596/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/blog-post_9689.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/3655678171538531596'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/3655678171538531596'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/blog-post_9689.html' title='देश में बढ़ता आरक्षण का संक्रामक रोग'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-4105368180207069045</id><published>2011-05-12T04:23:00.000-07:00</published><updated>2011-05-13T13:53:00.179-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='- हनीफा'/><title type='text'>उन्माद की हद तक क्रिकेट प्रेम</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/-YxW6UOGL9xI/TcvEf5Cp0WI/AAAAAAAAAYc/UMbiaGW9qEA/s1600/WC_520022f.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 226px;" src="http://2.bp.blogspot.com/-YxW6UOGL9xI/TcvEf5Cp0WI/AAAAAAAAAYc/UMbiaGW9qEA/s320/WC_520022f.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5605790213359653218" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;पूरा देश क्रिकेट का दीवाना है । ऐसा लगता है कि क्रिकेट ही सब कुछ है । देश यहीं से शुरू होता है, और यहीं खत्म हो जाता है । क्रिकेट की हार देश की सबसे बड़ी समस्या है । क्रिकेट की जीत सभी समस्याओं का समाधान है । न इसके आगे भारत है और न इसके पीछे भारत है । राजनीति और कूटनीति तक इसकी मोहताज है । देश की सब समस्याएं और सब समाधान क्रिकेट है । जो क्रिकेट प्रेमी नहीं वह देशभक्‍त भी नहीं । जो चौके और छक्‍के पर तालियां नहीं बजाता उसकी राष्ट्रभक्‍ति ही संदेह के घेरे में आ जाती है । जब सब कुछ क्रिकेट है तब इसमें अपार पैसा होना कोई आश्‍चर्य की बात नहीं होनी चाहिए ।&lt;br /&gt;देश की बहुत बड़ी आबादी को लगता है कि मुल्क में समस्याओं का अंबार है, लेकिन उनका ऐसा सोचना-मानना उस समय निरर्थक हो जाता है जब क्रिकेट के दौरान देश में कर्फ्यू जैसे हालात हो जाते हैं । सड़कें सूनी हो जाती हैं । बसों को सवारियां नहीं मिलती हैं । लोग टीवी पर चिपककर बैठ जाते हैं । क्रिकेट के लिए बेवजह छुट्‍टी ले लेते हैं । जिसको क्रिकेट का टिकट मिल गया उसकी किस्मत खुल गई । किस्मत क्या खुली वह भव सागर से तर गया । उसके इहलोक और परलोक दोनों सुधर गए । जिन्हें नहीं मिली वे बदनसीब माने गए ।&lt;br /&gt;भारत-पाक मैच के दौरान एक मुख्यमंत्री ने तो यहां तक कह दिया कि मुझसे राज्य सभा की टिकट ले लो, विधानसभा की टिकट लेलो, लोकसभा की मांगो तो वह भी दिलवा दूं लेकिन क्रिकेट की टिकट के लिए मांफी मांगता हूं । बताइए, अब क्या रह जाता है?&lt;br /&gt;लोग यह समझते हैं कि देश में गरीबी है, बेरोजगारी है, भ्रष्टाचार है, भुखमरी है, लाचारी है, गरीबी है, बीमारी है, अशिक्षा है, चोरी है, डकैती है, लूटमार है, बलात्कार है, बेबसी है, मजबूरी में देह बेचती बच्चियां हैं, युवती हैं, महिलाएं हैं, सड़कों की कमी है, इलाज के लिए पैसा नहीं है, भीख मांगते बच्चे हैं, करोड़ों की तादाद में अदालतों में केस है और इन सबसे बड़ी समस्या साम्प्रदायिकता है । लेकिन यह सब समस्याएं क्रिकेट के सामने गौण है ।&lt;br /&gt;जिस दिन भारत-पाकिस्तान के बीच मोहाली में मैच था उस दिन देश के लोगों की क्या हालत थी वर्णन करना मुश्किल है । युद्ध से भी आगे के हालत थे । ऐसी स्थिति तो तब भी नहीं थी जब १९६४ में चीन से, १९७१ में पाकिस्तान से और फिर १९९५ में कारगिल युद्ध हुआ था । उत्तेजना, कौतूहल, जुनून और उन्माद सब कुछ था । &lt;br /&gt;क्या यह सब बनाया गया माहौल था? लोगों में उत्तेजना, उन्माद और जुनून पैदा किया गया था । इसे आप बाजार का खेल भी कह सकते हैं । इसे आप दिखावटी देश भक्‍ति भी कह सकते हैं । इसे आप देखादेखी देश प्रेम दिखाने की होड़ भी कह सकते हैं । इसे आप पाकिस्तान से बदला लेना भी कह सकते हैं । जो आपका दिल कहे उसे मान सकते हैं । देश की जीत पर खुश होना हर देशवासी का अधिकार है और खुश होना भी स्वभाविक है । लेकिन खुशी के नाम पर करोड़ों रूपए के पटाखे फूंक देना क्या मार्केट बनाया हुआ खेल था । तब ज्यादा अच्छा लगता जब इस रूपयों से देश के लोगों की बेबसी कुछ कम करने की कोशिश की जाती । खुशी के पटाखों से उन गरीबों का क्या लेना देना जो उस रात भूखे सोए ।&lt;br /&gt;क्रिकेट में बहुत पैसा है । लेकिन किस के लिए? जीते खिलाड़ियों को करोड़ों रूपए दिए जाते हैं । अच्छी बात है । कहा जाता है कि खिलाड़ी देश के लिए खेलते हैं । देश के लिए कैसे? जो रूपया करोड़ों में मिलता है वह उनके पास रहता है । क्या वह देश के लिए दे देते हैं? नहीं तो फिर खेलना अपने लिए हुआ न । सरकारी नौकरी, करोड़ों रूपया यह सब खिलाड़ियों के लिए । हम खिलाड़ियों को पैसा देने के विरोध में नहीं लेकिन अन्य प्रतिभाएं उपेक्षित न रहें यह कौन देखेगा? देश में और तरह की प्रतिभाएं हैं जिन्हें सम्मान के साथ रोटी भी नहीं मिल पाती है । सरकार और देश की जनता को इसी में क्या दिखाई देता है जो अन्य प्रतिभाओं में दिखाई नहीं पड़ता । &lt;br /&gt;संगीतकार नौशाद ने दुनिया की सबसे मीठी धुनें बनाईं ।  ऐसी धुनें जो सदियों तक याद रखी जाएं । क्या उन्होंने ये धुनें और इतना मीठा संगीत देश के लिए नहीं दिया था? लेकिन उनके आखिरी दिन इतने खराब गुजरे कि इलाज तक को पैसे नहीं थे । अभिनेता राजेन्द्रकुमार ने उन्हें आर्थिक सहायता तब इलाज हुआ । नौशाद साहब को किस सरकार ने मदद की? प्रख्यात शहनाई वादक बिस्मिल्ला खान किस हालत में मरे, यह बताने की जरूरत है? क्या उन्होंने शहनाई देश के लिए नहीं बजाई थी ।&lt;br /&gt;जिस देश में घनघोर गरीबी हो वहां एक आदमी को करोड़ों मुफ्त दे दिए जाएं और दूसरी ओर उसी देश में ऐसे लोग हैं जिन्हें भरपेट रोटी नहीं मिलती है ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-4105368180207069045?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/4105368180207069045/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/blog-post_12.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/4105368180207069045'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/4105368180207069045'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/blog-post_12.html' title='उन्माद की हद तक क्रिकेट प्रेम'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-YxW6UOGL9xI/TcvEf5Cp0WI/AAAAAAAAAYc/UMbiaGW9qEA/s72-c/WC_520022f.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-7925779222890015734</id><published>2011-05-09T00:11:00.000-07:00</published><updated>2011-05-09T00:40:42.069-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='डॉ अ कीर्तिवर्धन'/><title type='text'>आँख का पानी</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/-uIFABZNlF20/TceaabZtYUI/AAAAAAAAAYU/kjYjZxAGDCw/s1600/images.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 225px; height: 225px;" src="http://4.bp.blogspot.com/-uIFABZNlF20/TceaabZtYUI/AAAAAAAAAYU/kjYjZxAGDCw/s320/images.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5604618040108736834" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;होने लगा है कम अब आँख का पानी,&lt;br /&gt;छलकता नहीं है अब आँख का पानी।&lt;br /&gt;कम हो गया लिहाज,बुजुर्गों का जब से,&lt;br /&gt;मरने लगा है अब आँख का पानी।&lt;br /&gt;सिमटने लगे हैं जब से नदी,ताल,सरोवर&lt;br /&gt;सूख गया है तब से आँख का पानी।&lt;br /&gt;पर पीड़ा में बहता था दरिया तूफानी&lt;br /&gt;आता नहीं नजर कतरा ,आँख का पानी।&lt;br /&gt;स्वार्थों की चर्बी जब आँखों पर छा‌ई &lt;br /&gt;भूल गया बहना,आँख का पानी।&lt;br /&gt;उड़ ग‌ई नींद माँ-बाप की आजकल &lt;br /&gt;उतरा है जब से बच्चों की आँख का पानी।&lt;br /&gt;फैशन के दौर की सबसे बुरी खबर&lt;br /&gt;मर गया है औरत की आँख का पानी।&lt;br /&gt;देख कर नंगे जिस्म और लरजते होंठ &lt;br /&gt;पलकों में सिमट गया आँख का पानी।&lt;br /&gt;लूटा है जिन्होंने मुल्क का अमन ओ चैन&lt;br /&gt;उतरा हु‌आ है जिस्म से आँख का पानी।&lt;br /&gt;नेता जो बनते आजकल,भ्रष्ट,बे ईमान हैं&lt;br /&gt;बनने से पहले उतारते आँख का पानी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-7925779222890015734?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/7925779222890015734/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/blog-post_09.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/7925779222890015734'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/7925779222890015734'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/blog-post_09.html' title='आँख का पानी'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-uIFABZNlF20/TceaabZtYUI/AAAAAAAAAYU/kjYjZxAGDCw/s72-c/images.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-2738950691173443481</id><published>2011-05-07T05:49:00.000-07:00</published><updated>2011-05-07T05:51:12.568-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='- रीतू अग्रवाल'/><title type='text'>कम बोलो, मीठा बोलो, अच्छे के लि‌ए बोलो</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/-TEvGCxIec2Q/TcVANLhzz5I/AAAAAAAAAYM/nH8crPmvIPQ/s1600/parents-2.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 292px; height: 320px;" src="http://3.bp.blogspot.com/-TEvGCxIec2Q/TcVANLhzz5I/AAAAAAAAAYM/nH8crPmvIPQ/s320/parents-2.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5603955906509524882" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;बच्चों को अनुशासन में रहने और रखने के लि‌ए हिंसा का सहारा लिया जाता है । ये हिंसा कहीं और नहीं अपने ही घरों और स्कूलों में होती है । बच्चों पर की गई हिंसा किसी भी रूप में हो सकती है, चाहे वह शारीरिक हो, मानसिक हो या फिर भावनात्मक । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;धर्म के दस लक्षणों में एक ‘सत्यता’ (सच्चा‌ई) भी है । सामान्य तौर पर यह लक्षण वाणी से जुड़ा है, अर्थात जो जैसा देखा, सुना या समझा गया है । यह हु‌ई सत्य की सरल परिभाषा । परंतु ‘सत्यता’ का अर्थ केवल यह नहीं है । सत्यता का अर्थ है धर्म की आत्मा को प्रज्वलित करना । उदाहरण के तौर पर, यदि को‌ई व्यक्‍ति किसी असाध्य रोग से पीडि़त है तो उसे ऐसा डाक्टरी तथ्य बताना ’सत्य’ का पालन नहीं है, जिसकी हतक से वह कल के बजाय आज ही मर जा‌ए । ऐसी सचा‌ई तो झूठ बोलने से भी बुरी है । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसी प्रकार यदि दो व्यक्‍तियों या दो पक्षों के संबंधों में बिगाड़ है और दोनों ही अडियल हैं, तो दोनों की कही हु‌ई बातें सच-सच एक-दूसरे को बताकर उनके बीच कड़वाहट बढ़ाने से कहीं अच्छा है दोनों के बीच ईमानदारी से समझौता कराने का प्रयास करना । एक समय था जब अपनी कमियों या खामियों को स्वीकार कर लेने वालों को लोग आदर की दृष्टि से देखते थे । लेकिन अब सब कुछ बदल सा गया है । अपनी कमजोरियां बताने का मतलब है अपनी खिल्ली उड़वाना । लोग अक्सर दूसरों के नकारात्मक व उदासीन पक्ष को प्रसारित कर उनके नाम और पद को बदनाम करते हैं और खुश होते हैं । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ऐसे क‌ई उदाहरण हैं । एक नवविवाहिता को विश्‍वास में लेकर कहा गया कि वह अपने बीते हु‌ए कल की सारी घटना‌एं अपने पति को निर्भय होकर बता दे । उसे प्रेम और क्षमादान दिया जा‌एगा । परंतु ऐसा न कर एक बदले की भावना पाल ली ग‌ई और उसका जीवन नारकीय बना दिया गया । उचित तो यही था कि अपने पिछले जीवन की बातों के बारे में वह पूरी तरह मौन रहती, क्योंकि पता चलने पर सिवाय समस्या‌ओं और दुखों के कुछ नहीं मिला । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुछ दिन पहले नवभारत टा‌इम्स में एक समाचार छपा था कि किस तरह एक महिला को ‘सच का सामना’ करना भारी पड़ा । एक टीवी चैनल पर सच का सामना देखते हु‌ए एक पति ने अपनी पत्‍नी से विवाह से पूर्व के सच का खुलासा करने को कहा । पत्‍नी ने बताया कि शादी से पहले उसका एक प्रेम संबंध था । पति-पत्‍नी के सच को सहन नहीं कर सका और आत्महत्या कर ली । समाजशास्त्री मानते हैं, कि जीवन में कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्हें रहस्य रखना ही बेहतर होता है । क‌ई बार इनके खुलने से लोगों के जीवन में भूचाल आ जाता है । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;निस्संदेह सचा‌ई एक श्रेष्ठ गुण है । कथनी और करनी के बीच तालमेल होना श्रेयस्कर है । परंतु स्मरण रहे कि बीते हु‌ए कल की बातों के बारे में मौन रहना अधिक श्रेष्ठतर है, क्योंकि उनका खुलासा करने से हानि की संभावना कहीं अधिक है । ऐसी परिस्थितियों में मौन ही सत्यता है । हालांकि झूठ किसी भी स्थिति में सच से बेहतर नहीं हो सकता ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-2738950691173443481?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/2738950691173443481/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/blog-post_07.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/2738950691173443481'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/2738950691173443481'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/blog-post_07.html' title='कम बोलो, मीठा बोलो, अच्छे के लि‌ए बोलो'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-TEvGCxIec2Q/TcVANLhzz5I/AAAAAAAAAYM/nH8crPmvIPQ/s72-c/parents-2.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-8184089265721307361</id><published>2011-05-06T03:15:00.000-07:00</published><updated>2011-05-06T03:20:07.088-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='- पं. कृष्णगोपाल मिश्र'/><title type='text'>सूर्य मेष संक्रान्ति के आधार पर वर्ष फल</title><content type='html'>जैसा आप सभी जानते हैं, कि हिन्दी पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नए संवत अर्थात्‌ नये वर्ष की शुरूआत होती है । साथ ही जब पृथ्वी सूर्य का एक चक्‍कर पूर्ण करती है, तब सूर्य पुनः मेष संक्रान्ति में शून्य अंश का होता है । उस समय जो लग्न उदित होता है, वह पूरे वर्ष की वर्ष कुण्डली होती है । इसके आधार पर उस वर्ष सारे संसार में अप्राकृतिक व प्राकृतिक घटनाओं के पूर्वानुमान ज्योतिष विज्ञान द्वारा किया जाता है । १४ अप्रैल २०११ को दोपहर १ बजकर २५ सेकेण्ड में सूर्य मेष संक्रान्ति में प्रवेश कर रहा है, उस समय कर्क राशि का लग्न उदित हो रहा है । जिसके अंतर्गत नवम्‌ भाव में गुरू, बुध व मंगल की युति है, वृहस्पति आग्नेय प्रवृत्ति के होते हैं । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह पूर्व दिशा एवं दक्षिण दिशा तथा एशियाई देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं । वहीं दूसरी तरफ शनि, शुक्र, बुध क्षारीय प्रवृत्ति के होने के कारण बेसिकली पश्‍चिमोत्तर क्षेत्र, विशेषकर यूरोपीय देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं । देखा जाए तो इस वर्ष चक्र में तृतीयस्थ शनि व अष्टमस्थ शुक्र की प्रबलता यूरोपीय देशों के लिए बड़ा ही अच्छा संकेतक नहीं है । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस चक्र के नवमांश में भी गौर करें तो वृश्‍चिक लग्न के नवमांश के आठवें घर में शुक्र, शनि की युति यूरोपीय देशों में कुछ प्राकृतिक आपदाओं का सूचक बन रहा है, साथ ही साथ लग्नस्थ मंगल का बुध के नक्षत्र में पाया जाना और तृतीय भाव में मंगल का होना मुस्लिम देशों में हिंसक घटनाओं का सूचक है । लेकिन एशियाई देशों में धार्मिक एवं शांतिप्रिय देशों में प्रगति देखने को मिलेगी । जिसमें विशेषकर भारत, चीन आदि देखा जाय तो शुरू के दिनों मुख्यतः 3 मई से 15 मई, 13 जून से 2 जुलाई, 26 दिसम्बर से 25 जनवरी 2012, 22 फरवरी 2012 से 12 मार्च 2012, आदि इस वर्ष के खराब समय होंगे, जिसमें अप्राकृतिक घटनाओं की आशंका है, लेकिन इस वर्ष में 5 जुलाई 2011 से 23 जुलाई, 23 अगस्त 2011 से 13 सितंबर सामान्यतः ठीक कहा जायेगा । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;व्यावसायिक दृष्टिकोण से यूरोपीय देशों की आर्थिक स्थिति बिगड़ती दिखाई दे रही है, जिसमें अमेरिका का आर्थिक नुकसान कहीं ज्यादा होने की संभावना है, लेकिन एशियाई देशों में विशेषकर भारत व चाइना की आर्थिक प्रगति काफी तेजी से होती दिखाई दे रही है । आर्थिक व विश्‍वस्तर पर सरल व उदार नीति के साथ भारत मजबूत भूमिका में साबित होगा । उपरोक्‍त खराब समय में पूरब दक्षिण कुछ समुद्रतटीय देशों को तथा पश्‍चिमोत्तर बर्फीली क्षेत्रों के कुछ देशों को प्राकृतिक घटनाओं से संभलना चाहिए । इसी प्रकार ३ अप्रैल २०११ को रात्रि ८ बजकर ४ मिनट में चैत्र शुक्ल पक्ष प्रारम्भ हो रहा है । इस स्थिति में हिंदी पंचांग के अनुसार नया वर्ष प्रारम्भ हो रहा है, इसके अनुसार यह तुला लग्न था, और इसे नये वर्ष प्रवेश के चक्र के अनुसार छठें भाव में शुक्र, मंगल, वृहस्पति तथा चन्द्रमा की युति कुछ अप्रत्याशित परिवर्तन के सूचक हैं । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कट्‍टरपंथी देशों में जहां उन्माद, सत्ता परिवर्तन कराये गये वहीं विश्‍व में कुछ नये देश भी उभरकर अपनी कीर्ति स्थापित करेंगे । वह देश मुख्यतः एशिया से होगा और मुख्य रूप से शांति व सौहार्द्र पूर्ण एवं धर्म निरपेक्ष देश होगा । भारत में काफी परिवर्तन की आशंका है, तथा भारत की आर्थिक समृद्धि भी बढ़ेगी विशेषकर व्यावसायिक दृष्टिकोण से आईटी, शिक्षा, शेयर-बाजार के क्षेत्रों में काफी ज्यादा आर्थिक प्रगति बढ़ेगी और इस क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावना है । इस प्रकार यह नया वर्ष भारत एवं एशियाई क्षेत्र के देशों के लिए ठीक तो है, लेकिन इस वर्ष में धार्मिक कट्‍टरपंथी वालों देशों को अपने अंदर बदलाव लाना चाहिये अन्यथा उन्हें अत्यधिक हानि उठानी पड़ सकती हैं, साथ ही साथ विश्‍व में भी अशांति के कारण बन सकते हैं । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पश्‍चिमी देश भी अपनी शक्‍ति का नाज़ायज फायदा ना उठायें, इससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में उनकी छवि भी खराब होगी । अतः उन्हें अप्राकृतिक आपदाओं से भी संभलकर रहना होगा । इस वर्ष में प्रॉपटी, ऊर्जा संयंत्रों में पेट्रोल एवं कमोडिटी मार्किट में खासकर सोना आदि के भाव आसमान चढ़ेंगे । भ्रष्टाचार भी बढ़ेगा, लेकिन बड़े-बड़े भ्रष्टाचार भी उजागर होंगे । कुछ नये आइडियल एवं अनुशासित राजनेताओं की छवि उभरेगी ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-8184089265721307361?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/8184089265721307361/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/blog-post_06.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/8184089265721307361'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/8184089265721307361'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/blog-post_06.html' title='सूर्य मेष संक्रान्ति के आधार पर वर्ष फल'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-4134182977173525514</id><published>2011-05-06T03:13:00.000-07:00</published><updated>2011-05-06T03:14:34.027-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अजय कुमर पान्डेय'/><title type='text'>अपराध की बांहों में राजधानी</title><content type='html'>जिस दिन पूरा देश महिला दिवस मना रहा था उस दिन देश की राजधानी में दिल्ली में दो हत्यायें हुई । एक दिल्ली विश्‍वविद्यालय की छात्रा राधिका तंवर की और दूसरी नोएडा के चर्चित आरूषि हत्याकांड के राजेश तलवार की वकील रेबेका जॉन की मां एम मेमन की । बात सिर्फ दो हत्या की नहीं है, बल्कि दिल्ली में बढ़ रहे अपराधिक मामले की है । आज आलम ये है कि दिल्ली में ऐसा कोई दिन नहीं गुजरता जब कोई हत्या, बलात्कार, छेड़छाड़ या हिंसा की खबरें मीडिया में नहीं आती और इस पूरे मामले में महिलाओं पर इसका असर सबसे ज्यादा पड़ रहा है । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दिल्ली में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार यहां लगभग 67 प्रतिशत महिलाएं किसी न किसी रूप में दुर्व्यवहार का शिकार होती है, जबकि 2010 में हर तीन में से दो महिलाएं यौन हिंसा की शिकार हुई हैं, जबकि हर 17 घंटे में एक छेड़खानी होती है । बलात्कार के मामले में अभी तक पुलिस ने 340 पड़ोसी, 94 दोस्त, 62 रिश्तेदार, और 10 अपरिचित लोगों को हिरासत में लिया है । हैरानीजनक बात तो यह है, कि जब ऐसी कोई घटना होती है तभी पुलिस सक्रिय होती है और इसी वजह से दिल्ली में महिलाएं अपने आपको सुरक्षित नहीं मानती और दस में से सात महिलाओं का पुलिस पर से विश्‍वास उठ गया है । राजधानी की 71 प्रतिशत महिलाएं पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाने में अपने आप को असुरक्षित महसूस करती है और इसका सबसे ज्यादा शिकार स्कूल या कॉलेज जाने वाली लड़कियां और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाएं होती हैं । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ऐसे में प्रश्न ये उठता है कि दिल्ली में अपराधिक विकृतियां क्यों बढ़ रही हैं? जिसे न तो प्रशासन का डर है और ना ही सामाजिक शक्‍तियों का । सबसे बड़ी बात तो यह है कि भ्रष्टाचार और अपराध ने हमारी व्यवस्था में अंदर तक पैठ बना ली है और वे हमारे समाज के अभिन्‍न अंग बन गए हैं और यही हाल है देश की राजधानी का, यहां ऐसी कई बस्तियां हैं जहां मेहनत मजदूरी करने वाले गरीब लोग रहते हैं, और इन्हीं इलाकों में आपराधिक तत्व पोषण प्राप्त कर रहे हैं । तथा यहीं से आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं, चौंकाने वाली बात तो यह है कि पुलिस तथा प्रशासन इन सबसे वाकिफ है लेकिन अब तक कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अभी हाल ही में दिल्ली सरकार ने एक आंकड़े जारी किए हैं जिसे देखकर यही लगता है कि दिल्ली में अपराधों की दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि हो रही है जबकि दिल्ली पुलिस के आधुनिकीकरण और लाख दावों के बाद भी कि यहां अपराध कम हुए हैं एक खोखला सच ही सामने आया है क्योंकि इस बात की पुष्टि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित खुद विधानसभा में कर चुकी हैं कि दिल्ली में अपराध पिछले वर्षों में काफी बढ़े हैं । हालांकि दिल्ली में बढ़ रहे अपराध को लेकर मुख्यमंत्री के बयान भी राजनीति से प्रेरित ही लगते हैं क्योंकि, राधिका तंवर हत्याकांड में जब मीडिया ने उनको कठघरे में खड़ा किया तो उन्होंने अपना पल्ला झाड़ते हुए कह दिया कि दिल्ली पुलिस पर मेरा कोई जोर नहीं क्योंकि यहां की पुलिस केन्द्र सरकार के अधीन काम करती है इसलिए अपराधों के प्रति मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती । अब चाहे जो भी हो, इसके लिए चाहे केन्द्र सरकार दोषी हो या राज्य सरकार सबकी निगाहें दिल्ली में बढ़ रहे क्राइम ग्राफ की ओर है, और सरकार में बैठे लोग हो या पुलिस प्रशासन सबकी जिम्मेदारी बनती है कि अपराध की बाहों में जकड़ी हुई दिल्ली को बाहर निकालें । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;क्राइम जोन है दिल्ली का धौलाकुआं &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दक्षिण दिल्ली का धौलाकुआं इलाका दिल्ली में बढ़ते हुए अपराधों का जोन बन गया है । एक अध्ययन के अनुसार इस क्षेत्र में पिछले एक महीने में एक बलात्कार, ग्यारह डकैती, एक हत्या, और एक छेड़खानी हुई है, जबकि पिछले वर्ष पांच महीनों का ब्यौरा देखा जाए तो अभी तक तीन बलात्कार और तीन छेड़खानी के मामले दर्ज हुए हैं । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पिछले दो महीनों में पुलिस द्वारा दर्ज अपराधिक मामले &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हत्या ---- 80 &lt;br /&gt;हत्या की कोशिश-----51 &lt;br /&gt;बलात्कार----- 14 &lt;br /&gt;2010 में हुए आपराधिक मामले &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आपराधिक मामले--- 53,244 &lt;br /&gt;हत्या -----467 &lt;br /&gt;बलात्कार-----581 &lt;br /&gt;डकैती ----- 1,764 &lt;br /&gt;अपहरण ------1,582 &lt;br /&gt;वाहन चोरी---- 6867 &lt;br /&gt;घरों में चोरी --- 905&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-4134182977173525514?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/4134182977173525514/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/4134182977173525514'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/4134182977173525514'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/05/blog-post.html' title='अपराध की बांहों में राजधानी'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-419404192518064532</id><published>2011-04-16T00:40:00.001-07:00</published><updated>2011-04-16T00:40:48.225-07:00</updated><title type='text'>हिंसक होकर नहीं, प्यार से बताये गलतियों को</title><content type='html'>बच्चों को अनुशासन में रहने और रखने के लि‌ए हिंसा का सहारा लिया जाता है । ये हिंसा कहीं और नहीं अपने ही घरों और स्कूलों में होती है । बच्चों पर की गई हिंसा किसी भी रूप में हो सकती है, चाहे वह शारीरिक हो, मानसिक हो या फिर भावनात्मक । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में कहा गया हैं, कि दो से 14 साल की आयु के बच्चों को अनुशासन में रखने के लि‌ए तीन चौथा‌ई बच्चों के साथ हिंसा का सहारा लिया जाता है । इसमें आधे बच्चों को शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है । जेनेवा में आयोजित यू‌एन की मानवाधिकार समिति के बैठक में यूनिसेफ ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत किया । यह रिपोर्ट दुनिया के ३३ निचले और मध्यम आय वाले देशों के 1-14 आयुवर्ग के बच्चों पर आधारित थी, जिसमें बच्चों के अभिभावक भी शामिल थे । बैठक में यू‌एन विशेषज्ञों ने तय किया कि बच्चों के प्रति हिंसात्मक रवैया न अपनाने के लि‌ए जागरूकता फैला‌ई जाये। इसको रोकने लि‌ए दुनियाभर की सरकारें कानूनी कदम उठायें । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;रिपोर्ट में कहा गया है, कि बच्चों को अनुशासन में रखने के लि‌ए घरों में आठ तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है । इसमें कुछ शारीरिक हैं, तो कुछ मानसिक । शारीरिक हिंसा में बच्चों को पीटना या जोर से झकझोरना आदि है, जबकि मानसिक हिंसा में बच्चों पर चीखना या नाम लेकर डांटना आदि है । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;थोड़े देर के लि‌ए यह बात ठीक भी है, लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है जो काफी खतरनाक है । बचपन में बोया गया हिंसा का ये बीज युवा होते-होते विषधर वटवृक्ष का रूप ले लेता है, जो किसी भी रूप में अच्छा नहीं है । यह सच है कि शिक्षा और शिष्टाचार सिखाने के लि‌ए अनुशासन जरूरी है । हो सकता है, अनुशासन के लि‌ए दंड भी आवश्यक हो, लेकिन दंड इतना कभी नहीं होना चाहि‌ए कि बच्चों के कोमल मन और उसके स्वाभिमान पर चोट करे, उसकी कोमल भावना‌एं आहत हो । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बच्चों पर किये या हु‌ए हिंसक और हृदय विदारक अत्याचार न केवल उनके बाल सुलभ मन को कुंठित करते हैं, बल्कि उनके मन में एक बात घर कर जाती है, कि बड़ों (सबलों) को छोटों (निर्बल) पर हिंसा करने का अधिकार है । बाल सुलभ मन पर घर कर जाने वाली यही बात, कुंठा आगे चलकर निजी जिंदगी और सामाजिक जीवन में विषवेल के रूप में दिखा‌ई देता है । गलती करना इंसान कि फितरत है, और गलती को सुधार लेना इंसान कि बुद्धिमता का परिचायक । गलती को‌ई भी करे, एहसास होने पर उसे भी दुख होता है । गलती पर दंड देने या प्रताड़ित करने से हो चुकी गलती को सुधारा नहीं जा सकता है । प्रताड़ित करने और मन को आहत करने के बजाये उसे बताया जाना चाहि‌ए कि गलती हु‌ई तो क्यों और कैसे हुई? उसके नुकसान का आंकलन बच्चों से ही करा‌एँ। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गलती का एहसास कराने के लि‌ए हिंसक होने की जरूरत नहीं है, प्यार से बता‌एं । प्यार हर काम को आसन करता है । यह मुश्किल तो है, लेकिन दुश्कर नहीं और परिणाम सौ प्रतिशत ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-419404192518064532?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/419404192518064532/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/04/blog-post_16.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/419404192518064532'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/419404192518064532'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/04/blog-post_16.html' title='हिंसक होकर नहीं, प्यार से बताये गलतियों को'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-285442376750172102</id><published>2011-04-02T00:51:00.000-07:00</published><updated>2011-04-02T01:05:34.697-07:00</updated><title type='text'>आज इंडिया वर्ल्ड कप जीतेगा - कृष्णगोपाल मिश्र</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/-PviKJPi4Fsw/TZbWNXK4IaI/AAAAAAAAAYE/zY1C0xYjquY/s1600/India%2BVs%2BSri%2BLanka-The%2BFinal-ICC%2BCricket%2BWorld%2BCup%2B2011.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 256px;" src="http://2.bp.blogspot.com/-PviKJPi4Fsw/TZbWNXK4IaI/AAAAAAAAAYE/zY1C0xYjquY/s320/India%2BVs%2BSri%2BLanka-The%2BFinal-ICC%2BCricket%2BWorld%2BCup%2B2011.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5590891512473330082" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;                                     &lt;br /&gt;आज हर हिंदुस्तानी के दिल में वर्ल्ड कप जीत लेने की इच्छा है । वैसे ज्योतिषी गणना के आधार पर आज का वर्ल्ड कप फाईनल इंडिया ही जीतेगी, क्योंकि इंडिया की आजादी की तारीख १५ अगस्त है, जिसका मूलांक ६ है आज की तारीख का मूल्यांक २ है । ६ और २ का आपसी मेल काफी अच्छा होता है । साथ ही इंडिया का वर्ष चक्र तो मजबूत चल ही रहा है, और आपका दैनिक चक्र धनु लग्न का है, जिसके चतुर्थ भाव में सूर्य, मंगल एवं गुरू की अच्छी युति है । जो जीत के लिए अच्छा सूचक है । आज सचिन का प्रदर्शन भी अच्छा रहेगा आज वे संभल कर और प्रारम्भ में धीमी गति से खेलेंगे यदि भारत की बैंटिग पारी पहले रही तो प्रारम्भ से १६:१५ बजे तक सचिन पिच पर टिके रह सकते है । सहवाग की भी शुरूआती पारी काफी धुंआ-धार होगी, लेकिन सहवाग प्रारम्भ के १५ मिनट संभल कर खेलें तो कम से कम ४५ मिनट तक पिज पर रहेंगे ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;युवराज सिंह के लिए भी आज का दिन अच्छा रहेगा, लेकिन वह थोड़ा एकाग्रता एवं धैर्य के साथ खेंले तो ज्यादा अच्छा रहेगा, फिर युवराज सिंह काफी अच्छी पारी खेलेंगे । धोनी के भी खेल में आज काफी सुधार देखने को मिलेगा, क्योंकि उनके आज के दैनिक चक्र के नौमांशा में शनि, चन्द्र दशम्‌ भाव में काफी मजबूत है । आज धोनी अच्छा प्रदर्शन करेंगे, अतः आज टीम इंडिया वर्ल्ड कप अवश्य जीतेगी ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-285442376750172102?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/285442376750172102/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/04/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/285442376750172102'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/285442376750172102'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/04/blog-post.html' title='आज इंडिया वर्ल्ड कप जीतेगा - कृष्णगोपाल मिश्र'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-PviKJPi4Fsw/TZbWNXK4IaI/AAAAAAAAAYE/zY1C0xYjquY/s72-c/India%2BVs%2BSri%2BLanka-The%2BFinal-ICC%2BCricket%2BWorld%2BCup%2B2011.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-3519934285292053538</id><published>2011-03-24T02:49:00.000-07:00</published><updated>2011-03-24T02:53:29.317-07:00</updated><title type='text'>ऑस्ट्रेलिया और भारत के २४ तारीख के मैच का ज्योतिषीय आंकलन - पं. कृष्णगोपाल मिश्र</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/-qLjYDmDWUVo/TYsUeTT6QGI/AAAAAAAAAX8/531-IN6aNl4/s1600/india%2Bv%2Baustralia%2BCricket%2BLogo.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 266px;" src="http://1.bp.blogspot.com/-qLjYDmDWUVo/TYsUeTT6QGI/AAAAAAAAAX8/531-IN6aNl4/s320/india%2Bv%2Baustralia%2BCricket%2BLogo.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5587582273495646306" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;                                                             &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज ऑस्ट्रेलिया और भारत का मैच है, यह मैच काफी टक्‍कर का हो सकता है । क्योंकि ऑस्ट्रेलिया का अंक ३ हैं, और भारत का भी अंक ३ है । दोनों ही टीमों का अंक ३ होने के कारण दोनों ही एक-दूसरे से कम नहीं पड़ेंगे । भारत के कप्तान महेन्द्रर सिंह धोनी का अंक ३ है, ये अंक भारत के लिए एक अच्छा व कारगर अंक साबित होगा, जो भारत को मजबूती प्रदान कर रहा है । पर रिकी पोंटिग का अंक ६ हैं, वो अंक भी ऑस्ट्रेलिया को अच्छी मजबूती प्रदान कर रहा है । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भारत के डेली चार्ट के अनुसार थोड़ा सा आज का दिन खराब बन रहा है, इस कारण यह मैच संघर्षपूर्ण हो सकता है । विरेन्द्र सहवाग का अंक ९ हैं, यह आज के दिन चलने वाले बेस्टमैन कहे जायेंगे, लेकिन लंबे समय तक भरोसा करना मुश्किल होगा, फिर भी चलेगा । २४ तारीक का मूल्यांक ६ है और सहवाग का अंक ९ हैं, जो आपस में मेल खाता है । सचिन का अंक ६ है, और आज का मूल्यांक भी ६ है । इसलिये २४ तारीक के मैच में सचिन भरोसेमंद साबित होंगे, ये अच्छा प्रदर्शन देंगे । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;युवराज सिंह का अंक १ हैं, अतः २४ तारीक के मैच में इनका प्रदर्शन ठीक-ठाक रहेगा । विराट कोहली का अंक ८ है, जो आज की तारीक से काफी मैच करता है, इसलिये इनका अच्छा प्रदर्शन रहेगा । आज के दिन भरोसेमंद खिलाड़ी विराट कोहली, सचिन तेंदुलकर व सहवाग होंगे, लेकिन आज का मैच संघर्षपूर्ण रहेगा । आज का मैच जीतने के बाद २९ तारीक का मैच भारत के लिए बहुत आसान हो जायेगा ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-3519934285292053538?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/3519934285292053538/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/03/blog-post_24.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/3519934285292053538'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/3519934285292053538'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/03/blog-post_24.html' title='ऑस्ट्रेलिया और भारत के २४ तारीख के मैच का ज्योतिषीय आंकलन - पं. कृष्णगोपाल मिश्र'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' 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चंद्रमा से या पूर्णिमा से पृथ्वी पर कोई भी भौगोलिक परिवर्तन का आधार ज्योतिषीय ढंग से नहीं साबित होता है । यह बात अवश्य है, कि पूर्णिमा के समय में समुद्र में ज्वार-भाटा उत्पन्‍न होना संवेदनशील प्राणियों में संवेदना के वेग का बढ़ना आदि नजर आता है । पर इतनी बड़ी घटना को पूर्णिमा से जोड़े जाने का कहीं से भी औचित्य नहीं बनता । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;संसार तीन तरह की शक्‍तियों के संयुक्त बन्धन से संचालित हो रहा है, जिसको स्थूल रूप से तीन वर्गों में बाँट कर समझ सकते हैं, पहला भौतिक आधार पर वात, पित्त और कफ आध्यात्मिक आधार पर ब्रम्हा, विष्णु और महेश और वैज्ञानिक रूप से प्रोटान, इलेक्टॉन, व न्यूट्रॉन की बाइन्डिंग एनर्जी इन्हीं के आधार पर यह सृष्टि पदार्थ रूप में साकार दिखाई देती है । इन तीनों शक्‍तियों में जब संतुलन बिगड़ता है, तो प्रकृति की अप्राकृतिक आपदाएं होती हैं । वर्तमान समय में गोचर के ग्रहों की व्याख्या करेंगे तो हम पायेंगे कि कुंभ राशि में ही गुरू व मंगल का एक साथ मजबूत होना तथा शनि का मंगल व सूर्य से षडाष्टक योग बनाना एक भौगोलिक असंतुलन का तो सूचक है ही साथ ही साथ २०१० में जब सूर्य की मेष संक्रान्ति हुई थी उस समय ग्रह स्थिति के कारण जैसे मेष लग्न का शुक्र लग्न में पाया जाना साथ ही छठें घर में शनि की वक्रीय स्थिति शुक्र, शनि के साथ षडाष्टक योग बनाते हुए अकारक योग का सूचक है । और ऐसे में मंगल लग्नाधिपति जो पृथ्वी का बड़ा ही कारक ग्रह माना जाता है । उसका नीच राशि कर्क में कमजोर होना तथा उसके साथ चन्द्रमा का मीन राशि में मूलत्रिकोण का संबंध बनाना एक भारी प्राकृतिक आपदा विशेषकर सुनामी व भूंकप का असंतुलन तो दिखाई दे रहा है, साथ ही इस चक्र के नवमांश को ध्यान से देखें तो वृश्‍चिक लग्न राशि का नवमांश बन रहा है । चतुर्थ भाव में शनि व चन्द्रमा तथा द्वादश भाव में सूर्य, मंगल व राहु एक प्राकृतिक आपदा का सूचक है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस चक्र के मुद्दा दशा में ध्यान दें तो जापान की यह घटना शनि की मुद्‌दा शुक्र की अन्तर मुददा में घटी है, यानि यहां पर हम स्पष्ट रूप से कह सकते हैं कि २०१० के सूर्य के मेष संक्रान्ति में बने चक्र के अनुसार अकारक कफ़स ग्रह काफी मजबूत अवश्था में है । और आग्नेय तत्व के कारक ग्रह सूर्य, मंगल व वृहस्पति जो कि बचाव ग्रह में है, काफी कमजोर स्थिति में दिखाई दे रहे हैं इस कारण यह घटना घटी । साथ ही साथ उस समय की मंगल की स्थिति से घटना के मंगल की स्थिति आठवें स्थान की है, जो कि और ज्यादा खराब बनती है । इस कारण से यह घटना ग्रहों के असंतुलन के कारण घटी है, ना कि चन्द्रमा के निकटता के कारण घटी है । अलबत्ता इस घटना को घटाने में चन्द्रमा एक कारक ग्रह हो सकता है, लेकिन सारा दोष चन्द्रमा का नहीं है । इसमें मुख्य दोष मंगल का दिखाई दे रहा है । भूकंप तथा प्राकृतिक आपदाएं २०११ में पुनः एक बार २६ दिसम्बर २०११ से १३ अप्रैल २०१२ के बाद पुनः प्राकृतिक आपदाओं के लक्षण दिखाई दे रहे हैं । यह सर्वाधिक खराब समय ४ जनवरी २०१२ से १२ जनवरी २०१२ के बीच में ३ मार्च से १२ मार्च के बीच दिखाई दे रहा है । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह एशियाई देशों में विशेषकर मुस्लिम बस्तियों में तनाव, युद्ध के कारण कुछ घटनाएं तो घटेंगी साथ ही कुछ अप्रत्याशित घटनाएं घट सकती हैं । विश्‍व में दो जगह विशेष सावधानी बरतनी चाहिए । पहला तो पश्‍चिम उत्तर के कुछ देशों में, दूसरा दक्षिण पूर्वी कुछ देशों को शांति व धैर्यपूर्वक इस घटना के ना घटने का उपाय करना चाहिये ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-3376727873085330238?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/3376727873085330238/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/03/blog-post.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/3376727873085330238'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/3376727873085330238'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/03/blog-post.html' title='आगामी पूर्णिमा जापान की घटना की दोषी नहीं  -  पं. कृष्णगोपाल मिश्र'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-30301291906713552</id><published>2011-03-04T00:20:00.000-08:00</published><updated>2011-03-04T00:27:00.360-08:00</updated><title type='text'></title><content type='html'>http://mail.google.com/mail/?ui=2&amp;ik=ece6a29259&amp;view=att&amp;th=12e7a2373f99b63c&amp;attid=0.1&amp;disp=emb&amp;realattid=b691d606bfb5ec56_0.1.2&amp;zw&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-30301291906713552?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/30301291906713552/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/03/httpmail.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/30301291906713552'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/30301291906713552'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2011/03/httpmail.html' title=''/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-8855371848259438221</id><published>2010-10-09T10:00:00.000-07:00</published><updated>2010-10-09T10:13:50.152-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='डॉ अ.कीर्तिवर्धन'/><title type='text'>मेरा दिल है बड़ा उदास</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TLCixvPOy_I/AAAAAAAAANg/4C4GX20Ngz0/s1600/Alone_Girl.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 240px; height: 320px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TLCixvPOy_I/AAAAAAAAANg/4C4GX20Ngz0/s320/Alone_Girl.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5526095718161239026" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;मेरा दिल है बड़ा उदास.&lt;br /&gt;आओ पापा मेरे पास&lt;br /&gt;मेरा दिल है बड़ा उदास&lt;br /&gt;मम्मी की भी याद सताती&lt;br /&gt;भैया को मैं भूल न पाती.&lt;br /&gt;तुमसे मैं कुछ न मांगूगी&lt;br /&gt;पढने मे प्रथम आउंगी&lt;br /&gt;रखो मुझको अपने पास&lt;br /&gt;मेरा दिल है बड़ा उदास.&lt;br /&gt;नहीं सहेली संग खेलूंगी&lt;br /&gt;गुडिया को भी बंद कर दूंगी&lt;br /&gt;बैठूंगी भैया के पास&lt;br /&gt;मेरा दिल है बड़ा उदास.&lt;br /&gt;जाओगे जब कल्ब मे आप&lt;br /&gt;मम्मी को ले कर के साथ&lt;br /&gt;रह लुंगी दादी के पास&lt;br /&gt;मेरा दिल है बड़ा उदास.&lt;br /&gt;नहीं चाहिए चोकलेट टाफी&lt;br /&gt;नहीं चाहिए मुझको फ्राक&lt;br /&gt;मम्मी पापा मुझे चाहिए&lt;br /&gt;मेरा दिल है बड़ा उदास.&lt;br /&gt;राजा रानी के किस्से&lt;br /&gt;भगवान की प्यारी बात&lt;br /&gt;दादी हमको रोज सुनाती&lt;br /&gt;आती मुझको उनकी याद.&lt;br /&gt;बुआ से छोटी करवाना&lt;br /&gt;चाचा के संग बाज़ार जाना&lt;br /&gt;जिद नहीं मैं कभी करुँगी&lt;br /&gt;पापा मुझको घर ले जाना.&lt;br /&gt;कहना मानूँ दूध पियूंगी&lt;br /&gt;घर की छत  पर नहीं चढूँगी&lt;br /&gt;घर ले जाओ मुझको पापा&lt;br /&gt;हॉस्टल मे मैं नहीं पढूंगी.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-8855371848259438221?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/8855371848259438221/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/10/blog-post.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/8855371848259438221'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/8855371848259438221'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/10/blog-post.html' title='मेरा दिल है बड़ा उदास'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TLCixvPOy_I/AAAAAAAAANg/4C4GX20Ngz0/s72-c/Alone_Girl.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-610395982146871801</id><published>2010-09-27T11:16:00.000-07:00</published><updated>2010-09-27T11:20:01.190-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='- रौशन कुमार'/><title type='text'>सुर साम्राज्ञी की 81 वीं सालगिरह</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TKDgPKBZKOI/AAAAAAAAAMw/rMHlrx6q2gc/s1600/lata+ji.JPG"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 249px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TKDgPKBZKOI/AAAAAAAAAMw/rMHlrx6q2gc/s320/lata+ji.JPG" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5521659694149085410" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;लता मंगेशकर जिन्हें हम सुर की साम्राज्ञी के नाम से जानते हैं प्यार से लोग इन्हें दीदी बुलाते हैं । कहा जाता है कि सरस्वती इनके गले में विराजमान हैं । इनका जन्म 28 सितंबर 1929 को पिता- दीनानाथ मंगेशकर के घर इंदौर में हुआ था । लता जी चार बहन और एक भाई हैं । इन्हें क्रिकेट देखना और खाने में मछली एवं कोल्हापुरी मटन पसंद है । इन्हें डायमंड एवं सफेद छींटेदार साड़ी पहनना ज्यादा अच्छा लगता है । इनका जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा है । १९४२ में पिता की मृत्यु के पश्‍चात्‌ मात्र १३ साल की उम्र में ही इनपर घर की जिम्मेवारी आ गई । उस समय लता जी की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, सो घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए इन्होंने फिल्मों की तरफ रूख किया और गायकी को अपना पेशा बनाया ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कैरियर के शुरूआती दौर में सबसे पहले इन्हें मराठी फिल्म में गाने का मौका मिला, लेकिन इन्हें पहचान मिली 1945 में महल फिल्म के गीत... ‘आयेगा आनेवाला’, से फिर इन्होंने पीछे पलटकर नहीं देखा और एक से बढ़कर एक गीत गाए ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इन्होंने इस दौर के प्रमुख संगीतकार मदन मोहन, सलिल चौधरी, एस.डी. बर्मन, नौशाद, आर.डी.बर्मन, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल से लेकर वर्तमान के संगीतकार अनु मलिक, जतिन ललित, ए.आर.रहमान, नदीम श्रवण के साथ गीत गाये हैं । लगभग सात दशक तक २० भाषाओं में ४० हजार गीत गाकर इन्होंने एक अलग कीर्तिमान स्थापित कर लिया है । कहा जाता है कि अपने समय की मशहूर नायिका मधुबाला लता जी के गायिकी की इतनी दीवानी थीं कि अपने फिल्म डॉयरेक्टर से कांटेक्ट में लिखवाती थी कि लता जी ही मेरे लिए गायेंगी । लता जी ने पुणे में अपने पिता के नाम से हॉस्पिटल बनवा रखा है, और वर्तमान में एक और कैंसर अस्पताल बनवा रही हैं जहाँ गरीबों का कम फीस पर इलाज किया जाता है । इससे पता चलता है कि लता जी समाज सेविका भी हैं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;फिल्मी जगत का शायद ही कोई पुरस्कार है, जो इन्हें ना मिला हो, इन्हें नेशनल पुरस्कार, फिल्मफेयर पुरस्कार, पद्‌म भूषण पुरस्कार, दादा साहेब फालके पुरस्कार, भारत रत्‍न, महाराष्ट्र रत्‍न, राजीव गाँधी पुरस्कार, लाईफ टाईम अचीवमेंट पुरस्कार, गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में सबसे ज्यादा गीत गाने के लिए नाम रेकॉर्ड, आदि तमाम पुरस्कार इनको मिल चुके हैं । गायकी को अपना जीवन समझने वाली लता जी आज भी गाये जा रहे गानों में अपनी आवाज दे रही हैं । अभी हाल ही में इन्होंने ‘जेल’ एवं ‘रब ने बना दी जोड़ी’ के लिए अपनी आवाज दी और उम्मीद है कि आगे भी गाती रहेंगी ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लता जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ.......................।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-610395982146871801?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/610395982146871801/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/09/81.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/610395982146871801'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/610395982146871801'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/09/81.html' title='सुर साम्राज्ञी की 81 वीं सालगिरह'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TKDgPKBZKOI/AAAAAAAAAMw/rMHlrx6q2gc/s72-c/lata+ji.JPG' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-7594840782113060308</id><published>2010-09-24T06:16:00.000-07:00</published><updated>2010-09-24T06:17:38.506-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='-ज्ञान दीपक दुबे'/><title type='text'>जीवन एक अनंत धरातल</title><content type='html'>जीवन एक अनंत धरातल&lt;br /&gt;हम है इसका एक छोटा तल&lt;br /&gt;कभी है अवतल कभी है उत्तल&lt;br /&gt;कभी अभिन्न इसी सा समतल&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जीवन एक अनंत धरातल&lt;br /&gt;कभी बहुत आनंद समेटे&lt;br /&gt;कभी दर्द की आहट लेके&lt;br /&gt;आता जाता आज और कल&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जीवन एक अनंत धरातल&lt;br /&gt;जो बिक जाये दाम उसीका&lt;br /&gt;झूठा जो है नाम उसीका&lt;br /&gt;जो न बिका बेकार है यहाँ&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मिथ्या सब संसार है यहाँ&lt;br /&gt;क्या ये सूखे सूखे उपवन&lt;br /&gt;क्या ये बहती नदिया कल-कल&lt;br /&gt;जीवन एक अनंत धरातल&lt;br /&gt;जीवन एक अनंत धरातल&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-7594840782113060308?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/7594840782113060308/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/09/blog-post_24.html#comment-form' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/7594840782113060308'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/7594840782113060308'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/09/blog-post_24.html' title='जीवन एक अनंत धरातल'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-4362166967092575122</id><published>2010-09-22T03:43:00.000-07:00</published><updated>2010-09-22T03:52:37.425-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='- मुकेश पाण्डेय'/><title type='text'>किसका वजूद कितना पक्‍का राममंदिर या बाबरी मस्जिद का?</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TJnfLURDGeI/AAAAAAAAAMY/grEtvxRgHYI/s1600/rammandir.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 200px; height: 143px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TJnfLURDGeI/AAAAAAAAAMY/grEtvxRgHYI/s200/rammandir.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5519688203831024098" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;एक बार फिर से हमारा देश भारत अपने आप को इतने विकास और उत्थान के बावजूद भी भावनात्मक विवादों की लड़ाइयों के आगे अपने आप को उबार नहीं सकेगा ?&lt;br /&gt;क्योंकि यह एक ऐसा मुद्दा है, जिसमें कुछ भी टिप्पणी करना आसान नहीं होगा । हम आज जिस फैसले का इंतजार कर रहे हैं, वो वास्तव में क्या दोनों के वजूद को साबित करने के लिए पुख्ता है? अगर नहीं तो ऐसे मामले न्यायालयों में या संगठनों के सहयोग या सलाह से नहीं सुलझाए जा सकते?&lt;br /&gt;सबसे बड़ा सवाल इस मुद्दे का यह है कि अयोध्या का नाम अगर आज भी अयोध्या है, तो वह एक इत्तफ़ाक नहीं हो सकता । अगर वास्तव में बाबर ने वहां मंदिर न तोड़कर वहां मस्जिद का नये रूप से निर्माण करवाया तो उस पर विवाद कैसा? अगर उस मस्जिद पर विवाद है? तो और मस्जिदों और मंदिरों पर क्यूं नहीं?&lt;br /&gt;आज सब लोग जो चाहें हिन्दू सम्प्रदाय से जुड़े हों या मुस्लिम समुदाय से, इन सब चीजों को मुद्दा बनाना महज एक समुदाय का दूसरे समुदाय के प्रति घृणा पैदा करना है, न कि किसी का हित सोचना क्योंकि न तो हिन्दू समुदाय के हितकारी उसे मंदिर ही बनने देना चाहते न ही मुस्लिम समुदाय के वादी प्रतिवादी उसे मस्जिद ही रहने देना चाहते हैं ।  सबसे बड़ा प्रश्न यह भी है, कि हम आज भी इतिहास को कुरेदने की कोशिशों में लगे हुए हैं, जिससे भारतीय हमेशा आहत हुए हैं । &lt;br /&gt;हमारे ही कुछ लोग इस मुद्दे को हिन्दू और मुसलमानों के वजूद की लड़ाई से भी जोड़ने का प्रयास करते हैं, क्योंकि ये वो भली-भाँति जानते हैं, कि अगर हम इसे संप्रदाय से जोड़ते हैं तो हमारा लाभ अवश्य निकल आयेगा । &lt;br /&gt;बात वजूद की निकली है, तो किसका वजूद कितना पक्‍का है आप स्वयं इसका आंकलन कर सकते हैं? क्योंकि भारत जब मुगलों के द्वारा आहत हुआ तो न जाने कितने मंदिर टूटे होंगे, कितनी मस्जिदें बनी होंगी, पर उनमें से केवल अयोध्या में ही किसी मस्जिद का नाम बाबरी मस्जिद क्यूं है? अगर भारत का इतिहास और इतिहासकार इस बात की पुष्टि करते हैं, कि पहले मुगल भारत पर आक्रमण करने आये । और न जाने कितनी बार यहां के लोगों पर अत्याचार किया और इसे बार-बार लूटा । उन सारे मुगलों का एक ही मकसद था लूटना और यहां से धन चुराकर अपने प्रदेश वापस चले जाना । परन्तु इतिहास के पन्‍नों में बाबर एक ऐसा हमलावरी था जिसने अपना साम्राज्य यहां स्थापित किया । जिससे एक बात तो स्पष्ट हो ही चुकी कि वजूद पुराना बाबर का है, या भारत का? &lt;br /&gt;उस भारत का जहां की सभ्यता दुनिया के अन्य देशों से काफी विकसित थी । उस भारत का जहां न कोई सम्प्रदाय हुआ करता था, न ही आपसी कोई टकराव । मुगलों से पहले का भारत और मुगलों के बाद का भारत काफी बदल चुका था । क्योंकि उससे पहले न कोई धर्म परिवर्तन ही हुआ था ना ही मस्जिदें तोड़कर मंदिर ही बने थे । हां ऐसा अवश्य होता था कि राम और रहीम सबके दिलों में होते थे न कोई राम और रहीम को अलग समझा, न ही रहीम या राम के नाम पर ईर्ष्या की । &lt;br /&gt;हम सब जानते हैं, पूरी दुनिया जानती है, कि अयोध्या राम की जन्म भूमि थी, और है । परन्तु इस तथ्य का न ही कोई सबूत है, न ही दिया जा सकता है? इस बात से मुस्लिम समुदाय जो इस मुद्दे में प्रतिवादी और वादी के रूप मे न्यायालयों में गुहार लगा रहे हैं, वह भी इस बात से इनकर नहीं करते कि अयोध्या ही राम की जन्मभूमि है, और आज की तारीख में अयोध्या ही दुनिया का एक मात्र ऐसा नगर है, जहां हर घर में राम-जानकी का मंदिर है । &lt;br /&gt;तो एक बात और स्पष्ट हो ही जाती है कि अयोध्या में मंदिर था या नहीं? हाँ विवाद यह है, जिसमें हिन्दू समुदाय बाबरी मस्जिद को ही राम मंदिर मानते हैं और उनके अनुसार प्राचीन राम मंदिर को तोड़कर बाबर ने बाबरी मस्जिद का प्रारूप दिया था, जबकि मुस्लिम समुदाय इस बात को मानने से बिल्कुल इन्कार करते हैं । तथा वो इस मस्जिद के बारे में यह बताते हैं, कि बाबरी मस्जिद का निर्माण बाबर ने नये रूप से खाली जगह में कराया था । जहां पर कोई भी मंदिर नहीं था । ना ही कोई मंदिर तोड़कर उसे मस्जिद बनाया गया । &lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TJnfW9-qsKI/AAAAAAAAAMg/Qx4g-DXFsBI/s1600/15-babri-masjid-demolition200.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 200px; height: 150px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TJnfW9-qsKI/AAAAAAAAAMg/Qx4g-DXFsBI/s200/15-babri-masjid-demolition200.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5519688404006776994" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;अगर विवाद के इतिहास पर नजर डालें तो इसको ६१ साल लगभग हो चुके हैं । विवाद की शुरूआत २२-२३ दिसम्बर १९४९ से हुई थी, जिसके तहत मस्जिद के अंदर चोरी छिपे मूर्तियां रखने से कथित तौर पर हुआ । और अब यह मुद्दा काफी तूल पकड़ चुका है, जिसका निर्णय उच्च न्यायालय के हाथ में है । अगर देखा जाय तो दर्जनों वाद बिंदुओं पर फैसला आना है, लेकिन मुख्य मुद्दा ये है, कि वहां पहले राम मंदिर था या बाबर ने मस्जिद रिक्‍त जगह में बनवायी थी । &lt;br /&gt;बाबरी मस्जिद और विवादित घटना क्रम ः &lt;br /&gt;१ * मस्जिद के अन्दर मूर्तियां रखने का मुकदमा पुलिस ने अपनी तरफ से करवाया जिसकी वजह से २९ दिसम्बर १९४९ में मस्जिद के कुर्की के बाद ताला लगा दिया गया और तत्कालीन नगरपालिका अध्यक्ष प्रिय दत्त राम के देख-रेख में मूर्तियों की पूजा की जिम्मेदारी दे दी गयी । &lt;br /&gt;२ * १६ जनवरी १९५० में हिंदू महासभा के कार्यकारी गोपाल सिंह विशारद ने मूर्तियों की पूजा के लिए सिविल कोर्ट में अर्जी दायर की जिसके फलस्वरूप सिविल कोर्ट ने पूजा आदि के लिए रिसीवर व्यवस्था बहाल रखी । &lt;br /&gt;३ * १९५९ में निर्मोही अखाड़ा ने अदालत में तीसरा मुकदमा दर्ज किया जिसमें कोर्ट से यह अपील थी कि उस स्थान पर हमेशा से राम जन्म स्थान मंदिर था, और वह निर्मोही अखाड़ा की संपत्ति है । &lt;br /&gt;४ * १९६१ में सुन्‍नी बम्फ बोर्ड और कुछ स्थानीय मुसलमानों ने चौथा मुकदमा दायर किया जिसमें यह जिक्र था कि बाबर ने १५२८ में यह मस्जिद बनवायी जो १९४९, २२/२३ दिसम्बर तक यहां नमाज अदा किया गया है । &lt;br /&gt;५ * मुस्लिम पक्ष का तर्क यह था कि निर्मोही अखाड़ा ने १८८५ के अपने मुकदमे में केवल राम चबूतरे का दावा किया था न कि मस्जिद पर जिससे मुस्लिम पक्ष राम चबूतरे पर हिंदुओं के कब्जे और दावे को स्वीकार करता है । &lt;br /&gt;६ * और मुस्लिम पक्ष यह भी मानता है कि अयोध्या राम की जन्मभूमि भी है । परन्तु बाबरी मस्जिद खाली जगह पर बनायी गयी थी न की तोड़कर ।&lt;br /&gt;७ * लगभग ४० सालों तक यह विवाद लखनऊ तक ही था, परन्तु १९८४ में विश्‍व हिन्दू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहयोग से राम जन्मभूमि मुक्‍ति यज्ञ समिति ने इसे राष्ट्रीय मंच पर एक अभियान की तरह ला खड़ा किया । &lt;br /&gt;८ * १९८६ में स्थानीय वकील उमेश चन्द्र पाण्डेय की दरख्वास्त पर जिला जज फैजाबाद के.एम. पाण्डेय ने विवादित परिसर खोलने को एकतरफा आदेश दे दिया, जिसकी तीखी प्रतिक्रिया मुस्लिम समुदाय के तरफ से हुई । &lt;br /&gt;९ * फरवरी १९८६ में बावरी मस्जिद संघर्ष समिति का गठन हुआ और मुस्लिम समुदाय ने संघर्ष शुरू कर दिया । &lt;br /&gt;१० * १९८९ में राजीव गाँधी ने चुनावी रैली को संबोधित किया जिसमें उन्होंने वहां की जनता को फिर से रामराज्य के सपने दिखाये । उसी समय विश्‍व हिन्दू परिषद ने वहां मंदिर का शिलान्यास भी कराया । &lt;br /&gt;११ * ९० के दशक में यह मुद्दा राजनीतिक मोड़ ले चुका था जिसमें राजीव गाँधी ने तथा अन्य पार्टियां जैसे भारतीय जनता पार्टी ने भी इसे राजनीतिक हवा देने की कोशिश की । &lt;br /&gt;१२ * १९९० में कुछ राम भक्‍तों ने मस्जिद पर धावा भी बोला जिससे मस्जिद कुछ आहत भी हुआ । &lt;br /&gt;१३ *  ६ दिसंबर १९९२ में देशव्यापी हिंन्दुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया तथा मस्जिद के गुबंद को ध्वस्त कर दिया, जिसके फलस्वरूप जगह-जगह पर दंगे हुए, जिसमें काफी लोग मारे भी गये । &lt;br /&gt;१४ *  २००२ में एक बार फिर से देशव्यापी कार सेवकों ने अयोध्या चलो आंदोलन के तहत भाग लिया । परन्तु साधन व्यवस्था और सरकार के प्रयास से अयोध्या में कोई विवाद नहीं हुआ लेकिन गुजरात की तरफ लौटने वाले कार सेवकों को मुस्लिम समुदाय के हमले का शिकार होना पड़ा । &lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TJnffEkBWAI/AAAAAAAAAMo/7vci4qp61OE/s1600/liberhan-committee-report.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 200px; height: 128px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TJnffEkBWAI/AAAAAAAAAMo/7vci4qp61OE/s200/liberhan-committee-report.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5519688543213017090" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;इन सारी घटनाओं से यही निष्कर्ष निकलता है, कि यह मुद्दा न तो ६१ साल पुराना है, न ही किसी समुदाय के पक्ष का न ही विपक्ष का और ना ही किसी का वजूद ही पक्‍का होना है । हां एक बात तो अवश्य तय है, कि निर्णय किसी के भी पक्ष में क्यों न जाये, इसे न तो वहां मस्जिद बनना है, न ही मंदिर । &lt;br /&gt;क्योंकि अगर फैसला मस्जिद के पक्ष में जाता है, तो हिन्दू समुदाय उस फैसले को स्वीकार नहीं करेगा, और अगर फैसला हिंदू समुदाय के पक्ष में जाता है, तो मुस्लिम समुदाय उसे नहीं स्वीकार करेगा । क्योंकि ये ऐसे मुद्दे हैं जिसका फैसला वहां के लोग करेंगे, इस देश की जनता करेगी, और जनता सिर्फ शांति चाहती है । न तो वह दंगा चाहती है, न ही एक समुदाय का दूसरे समुदाय से घृणा ही जानती है । और हम तो उस देश के रहने वाले हैं, जहां पर हमारे लिए प्रेम ही सबकुछ है? हम उस मंदिर और मस्जिद के लिए क्यों लड़ें, जो हमारे अपनों के ही कब्र के ऊपर बनी हो? हम ऐसे उस राम और रहीम को उन मंदिर मस्जिदों से मुक्‍त कर देना चाहते हैं, जो कि विवादित ढांचों में बसते हैं । &lt;br /&gt;हम उस राम, रहीम को अपने हर भाईयों के हृदय में देखना चाहते हैं, जहां एक ही हृदय में मंहिर भी हो, मस्जिद भी, गिरजा घर और गुरूद्वारा भी-&lt;br /&gt;क्योंकि मंदिर और मस्जिद का वजूद हमारे और आपसे है । हम रहेंगे तो मंदिर में भी नमाज अदा कर लेंगे, हम रहेंगे तो मस्जिद में भी दीप जला लेंगे और हमारे राम रहीम भी तो यही कहते हैं-&lt;br /&gt;        “मोको कहाँ ढूंढ़े है बंदे, मैं तो मेरे पास में.........”&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-4362166967092575122?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/4362166967092575122/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/09/blog-post_22.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/4362166967092575122'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/4362166967092575122'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/09/blog-post_22.html' title='किसका वजूद कितना पक्‍का राममंदिर या बाबरी मस्जिद का?'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TJnfLURDGeI/AAAAAAAAAMY/grEtvxRgHYI/s72-c/rammandir.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-7586208170736814225</id><published>2010-09-21T21:12:00.000-07:00</published><updated>2010-09-21T21:18:35.264-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='डॉक्टर राजीव श्रीवास्तवा'/><title type='text'>उद्‍घाटन से पहले टूटा पुल</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/_VEhYW2EDUeM/TJmDbglp0YI/AAAAAAAAAAo/-bcyLfxyDN4/s1600/ja21Sep1285073067_storyimage.jpg"&gt;&lt;img style="float: right; margin: 0pt 0pt 10px 10px; cursor: pointer; width: 320px; height: 228px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_VEhYW2EDUeM/TJmDbglp0YI/AAAAAAAAAAo/-bcyLfxyDN4/s320/ja21Sep1285073067_storyimage.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5519587326946824578" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;span id="ctl00_lbltext" class="txt" style="width: 100%;font-size:14px;" &gt;&lt;div style="margin-left: 60px;"&gt;       उद्‍घाटन से पहले टूटा पुल&lt;br /&gt;  लाखों का निकला टेंडर और जेबें हो गयीं फुल&lt;br /&gt;  उद्‍घाटन से पहले देखो टूट गया था पुल&lt;br /&gt;    जनता के मेहनत की कमा‌ई इस पुल में हु‌ई बर्बाद&lt;br /&gt;    पर किसी के घर बन गये को‌ई हु‌आ आबाद&lt;br /&gt;    &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;    &lt;/span&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span id="ctl00_lbltext" class="txt" style="width: 100%;font-size:14px;" &gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span id="ctl00_lbltext" class="txt" style="width: 100%;font-size:14px;" &gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;span id="ctl00_lbltext" class="txt" style="width: 100%;font-size:14px;" &gt;        &lt;div style="margin-left: 300px;"&gt;       पुल से नदी पार करने का सपना मन में थे संजो‌ए&lt;br /&gt;  सोच रहे थे उनकी ख़ुशियों को किनकी लग ग‌ई हा‌ए&lt;br /&gt;    नहीं पता इन्हें की क्या टूटे पुल की कहानी&lt;br /&gt;    घटिया सा सामान लगाया खूब करी मनमानी&lt;br /&gt;    &lt;/div&gt;&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;     &lt;div style="margin-left: 60px;"&gt;       पुल से ज़्यादा इनको चिंता कमीशन की सता‌ई&lt;br /&gt;    सोच रहे थे ज़्यादा से ज़्यादा इससे करो कमा‌ई&lt;br /&gt;  बना के तैयार कर दी इन्होंने जिंदा लाश&lt;br /&gt;  पैसे देकर आका‌ओं से पुल कराया पास&lt;br /&gt;     &lt;/div&gt;&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;     &lt;div style="margin-left: 300px;"&gt;       सजी खूब महफ़िल थी उस दिन हा‌उस हु‌आ था फुल&lt;br /&gt;  नेता जी फीता काटें उससे पहले टूटा पुल&lt;br /&gt;  सभी के सपने ऐसे टूटे जैसे टूटे काँच&lt;br /&gt;  नेता जी कह के चल दि‌ए की कराओ इसकी जाँच&lt;br /&gt;  जनता को दे जाँच का लॉलीपाप मामला किया था गुल&lt;br /&gt;  देशद्रोही फिर मिल बैठे बनाने को नया पुल&lt;br /&gt;  सोच रहा राजीव की ऊपर वाले ने किया एहसान&lt;br /&gt;  जो पुल टूटता बाद में तो जाती कितनी जान&lt;br /&gt;     &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;    &lt;/span&gt;&lt;input id="gwProxy" type="hidden"&gt;&lt;!--Session data--&gt;&lt;input onclick="if(typeof(jsCall)=='function'){jsCall();}else{setTimeout('jsCall()',500);}" id="jsProxy" type="hidden"&gt;&lt;div id="refHTML"&gt;&lt;/div&gt;&lt;input id="gwProxy" type="hidden"&gt;&lt;!--Session data--&gt;&lt;input onclick="if(typeof(jsCall)=='function'){jsCall();}else{setTimeout('jsCall()',500);}" id="jsProxy" type="hidden"&gt;&lt;div id="refHTML"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-7586208170736814225?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/7586208170736814225/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/09/blog-post_21.html#comment-form' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/7586208170736814225'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/7586208170736814225'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/09/blog-post_21.html' title='उद्‍घाटन से पहले टूटा पुल'/><author><name>Kiran Mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02634264612836390123</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_VEhYW2EDUeM/TJmDbglp0YI/AAAAAAAAAAo/-bcyLfxyDN4/s72-c/ja21Sep1285073067_storyimage.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-2773572343773141881</id><published>2010-09-20T03:06:00.000-07:00</published><updated>2010-09-20T03:20:07.016-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='- सुरेन्द्र अग्निहोत्री'/><title type='text'>मनरेगा नहीं, धनरेगा कहिए जनाब !</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TJczMKJ7F8I/AAAAAAAAAME/r48UuRKWUMw/s1600/100_1075.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 240px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TJczMKJ7F8I/AAAAAAAAAME/r48UuRKWUMw/s320/100_1075.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5518936152343254978" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;केन्द्र सरकार की एक अति महत्वाकांक्षी योजना जो कि गाँवों के उन गरीबों व असहायों के लिए चलायी जा रही है जिन्हें घर व गाँव छोड़कर रोजी-रोटी के लिए सुदूर किसी शहर में जाना पड़ता है । गाँव के इन जरूरतमन्दों को शहर न जाना पड़े और गाँव में ही काम मिल जाये, यही सोचकर यह योजना नरेगा जिसे अब मनरेगा के नाम से जाना जाता है, केन्द्र सरकार ने महात्मा गाँधी राष्ट्रीय रोजगार को बड़े ही कुशलता के साथ चलाने का संकल्प लिया, लेकिन मनरेगा राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र सुल्तानपुर जनपद में धनरेगा बन गयी है । बात अगर सिर्फ जमओं ब्लाक की करें तो कोई ऐसा आदर्श तालाब किसी भी ग्राम सभा में नहीं बना जिसे हम आदर्श कह सकें, आदर्श की मिसाल कायम करने के लिए जो भी मानक दिये गये हैं, उनकी परवाह न करते हुए पहले से ही बड़े गड्‌ढे का रूप पाये उन जगहों को आदर्श तालाब बनाने का प्रयास किया गया है, जो कि पचास प्रतिशत पहले ही तालाब को कुछ परिश्रम करवाकर मनरेगा का धनरेगा करके कागजों पर पूरे मानक के साथ आदर्श तालाब बनवाये जा रहे हैं या बन गये हैं । जिम्मेदार पदों पर बैठे कुछ चन्द लोग जिसे प्रदेश व गाँवों के विकास का जिम्मा दिया गया । जिन्हें हम विकास की रीढ़ भी कह सकते हैं ये चन्द लोग अपने-अपने कमीशन के चक्‍कर में मनरेगा का धनरेगा करवाने में कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं । प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने में मात्र कुछ माह ही शेष है । उसके बावजूद अभी बहुत सारे तालाबों का कार्य शुरू ही हुआ है । बारिश का आगाज भी हो गया है । बारिश आ जाने पर कैसे पूरा होगा ये आदर्श तालाब इन अधूरे नव निर्मित तालाबों के बारे में जानकारी करने पर जानकार सूत्र कहते हैं कि लोग बरसात का इंतजार कर रहे हैं । जिससे बरसात का पानी तालाबों में भर जायेगा और मानक पूरा मनरेगा का धनरेगा करने में आसानी होगी । &lt;br /&gt;ज्यादातर तालाब अपनी जुबानी ही अपनी दास्ताँ बयां कर देंगे और यह साबित हो जायेगा कि मनरेगा का धन कैसे उड़ाया जा रहा है । तालाबों की बैरीकेटिंग भी इस हिसाब से की गयी है कि रेडीमेड पोल जो कि खड़े होने की जगह पड़े हैं देखने लायक है । कहीं-कहीं ईंटों की बेन्च भी टूटी पड़ी है और तालाबों में पानी की जगह अगर दिखायी पड़ सकती है तो उन मजदूरों के पसीनों की बूँदें जिसे सिर्फ अनुभव करके देखा जा सकता है । &lt;br /&gt;केन्द्रीय जांच टीम ने कई ग्रामों के दौरे का निरीक्षण कर इस योजना के तहत हुए कार्यों का खुलासा किया । मजदूरों की मजदूरी में भी घोटाला किया जा रहा हैं यह आरोप किसान संग्राम समिति के नेतृत्व में ग्राम पंचायत भादर विकास खण्ड दूबेपुर के नरेगा मजदूरों की मजदूरी का उचित भुगतान न किये जाने के विरोध में तिकोनिया पार्क में चलाया गया है । समिति के महामंत्री विजय कुमार भारती ने मुख्य विकास अधिकारी को मांग पत्र देकर अवगत कराया है कि ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत अधिकारी भादा ने द्वेष भावना से मजदूरों के मजदूरी का भुगतान में भारी अनियमितता बरती है । मॉडल तालाब का निर्माण में लगभग 80-100 मजदूरों ने रोजाना दिहाड़ी पर आठ घंटा प्रतिदिन कार्य किया जिसमें 14 दिन का भुगतान 71.95 प्रतिदिन की दर से 21 दिन का भुगतान 47.00 प्रतिदिन की दर व 17 दिन का भुगतान 29 रू० प्रतिदिन की दर से किया गया और 3 दिन का कोई भुगतान नहीं दिया गया । कानपुर देहात में आदर्श तालाब योजना में भी भारी गड़बड़ी पकड़ में आयी है । मानकों को दरकिनार कर निर्माण में लाखों का गोलमाल किया गया है । ताल के किनारे लोहे की बेंच बनवाई गयी । &lt;br /&gt;लोहा कानपुर की एक फर्म से बिना कोटेशन के ऊंचे दामों पर खरीदा गया ! उसका वजन क्या था? किसके आदेश से ऐसा किया गया? और लोहे की बेंच की आवश्यकता क्यों महसूस हुई? यही नहीं, एक ही तालाब का इस्टीमेट बार-बार बढ़ाया गया । वर्ष 2007-08 में जिसकी लागत 1.95 लाख थी उसे 2009-10 में 6.75 लाख में पूरा किया गया । यह तथ्य मनरेगा को राज्य स्तरीय रोजगार गारंटी परिषद के सदस्य संजय दीक्षित की शिकायत पर राज्य सरकार के आदेश से हुई हैं रिपोर्ट शासन को सौंपी जा चुकी है लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है । रिपोर्ट में कहा गया है कि सीडीओ जसवंत सिंह ने दबाव डालकर कई बीडीओ तथा अधीनस्थ अधिकारियों को अधिक कीमत पर लोहे की बेंच तथा अन्य सामाग्री खरीदने को मजबूर किया । विरोध करने पर करियर बर्बाद करने तक की धमकी दी गयी । जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि सरवन खेड़ा के मोहाना एवं जसौरा गांवों में आज भी मनरेगा के पैसे की बर्बादी देखी जा सकती है । रसूलाबाद में भी तमाम उदाहरण मिल जायेंगे जहां घपले ही घपले हैं ।&lt;br /&gt;मनरेगा के तहत हो रहे कार्यों में धांधली बदस्तूत जारी है, जबकि केन्द्र सरकार से लेकर राज्य सरकार द्वारा योजना निगरानी में रखे हुये है । इस योजना के लिये विशेषकर प्रदेश में राज्य स्तरीय मनरेगा निगरानी कमेटी की नियुक्‍ति की गयी । लेकिन हाल ही में केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय मनरेगा मानीटरिंग टीम के तहत हुयी जांच से चन्दौली और मिर्जापुर जिले से मनरेगा से जुड़े जो तथ्य सामने निकल कर आया है उसने प्रदेश मनरेगा निगरानी कमेटी पर ही प्रश्न चिन्ह लगा दिया हैं प्रदेश के मुख्यमंत्री मायावती के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद प्रधानों के घर में जॉब कार्डों की थोक में उपलब्धता ये बताती है कि मुख्यमंत्री के आदेश का कोई असर नहीं है । ग्राम पंचायत बनौली जनपद मिर्जापुर । बनौली की ग्राम प्रधान इन्द्रावती देवी जिनके पति गणेश आचार्य जिनका बसपा से नाता है । उन्हीं के द्वारा ग्राम प्रधान के सारे कार्य संचालित होते हैं । मानीटरिंग टीम के सदस्यों ने जांच के दौरान ग्राम प्रधान के घर से सैकड़ों जॉबकार्ड जब्त किये । कुछ कार्ड ऐसे भी थे जो एक ही व्यक्‍ति के नाम पर दो दो कार्ड बनाये गये थे । मजे की बात यह है कि इस ग्राम पंचायत की अनियमितता की शिकायत मिर्जापुर के सभी अधिकारियों के संज्ञान में होते हुये भी कोई कार्यवाही संबंधित लोगों के खिलाफ नहीं हुई । संभवतः सत्‍तासीन पार्टी नेता होने के वजह से ग्राम प्रधान जिलाधिकारी से लेकर ग्राम सचिव तक के ऊपर दबाव किये है जिससे लाखों शिकायतों के बावजूद किसी अधिकारी ने अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की है । &lt;br /&gt;बसही ग्राम पंचायत में भी मानीटरिंग टीम को तमाम गड़बड़ियां मिलीं जिनके बारे में ग्राम प्रधान आरती पाण्डेय कोई सही जवाब नही दे सकीं । जमालपुर विकास खण्ड के ग्राम पंचायती में मनरेगा के धन का मन मुताबिक दुरूपयोग हुआ । ग्राम बतीला व संघती गांव में जिला चन्दौली भी अपने मनमाफिक नियमों की धज्जियां उड़ाते अपनी मनमानी कर रहे हैं । कार्य बी०डीसी० इरफान करते हैं । बसिला में तालाब पर लाखों रूपये खर्च करने के बावजूद आमजन के लिये उपयोगी सिद्ध नहीं हो सका । इस गांव में तकरीबन डेढ़ वर्ष से जच्चा-बच्चा केन्द्र बनकर तैयार है और अब फर्श और दीवारें टूटने भी लगी हैं । लेकिन अभी तक उक्‍त केन्द्र को स्वास्थ्य विभाग को हस्तानांतरित नहीं किया गया है । इस बिल्डिंग का उपयोग गोबर के उपले रखने में हो रहा है । जॉबकार्ड को लेकर बसिला में जांच टीम को जमकर धांधली मिली इस गाँव में सारे जॉबकार्ड प्रधान व बी०डी०सी० के घर पर ही रहता है । मजदूरों को 100 दिन का काम नहीं मिलता । जॉब कार्ड धारकों में कुछ ऐसे हैं जिनको बगैर मजदूरी किये पैसा मिलता है । संधति गांव में भी निर्मला देवी महिला प्रधान हैं उनके पति सतीश चन्द्र केसरी चूँकि पूर्व ग्राम प्रधान रहे हैं, वही ग्राम प्रधान का सारा कार्यभार देखते हैं उनके कार्यकाल में मनरेगा के तहत विकास कार्यों में गड़बड़ियां पायी गयीं । जांच टीम ने बताया कि एक दिन पूर्व बिछाये गये खड़ंजे के अवलोकन में पाया गया कि खड़ंजे में घटिया ईंटों का प्रयोग किया गया है पदनामपुर का ग्राम प्रधान जो कि दंबग किस्म्‌, का है, ग्राम प्रधान ने अपनी गड़बड़ी छिपाने के लिये सी०डी०ओ०, बी०डी०ओ० के दबाव में उलटा जांच टीम पर पैसा मांगने का आरोप लगाते हुये थाने में तहरीर तक दे डाली । इस प्रकार के जांचों में पाये गये इन तथ्यों से मनरेगा की हकीकत का खुलासा स्पष्ट रूप से सामने आया । इस योजना के तहत किस तरह जिलों के ग्राम प्रधान सचिव से लेकर आला अधिकारियों तक मिलीभगत की कमीशनखोरी चल रही है, जिसकी निगरानी करने वाली निगरानी कमेटी व उसके अधिकारी कोई भी कार्यवाही नहीं कर पा रहे हैं । यही हाल सबके सभी जिलों में चल रहा है । शायद इसी धांधली की भनक निगरानी कमेटी व ग्राम विकास विभाग को लग नहीं पा रही है और भनक लग भी रही है तो कार्यवाही में कोताही हो रही है जिससे निचले स्तर पर पदाधिकारी बिना डर के मनमुताबिक मनरेगा संबंध में जांच टीम ने मनरेगा राज्य स्तरीय मानीटरिंग टीम को अपना आरोप पत्र सौंप दिया है ।  &lt;br /&gt;मनरेगा के नाम पर घपले का अंत नजर नहीं आ रहा है । कनवर्जन के नाम पर हेराफेरी । नियम है कि जिस विभाग में अपना बजट न हो वहां पर काम मनरेगा से कराया जाए, किन्तु यहां ऐसा नहीं है । विभाग में बजट होने के बावजूद मनरेगा से पैसा लेकर उसे निबटाने का मामला प्रकाश में आया । राज्य गुणवत्ता मानीटर कमेटी के अध्यक्ष विनोद भांकर चौबे ने जांच रिपार्ट में चौंकाने वाले तथ्य प्रकाश में लाये हैं । &lt;br /&gt;कानपुर देहात में 14 ऐसे विभागों को 15 मार्च 2010 तक के लिए 2.236 लाख की धनराशि मनरेगा से स्वीकृत की गयी जिनके पास अपना लाखों का बजट था । इसमें 796 लाख रूपये पहली किस्त में तथा बाकी अन्य तीन किस्तों में अवमुक्‍त किये गये । कई विकास खंडों में इस धनराशि का उपयोग मिट्‍टी की खोदाई आदर्श तालाबों के निर्माण, सड़क की भराई आदि में दिखाया गया जबकि स्थलीय निरीक्षण करने पर पता चला कि जहां पर मिट्‌टी का काम दिखाया गया है वहां किसी अन्य योजना में पहले से ही मिट्‌टी का काम हो चुका था । फर्जी मास्टर रोल दिखाकर 4 लाख 13 हजार की धनराशि हड़पने की रिपोर्ट में जिक्र किया गया है । कपराहट ब्लाक में जांच अधिकारी जब वहां पहुंचे तो विभिन्‍न तारीखों में मास्टर रोल पर पचास से अधिक मजदूर ऐसे दिखाये गये जिनका नाम पता फर्जी पाया गया किन्तु उनके नाम पर एक-एक महीने का पैसा निकला हुआ दिखाया गया । जांच अधिकारी ने इसमें 30 लाख से अधिक का घपला है । &lt;br /&gt;प्रदेश के ग्रामीण विकास मंत्री दद्‌दू प्रसाद के गृह जनपद चित्रकूट, कर्वी में मनरेगा के तहत घपले बाजी का आलम यह है कि कोई कुछ करे लेकिन उसके विरूद्ध कार्यवाही नहीं होती है यदि कभी कार्यवाही हुई तो बाद में लीपा पोती करके बचा दिया गया । जिसका परिणाम यह है कि घपलों पर घपले होते चले जा रहे हैं । मनरेगा चैकडेम में लग रही घटिया सामाग्री मामले में चित्रकूट के जिलाधिकारी ने गंभीरता से भले ही लेते हुये इसकी जांच हेतु अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग प्रखण्ड कर्वीभूमि संरक्षण अधिकारी रामगंगा कामण्ड व अपर अभियंता डी.आर.डी.ए. की टीम गठित की गयी । टीम द्वारा गत 30 अप्रैल को स्थानीय जांच की गयी जिसमें पाया गया कि विकास खण्ड मानिकपुर के अन्तर्गत मारकुण्डी रेन्ज किहुनियां वीट में एक पक्‍का चैकडेम का निर्माण हो रहा था । यह कार्य वित्तीय वर्ष 2009-10 का लागत धनराशि 2 लाख थी । क्षेत्राधिकारी मारकुण्डी वन्य जीव रेन्ज मारकुण्डी चित्रकूट मोनो पर प्राक्‍कलन के कार्य साथ उपस्थित रहे, संबंधित वन क्षेत्राधिकारी द्वारा उक्‍त कार्य से संबंधित ग्राम पुस्तिका, मास्टर रोल व व्यय बाउचर के संबंध में बताया कि प्राक्‍कलन आदि कैमूर रनेज मिर्जापुर कार्यालय में है । &lt;br /&gt;जांच में केस्ट की लम्बाई 10.15 मी०, केस्ट टाप की चौड़ाई 1.50 मी० विगवाल की लम्बाई 8.25 मी० विगवाल की चौड़ाई 0.70 मी० है । वन क्षेत्राधिकारी रानीपुर वन्य जीव विहार (सेंचुरी) ने कार्य का प्राक्‍कलन, व्यय बाउचर मौके पर नहीं दिखाये और न ही कार्य प्राक्‍कलन के अनुसार पाया गया । यह कार्य मनरेगा के द्वारा कराया गया कि जानकारी हुयी । विभाग के पास 36 लाख पड़ा है और डेढ़ करोड़ की मांग की गयी है । जब कि विभाग द्वारा पूर्व में कराये गये कार्यों का अभी तक सत्यापन नहीं कराया गया ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-2773572343773141881?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/2773572343773141881/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/09/blog-post_20.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/2773572343773141881'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/2773572343773141881'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/09/blog-post_20.html' title='मनरेगा नहीं, धनरेगा कहिए जनाब !'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TJczMKJ7F8I/AAAAAAAAAME/r48UuRKWUMw/s72-c/100_1075.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-3049480522264167095</id><published>2010-09-18T10:01:00.000-07:00</published><updated>2010-09-18T10:17:59.061-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='- अर्पना चन्देल'/><title type='text'>कश्मीर का दर्द</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TJTxYXtwI2I/AAAAAAAAALc/Bfh1rCyWgQk/s1600/body.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 200px; height: 136px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TJTxYXtwI2I/AAAAAAAAALc/Bfh1rCyWgQk/s200/body.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5518300844420768610" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बरसों से कह रहे हैं पर कोई सुनता ही नहीं &lt;br /&gt;लोग प्रदर्शन क्यों करते हैं? जवाब सरल है वे अपनी बात रखना चाहते हैं? लोग विरोध क्यों करते हैं? जाहिर है जब उनके साथ कुछ गलत होता है । घाटी के लोगों के साथ गलत भी हुआ और फिर किसी ने उनकी सुनी भी नहीं । जब वे हालात से मजबूर होकर सड़कों पर उतर आए तो उन्हें कुचलने की कोशिशें भी की गईं । ऐसे में आग भड़केगी नहीं तो क्या होगा? पर कश्मीर में आज जो ज्वाला दहक रही है उसकी चिंगारी तो दशकों पहले सुलग गई थी ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;महाराजा हरीसिंह के शासनकाल में कश्मीर की राजनीति में गहमागहमी मची हुई थी । बहुसंख्यक होने पर भी मुस्लिम समुदाय अत्याधिक पिछड़ा अनपढ़ और गरीब था । इन अन्याय को लेकर कहीं-कहीं से दबी हुई आवाजें उठने लगी थीं । इन आवाजों को बल मिला १९३० में शेख अब्दुला के सियासत की राजनीति में कदम रखने से । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पहले-पहल 1939 में लोगों का गुस्सा भड़का, जब उत्तर प्रदेश से आए कट्‌टरपंथी नेता अब्दुल कादिर ने श्रीनगर की जामा मस्जिद में भड़काऊ भाषण देते हुए लोगों को महाराजा के खिलाफ जेहाद छेड़ देने को कहा । इस एवज में उनको गिरफ्तार कर दिया गया । इस वाक्ये से महाराज की नींद खुली और इन्होंने रियासत के विभिन्‍न इलाकों से शेख अब्दुल्ला, मौलाना मसूद मौ० यूसुफ शाह समेद लोगों के १७ प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलाया । पर ये वार्ता विफल हो गई नतीजतन इन नेताओं ने लोगों से विद्रोह जारी रखने की अपील की । ये सब देखते हुए महाराज ने सभी १७ नेताओं को गिरफ्तार कर दिया । फिर क्या था लोग सड़कों पर उतर आए और लगातार १७ दिनों तक कश्मीर में जनजीवन ठप हो गया । आखिरकार मजबूर होकर सरकार को सभी नेताओं को रिहा करना पड़ा । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;13 जुलाई 1939 को कश्मीर की राजनीति हमेशा के लिए बदल गई । अब्दुल कादिर पर मुकदमे के दौरान भारी भीड़ ने श्रीनगर की सेंट्रल जेल पर धावा बोल दिया । भीड़ को खदेड़ने के लिए पुलिस ने गोलियां चलाना शुरू कर दिया, जिसमें 7 लोगों की जान चली गई । इन लोगों को दफन करते समय प्रदर्शन में और 10 लोग पुलिस की गोली का शिकार हुए । रातों-रात शेख कश्मीर के निर्विवादित नेता घोषित कर दिए गए । और घाटी में विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जोर पकड़ने लगा । 2 सितम्बर 1939 को महाराजा ने शेख को श्रीनगर के हरिप्रभात महल में कैद कर दिया । ये सब अभी थमा नहीं था कि भारत, पाकिस्तान की आज़ादी की खबरों के चलते घाटी में भी सरगर्मियाँ बढ़ने लगीं। भारत? पाकिस्तान? या फिर आजाद रियासत? इंडियन इंडिपेन्डस एक्ट १९४७ के तहत सभी ५६५ रजवाड़ों को भारत या पाकिस्तान में से किसी को चुनना था । उनके पास स्वतंत्र रहने का विकल्प नहीं था । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;महाराजा हरीसिंह पर दोनों तरफ से दबाव बन रहा था, पर हरी सिंह रियासत को आजाद रखने के हक में थे । इन्हीं पशोपेश के हालात में २२ अक्टूबर को पाकिस्तान ने लगभग १५ से २० हजार कबयाली भेजकर रियासत में घुसपैठ कर ली । मुज्जफराबाद पर कब्जा करने के बाद लोगों को मारते हुए ये कबायली घाटी के दूसरे हिस्सों की ओर बढ़ रहे थे । लोगों ने उनका जमकर विरोध किया । इस बीच नेता मकबूल शेरवानी और मास्टर अब्दुल अजीज जैसे लोग अपने लोगों को बचाते हुए शहीद हो गए । 26 अक्टूबर, 1947 को महाराजा ने जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिए । २७ को भारतीय फौजें कश्मीर पहुंची । युद्ध विराम के समय दक्षिण कश्मीर (मुज्जफराबाद) में पाक सेनाएं थीं । मामला UN पहुंचा तो जनमत (Plebicite) की बात उठी । रियासत के लोगों से वादा किया गया कि जनमत के जरिए उनके भाग्य का फैसला किया जाएगा । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तीन टुकड़ों में बंटा हुआ जम्मू कश्मीर - रियासत जम्मू-कश्मीर का कुल क्षेत्रफल 2, 22, 236 कि.मी. था, जिसमें से 78, 114 कि.मी पर पाकिस्तान का कब्जा है तो 42, 684 कि.मी. चीन ने हथिया लिया और बाकी 101, 448 कि.मी भारत के पास है । 18 अक्टूबर, 1949 को Article 370 पारित किया गया और राज्य को सदर-ए-रियासत का दर्जा दिया गया । &lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TJTzTS85QvI/AAAAAAAAAL0/-rj_5zx5sro/s1600/Kashmirkadard.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 149px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TJTzTS85QvI/AAAAAAAAAL0/-rj_5zx5sro/s320/Kashmirkadard.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5518302956266013426" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;9 अगस्त, 1953 को प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्ला को भारत के खिलाफ साजिश करने के लिए गिरफ्तार किया गया और उनकी जगह बख़्शी गुलाम मोहम्मद को प्रधानमंत्री बनाया गया । रियासत एक बार फिर से भड़क उठी । कश्मीर और डोडा के इलाकों में लोगों ने शेख के समर्थन में जबरदस्त हिंसक प्रदर्शन किए । जनमत की माँग जोर पकड़ने लगी और हवाओं का रूख भारत के खिलाफ होने लगा । पर धीरे-धीरे सब शांत हो गया और लम्बे समय तक इलाका शान्त और खुशहाल बना रहा । इसके बावजूद राज्य में पिछड़ापन, अशिक्षा, गरीबी, बेरोजगारी अभी भी कायम भी । 90 के दशक में पाकिस्तान ने इन्हीं कमजोरियों का फायदा उठतए हुए धर्मनिरपेक्ष कश्मीरियों का फायदा उठाते हुए धर्मनिरपेक्ष कश्मीरियों के जहन में कट्‌टरता और धर्म के प्रति जज्बे को सुलगाया और सेकड़ों युवकों को लाखों की नौकरियाँ दीं । काम था हथियार उठाना, जिसके लिए उन्हें सीमा पार कुछ महीनों की ट्रेनिंग दी जाती थी और इस तरह सक्रिय आतंकवादी तैयार किए गए । सौहार्द्र और भाईचारे की मिसाल कश्मीर में सब कुछ बदल गया । हजारों कश्मीरी पंडित रातों रात अपना सब कुछ छोड़ छाड़ घाटी से हमेशा के लिए पलायन कर गए । आतंकियों से निपटने के लिए घाटी में भारी सेना तैनात की गई । इसके बाद जो हुआ वे कश्मीरियों के लिए डरावने सपने से कम न था । सुरक्षा बल हर कश्मीरी को आतंकवादी की नजर से देखती थी तो आतंकियों से भी उन्हें रहम की कोई उम्मीद न थी । चारों तरफ से घिरा, कश्मीर हैरान सी हालात में था । कोई भी उसे समझने सुनने को तैयार नहीं । &lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TJT0Gbm5ZwI/AAAAAAAAAL8/KGBLa9ClqHo/s1600/crpf.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 200px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TJT0Gbm5ZwI/AAAAAAAAAL8/KGBLa9ClqHo/s320/crpf.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5518303834762995458" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;हाल ही में कश्मीर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का जायजा लेने के लिए जब मैंने कुछ घाटी वासियों से बात की तो उनका दर्द कुछ यूं बयां हुआ- &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;* हमें इंसान नहीं समझा जाता ः हर एक घाटीवासी को शक की निगाह से देखा जाता है । निर्दोष होने पर भी हमें गुनहगारों की तरफ ट्रीट किया जाता है । जब चाहे घर से उठा लिया, जब चाहे रास्ते पर ही थप्पड़ जड़ दिया, जब चाहे रिमांड, या फिर इन्टरोगेशन । हम परेशान हो गए हैं । अपने ही इलाके में उन लोगों के रहमों करम पर जी रहे हैं जो हमें इंसान ही नहीं समझते ।" * हम अपने लोग नहीं हैं न? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;* भारत की खाते हो, की ताने? हमें ताने दिए जाते हैं कि हम भारत की खाते हैं और उसी का विरोध करते हैं । फिर इतना खाने से हमारी सेहत क्यूं नहीं सुधरी, कहाँ है विकास? हमारे पास किसी भी चीज की कमी नहीं । सिंधु, चिनाब, जेहलम हमें जीवन देती है । हरे भरे जंगल सेब, लीची, बादाम, अखरोट, केसर दुनिया भर में मशहूर है, कालीन पशमीना दस्तकारी का कोई जवाब नहीं । फिर धरती के स्वर्ग में रहने वाले हम इतने गरीब क्यों हैं? है कोई जवाब? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;* अपने ही प्रदेश में बेगाने ः पीढ़ियों से कश्मीर में रहने वालों को बार-बार अपनी पहचान उन लोगों को देनी पड़ती है, जो जानते भी नहीं कि कश्मीर क्या है, कितना खराब लगता है जब घर से बाहर निकलते ही हमें रोज तलाशियों और इन्टरोगेशन झेलना पड़ता है । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;* मीडिया पर बैन ः जब लोकल टीवी चैनल और अखबारों ने हमारी आवाज को उठाना चाहा तो उनकी आवाज को भी दबा दिया गया । जब मीडिया जैसी शक्‍ति को दबाया जा सकता है, तो आम लोगों की बिशाख ही क्या है? यहां तक कि कम्यूनिकेशन सोर्सिस को भी सील किया जा रहा है ।संदेश भेजना भी बन्द कर दिया गया । घाटी में तो कई जारी मोबाइल भी ब्लाक है और इंटरनेट पर भी बंदिशें हैं । अगर सेना के लोग इन सबका उपयोग करते हैं तो इसका क्या मतलब वे बैन कर दी जाए । ताज-होटल पर हमले के लिए आतंकी किश्तियों में आए थे न फिर किश्तियों पर भी बैन लगा देना चाहिए न? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;* बेरहमी की हद जब किसी का बच्चा मरता है, तो उसको कैसे कहें कि वे चुप रहे यहाँ उनसे हमदर्दी से तो दूर गोलियों से बात की जाती है । और जब किसी बात की हद हो जाती है न तो लोग मजबूरी में सड़क पर उतर जाते हैं । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;* कोई नहीं सुनता कोई नहीं समझता ः कश्मीरियों को कोई भी अपना हितैशी नहीं लगता, क्योंकि नेता तो कभी भी खुले मन से उनका दुःख दर्द समझने नहीं आए । कोई हमारी समस्याओं पर गम्भीरता से विचार नहीं करता । आखिरकार हम अपनी जान पर खेलकर सड़कों पर न आएं तो क्या करें । जिल्लत की जिन्दगी से मौत भली । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लोगों से बात करने पर उनके करीबी हाल जानने पर मुझे तो एक बात साफ-साफ समझ आ रही है । प्रधानमंत्री चाहे कुछ भी करलें, जितनी कमेटियां बना लें, जितनी भी सेनाएं भिजवा लें, जितनी भी सर्वदलीय बैठकें बुलवां लें प्रदर्शनकारियों का गुस्सा शांत नहीं होने वाला । इस समस्या का एक ही हल है लोगों से सीधे बात करना । इस मीटिग में बेशक बिचौलियों को भी बुलाया जाए पर बात सीधा लोगों के साथ होनी चाहिए । जब तकलीफ लोगों को है तो उन्हें इस बारे में क्यूं नहीं पूछा जा रहा । गाँव-गाँव शहर-शहर जाकर प्रदर्शनकारियों से बात करनी होगी । जमीनी तौर पर लोगों से जुड़ना होगा । बैठकें बुलाओ, चौपालें बुलाओ, कुछ भी करो पर लोगों से जुड़ना होगा । कम्यूनिकेशन गैप की ये खाई बढ़ती जा रही है और कश्मीर समस्या की सबसे गहरी जड़ भी यही है । अगर सच में समस्या को सुलझाना है तो गंभीरता से मसले को लो और वहां के लोगों के लिए वक्‍त निकालो । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;--जय हिन्द, जय भारत&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-3049480522264167095?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/3049480522264167095/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/09/blog-post_18.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/3049480522264167095'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/3049480522264167095'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/09/blog-post_18.html' title='कश्मीर का दर्द'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/TJTxYXtwI2I/AAAAAAAAALc/Bfh1rCyWgQk/s72-c/body.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-6838944234229596454</id><published>2010-09-09T03:10:00.000-07:00</published><updated>2010-09-09T03:12:19.458-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चाँद खाँ रहमानी'/><title type='text'>अमन और शांति का संदेश देती ईद</title><content type='html'>मुसलमानों का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण त्यौहार है ईद ! ये त्यौहार आपसी भाई-चारे, प्यार, सद्‌भाव, अमन और शांति का संदेश देता है । ईद दुनिया भर में धूमधाम और उल्लास से मनाई जाती है । भारत जैसे देश में इसका और भी महत्व हैं क्योंकि यहां बहुभाषी, बहुधर्मी और तरह-तरह से पूजा करने वाले और अनेक भगवानों को मानने वाले लोग रहते हैं । इन सब के बीच सौहार्द्र का संदेश देती है ईद ।&lt;br /&gt;त्यौहार तो और भी मनाये जाते हैं लेकिन इसी त्यौहार का विशेष महत्व क्यों है? ईद से पहले रमजान का महीना होता है । इस महीने में खुदा की तरफ से रहमतों के द्वार खोल दिये जाते हैं । दो तरफ के दरवाजे बंद कर दिये जाते हैं और जन्‍नत के द्वार खोल दिये जाते हैं क्योंकि इस महीने में बुरे आचरण वाला मुसलमान भी खुदा से डरने लगता है और बुराई का रास्ता छोड़ मस्जिद की राह पकड़ लेता है । यानी जो मुसलमान कभी-कभी नमाज़ पढ़ते हैं वे भी मस्जिद जाने लगते हैं । रोजे इंद्रियों पर जीत का प्रतीक हैं । तमाम जटिलताओं और दुश्‍वारियों के बावजूद मुसलमान रोजे रखता है और ईद का इंतजार करता है । यह इंतजार ठीक उसी तरह होता है जैसे कोई छात्र साल भर की पढ़ाई के बाद अपने परीक्षा परिणाम का इंतजार करता है । जब उसे पता चलता है कि वह पास हो गया है तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता । इसी तरह मुसलमान ३० रोजे रखने के बाद ईद का इंतजार करता है । रोजे रखकर वह इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर चुका होता है और इस खुशी में वह ईद मनाता है ।&lt;br /&gt;आज के युग में ईद का महत्व और बढ़ जाता है क्योंकि आज लोगों के सामने भौतिकवादी चीजों की अपरम्पार है । सेक्सी वातावरण है । ऐसी तमाम जटिलताओं में पाक जीवन जीना आसान नहीं है । ईद की खुशी का एक कारण यह है कि मुसलमान अपनी हैसियत के अनुसार जकात्‌, फित्रा या खैरात देकर उन गरीब मुसलमानों को भी ईदखुशी में शामिल करता है जो पूरी तरह अयोग्य हैं, बेहद गरीब हैं । ऐसे गरीब लोग भी ईद पर खुशी मना लेते हैं और खुद को ईद की नमाज़ में बड़े लोगों के साथ खड़ा पाता है । हांलाकि किसी भी नमाज़ में छोटे, बड़े, अमीर, गरीब का फर्क नहीं होता, लेकिन ईद की खुशी अलग मायने रखती है । ईद की नमाज़ उस खुदा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना है जिसकी बदौलत उसने उसकी आज्ञा का पालन किया । मुझे याद किया और रोके रखा ।&lt;br /&gt;ईद और ईद के महीने का इसलिए भी महत्व है कि इसी महीने कुरान अवतरित हुआ था । पैगम्बर हज़रत मोहम्मद (सल०) के इस महीने और ईद को बहुत दिया था क्योंकि ईद पर गरीबों को खुशियां मनाने का मौका मिलता है । जो लोग साल भर तक दुश्मनी रखते हैं वे भी अपनी रंजिश भूलकर ईद पर गले मिल लेते हैं । इसलिए इसे प्यार और अमन का त्यौहार माना गया है । दर‍असल ईद का संदेश वही है जो इस्लाम का है । इस्लाम कहता है कि इंसानों के मार्गदर्शन का हक और इंसान के मालिक होने का हक केवल उसे हासिल है जिसने उसे पैदा किया है, जो सारे संसार का रब है । खुदा ही हर गलती से खाली और कमी से पाक है । खुदा में व्यक्‍तित्व हित नहीं है । इसलिए उसका मार्ग दर्शन हर कौम, देश और व्यक्‍ति के लिए समान रूप से हितकारी है । उसके मार्गदर्शन से ही जन्‍नत(स्वर्ग) की प्राप्ति संभव है ।&lt;br /&gt;जानकारों के अनुसार ईद २ मार्च ६२४ ई० यानी पहली शब्बाल सन २ हिजरी से लगातार मनाई जा रही है । ईद की सबसे पहले अल्लाह के आखिरी नबी हजरत मोहम्मद (स०) ने अपनी जान न्यौछावर करने वाले साथियों (सहाबियों) के साथ महीना मुनव्वरा से बाहर मनाई थी । उस समय आपकी उम्र ५२ साल ६ महीने और २० दिन थी । इब्ने हन्‍नान के अनुसार हिज़ात के दूसरे साल जब अल्लाह के रसूल मोहम्मद (स०) बद्र की लड़ाई में विजय प्राप्त करने के बाद मदीना तशरीफ लाये तो उसके आठ दिन बाद ईद मनाई गयी थी, क्योंकि रमजान के रोज़े उसी साल मुसलमानों पर फ़र्ज किये गये थे ।&lt;br /&gt;ईद के दिन अमीर ही नहीं गरीब भी नये कपड़े पहनते हैं । ईद मनाते हैं और खुदा का शुक्राना अदा करते हैं । ईद के दिन खुदा अपने बंदों की जायज मांगों को जरूर पूरा करता है ऐसा हर्दासों में आया है और मुसलमानों क अविश्‍वास भी है ।&lt;br /&gt;&lt;input id="gwProxy" type="hidden"&gt;&lt;!--Session data--&gt;&lt;input onclick="jsCall();" id="jsProxy" type="hidden"&gt;&lt;div id="refHTML"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-6838944234229596454?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/6838944234229596454/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/09/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/6838944234229596454'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/6838944234229596454'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/09/blog-post.html' title='अमन और शांति का संदेश देती ईद'/><author><name>Kiran Mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02634264612836390123</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-3982168274574512928</id><published>2010-08-25T06:30:00.000-07:00</published><updated>2010-08-25T06:31:48.085-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='- पं. कृष्णगोपाल मिश्र'/><title type='text'></title><content type='html'>भारत की आजादी से लेकर अब तक 64 वर्ष तक भारत और पाक के बीच कश्मीर एक ऐसा मुद्‌दा है, जिसमें दोनों ही देशों में अक्सर विवाद होता ही है, और लाख प्रयास के बावजूद भी इस मुद्दे का हल आज तक नहीं निकल पाया है । जनता चाहे जहां कही की क्यों ना हो हमेशा सुख शांति ही चाहती है । आम जनता को कभी भी राजनीति से बहुत ज्यादा लेना-देना नहीं होता, वर्तमान के राजनीतिज्ञों और अंग्रेजी हुकूमत में बहुत ज्यादा अंतर नहीं कहा जा सकता । क्योंकि अंग्रेजों की भी यही नीति रही है कि दो सम्प्रदायों एवं जातियों में फूट डालो और राजनीति करो ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वर्तमान राजनीतिज्ञ भी ऐसी ही स्थिति पैदा कर रहे है, और निजी स्वार्थवंश वहाँ की जनता में फूट पैदा कर रहे है । जिसका निःसंदेह पाकिस्तान शासन को फायदा मिलता है, और वहां आतंकवादी संगठनों को मजबूत होने का रास्ता मिलता है । यह जगजाहिर है कि इन आंतकी संगठनों के सक्रिय होने तथा हमेशा अशांति के माहौल के कारण कश्मीर विकास से वंचित है, और भारत का स्वर्ग कही जाने वाली यह जगह गरीबी, बेरोजगारी और लाचारी के कारण कभी आंतकियों के बहलावे का शिकार होती है तो कभी राजनीतिजों के बहकावे का । यह जगजाहिर है कि आय दिन आतंकवादी गतिविधियों को चलाने एवं कश्मीर की अशान्ति के पीछे आईएस‍आई का हाथ है, लेकिन कहते है, कि जब अपना ही सिक्‍का खोटा हो तो दूसरो से क्या उम्मीद करें, दूसरे तो इसका फायदा उठायेंगे ही । हमारे रहंनुमा राजनीतिज्ञ भी इस मुद्दे को लेकर बहुत ज्यादा संजीदा नहीं हो पाये, और ना ही कभी इस दिशा को हल करने के लिए संजीदगी से कदम उठायें । १५ अगस्त को लालकिले से प्रधानमंत्री ने भी कश्मीर मुद्दे पर चिंता जताते हुये कहा कि जम्मू-कश्मीर राज्य की सभी राजनीतिक पार्टियों के साथ बैठकर वह राज्य में जारी सभी राजनैतिक हिंसा को खत्म करने के लिए विचार करेंगे । लेकिन इन बातों से कभी भी कश्मीर का भला नही होना है, जब तक वहां की सरकार कोई कठोर कदम नही उठाती । और वहां के नागरिकों को डेरेक्ट सहायता नहीं देती ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सरकार वहां के नागरिकों को खास अहमियत देते हुये उन्हें हर सुविधा पहुंचाने का प्रयास करें, और साथ ही साथ हर क्षेत्र में एक अलग तरह का उनके विकास को प्रोसाहन दे या आरक्षण जैसा पैकेज दे, जिससे वहां के युवाओं में देश के प्रति अच्छी भावनाएं जागृत हो पाये, और वह इसी के भी बरगलाने में ना आये । तभी एक सही विकल्प साबित होगा , साथ ही बाहरी खराब आंतकी गतिविधियों से एंव राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से बचाने के लिए यहां अनुशासित व्यवस्था लागू करे ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसके साथ ही हमने इस अंक में देश की स्वाधीनता दिवस की महत्ता एंव उसके पीछे छुपी नई पीढ़ी के युवाओं की काफी बदलाव की भावनाओं को दर्शाने की कोशिश की है । हमने यह दिखाने की कोशिश की है, कि आज की नई पीढ़ी स्वतंत्रता को उन्मुक्‍ता समझते हुये मौज-मस्ती और स्वछंदता का दिन मानती है, जबकि स्वाधीनता का सही अभिप्राय तब सार्थक होगा, जब आज के युवाओं में स्वाधीनता को खुद की जिम्मेदारियों के प्रति अधीनता का अभिप्राय समझेंगे और जिन स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों पर हमें यह दिन नसीब हुआ है, उनकी गरिमा को बढाने के लिए कदम उठायेंगे । जो कि वर्तमान उन्मुक्‍त संस्कृति इन भावनाओं में विलुप्त होती जा रही है, आशा है कि अभी भी पुरानी संस्कृति को मानने वाले अभिभावक व बुजुर्ग नये बच्चों एवं युवकों में इस संस्कृति का फैलाव, एवं इस दिन का वास्तविक अर्थ समझाने का चलन अवश्य करेंगे । और ऐसा जब हो जायेगा तभी इस दिन की अहमियत साबित हो पायेगी ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आप सब को देश की 64 वर्षीय सफलता का सफर मुबारक हो । एक बार पुनः 64 वीं स्वतंत्रता दिवस की आपको हार्दिक शुभकामनायें ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जय हिन्द, जय भारत&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-3982168274574512928?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/3982168274574512928/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/08/64-64-64.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/3982168274574512928'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/3982168274574512928'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/08/64-64-64.html' title=''/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-2432165354600535593</id><published>2010-07-24T04:06:00.000-07:00</published><updated>2010-07-24T04:07:48.066-07:00</updated><title type='text'>आम आदमी को महंगी पड़ी यूपीए सरकार</title><content type='html'>कांग्रेस का चुनावी नारा, आम आदमी के बढ़ते कदम और हर कदम पर भारत बुलंद को पिछले एक साल में काफी सत्यापित किया है, हालांकि आम आदमी के कदम तो बढने के बजाय घटते दिखाई दे रहे है । एक तरफ महंगाई ने जहाँ उसके कदमों को कमजोर किया है, वहीं दूसरी तरफ खराब आर्थिक नीति भारत को बुलंद करने के बजाय कमजोर बना रही है । आम आदमी की सबसे जरूरी व आधारभूत जरूरत होती है- रोटी, कपड़ा और मकान और इसे जुटाने के लिए उसे घर से निकलना पड़ता है, और रोज यातायात पर व्यय करना पड़ता है, पर पेट्रोल, डीजल की बढ़ती किमतों को देखते हुये रोज रोजगार के लिए भी जहोजहद करना कठिन दिख रहा है, ऐसे में रोटी, कपड़ा और मकान की व्यवस्था करना, आधारभूत आवश्यकता की पूर्ति करना और भी मुश्‍किल कहा जायेगा । लेकिन कदम तो तभी बढेंगे जब बस, ट्रेन या यातायात के साधनों में किराया सस्ता होगा जो इस बढती महंगाई में और भी मुश्किल दिखाई दे रहा है । रोटी और कपड़ा खुद व खुद महंगा हो जायेगा, क्योंकि ट्रॉसपोट्रेशन भी पेट्रोल, डीजल पर ही निर्भर करता है, ऐसी स्थिति में यह नहीं समझ आ रहा कि यह सरकार आम आदमी किसे समझती है? क्या ये उन्हें समझती है जो इनके मंत्रिमंडल में बैठे ऐश की जिंदगी जी रहे है, या वे नेतागण जिन्हें अपने जेब से एक भी रूपया खर्च नहीं करना पड़ता है तथा वे भयावह आम आदमी जिनके पास अपार कालाधंधा है, जिन्हें धन रख के लिए भी स्विस बैंक का सहारा लेना पड़ता है । क्योंकि इस नीति में भारत की 99% जनता तो दिखाई ही नहीं दे रही है, जो आम आदमी के दायरे में आती है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अभी पिछले दिनों ही मंदी से जनता त्रस्त थी ही, साथ ही साथ दाल, चीनी की महंगाई ने पिछले दिनों हाहाकार मचाई ही थी । पेट्रोलियम पदार्थों का मूल्य बढ़ाना सरकार की एक ऐसी पूंजी है जिसे बढाकर सारी किमतों में खुद व खुद इजाफा हो जाता है, और एक बार जनता ने पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ी हुई किमतों को स्वीकार कर लिया तो अन्य पदार्थों की किमतों को बढाने का रास्ता खुद व खुद मिल जाता है । कहा जाय तो पेट्रोलियम पदार्थों की किमते आगामी दिनों में महंगाई रूपी भयावह फिल्म का ट्रेलर दिखाना सरकार की मंशा है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;देश की भोली-भाली जनता को अब निःसंदेह विरोध करना चाहिये अन्यथा दिन पे दिन इससे भी भयावह स्थिति होती ही जायेगी । ऐसी स्थिति में वित्तमंत्री प्रणय मुखर्जी ने मीडिया कर्मियों से बात करते हुये अपनी असमर्थता जताई कि किमत बढाने के अलावा कोई अन्य चारा नहीं हैं, उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि पेट्रोलियम पदार्थ की किमते बाजार पर निर्भर करती है लेकिन बाजार भी पेट्रोलियम पदार्थ की किमतों पर निर्भर करता है । जहाँ डीजल की किमतों पर 1.39% का फर्क अभी है जो खाद्य सामाग्रियों की किमतों को प्रभावित करेगा तथा जो आम आदमियों की जरूरत भी है । आगे चलकर 1.39% का यह फर्क इतना छोटा नहीं रह जायेगा । मुखर्जी के अनुसार महंगाई पर इसका प्रभाव 0.9% तक होगा, लेकिन अगर हर छोटी-बड़ी वस्तु को जोड़कर देखे तो क्या 0.9% की रकम इतनी छोटी होगी । जहाँ इन वक्‍तव्यों से यहाँ एक तरफ लाचारी दिखाई दे रही है, वही भारत की जनता भी इस बोझ को सहने के लिए लाचार दिख रही है, पर सवाल यह उठता है कि ऐसी स्थिति में आम आदमी कैसे बच्चों की परवरिश करेगा, कैसे दो वक्‍त की रोटी लायेगा, और कैसे तन ढकने को कपड़े का इंतजाम कर पायेगा? या इसमें भी कटौती करनी पडेगी । ऐसी स्थिति में आम आदमी के मन में यही बात है कि महंगी पड़ी यह सरकार ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;| More&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-2432165354600535593?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/2432165354600535593/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/07/blog-post_24.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/2432165354600535593'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/2432165354600535593'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/07/blog-post_24.html' title='आम आदमी को महंगी पड़ी यूपीए सरकार'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-5491196593562275400</id><published>2010-07-24T03:56:00.000-07:00</published><updated>2010-07-24T03:59:51.847-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='- डॉ० भरत मिश्र प्राची'/><title type='text'>लोकतंत्र के सर्वोच्च पद की गरिमा खतरे में</title><content type='html'>एक बार फिर देश के सर्वोपरि पद राष्ट्रपति की गरिमा को ठेस पहुंची जहां उसके द्वारा लाभ पद विधेयक के मामले में दिये गये सुझाव को दरकिनार करते हुए उसी स्वरूप में राष्ट्रपति के पास दुबारा भेजे जाने का निर्णय लिया गया है । जिस पर देश के राष्ट्रपति ने अपनी मुहर लगाने से पूर्व उस सुझाव के साथ पुनः विचारार्थ भेज दिया था । इस लोकतंत्र में उनके सुझाव की कौन कद्र करे जहां लाभ ही सर्वोपरि बना हुआ है । जिस लाभ को पाने के लिये यहां के जनप्रतिनिधियों ने पूरा जीवन ही दांव पर लगा दिया हो, उसे छोड़े जाने की बात कैसे स्वीकार हो । इस तरह के सुझाव जिससे वे लाभ पद से वंचित हो जाय, उन्हें कतई स्वीकार नहीं । जनता द्वारा चुने जाने के बाद भारतीय लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि आज सर्वशक्‍तिमान पृष्ठभूमि में दिखाई देने लगे हैं । जहां राष्ट्रपति जैसे देश के सर्वोपरि पद की भी महिमा खंडित होती जा रही है । आज इनके निर्णय को कोई चुनौती दे, कतई स्वीकार नहीं । भले देश के सर्वोपरि पद पर विराजमान राष्ट्रपति ही इनके निर्णय से सहमत न हो, कोई फर्क नहीं पड़ता । ये जो चाहते हैं, वही करते हैं । तभी तो राष्ट्रपति के सुझाव को भी दरकिनार करते हुए स्वहित में बने लाभ पद विधेयक को ज्यों की त्यों ही राष्ट्रपति के पास पुनः भेजने का निर्णय लिया गया है । इस तरह की घटना पूर्व में भी घटती रही है । जहां विधायिका एवं राष्ट्रपति के बीच वैचारिक मतभेद उभरते रहे हैं । जहां राष्ट्रपति जैसे सर्वोपरि शक्‍तिमान को भी कठपुतली सा आचरण स्वीकार करना मजबूरी बन जाता है । जिसकी पूरी शक्‍ति विधायिका के पांव तले दबायी जाती रही हो । भारतीय लोकतंत्र में अभी तक के उभरते हालात इस बात के साक्षात प्रमाण है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भारतीय लोकतंत्र में राष्ट्रपति का पद वैसे तो सर्वोपरि है परन्तु इस पद के अनुरूप इसकी गरिमा व मर्यादा का ख्याल सही मायने में किसी को भी नहीं है । दिन प्रतिदिन इस पर होते राजनीतिक प्रहार से सर्वोपरि इस पद की गरिमा धूमिल ही होती जा रही है । जहां से स्वतंत्र निर्णय लेने की पृष्ठभूमि को भी सदैव खतरा बना हुआ है । और जब कभी इस पद ने स्वतंत्रता की सांस लेने की कोशिश भी की है या अपने पद के अनुरूप अपने आपको पहचानने की चेष्टा की है, उसे कुंठित होना पड़ा है । सर्वशक्‍तिमान सा समझे जाने वाले सर्वोपरि इस पद की सारी शक्‍ति आज भारतीय लोकतंत्र के आधार स्तम्भ विधायिका के नीचे दबकर रह गयी है । जहां से इसके निर्जीव मूर्तिमान सा स्वरूप को साफ-साफ देखा जा सकता है । कभी-कभी इन सब परिस्थितियों के कारण इस तरह के महत्वपूर्ण पद भी अब मतभेद के दायरे में आने लगे हैं । भारतीय लोकतंत्र में सर्वोपरि इस पद का चयन जनता के द्वारा सीधे न होकर जनप्रतिनिधियों के द्वारा किया जाना ही इस तरह की परिस्थितियों का कारण बन सकता है । जहां सर्वशक्‍तिमान सर्वोपरि पद की गरिमा एवं शक्‍ति धीरे-धीरे क्षीण होती जा रही है । जहां विधायिका राष्ट्रपति से भी सर्वोपरि होती दिखाई दे रही है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;संसद के सत्र शुभारंभ से ही लाभ पद विधेयक के प्रसंग पर विवाद छिड़ चला । जहां सत्‍ता पक्ष ज्यों का त्यों पूर्व पारित विधेयक को अंतिम जामा पहनाने के लिये राष्ट्रपति के पास पुनः भेजने की तैयारी कर रहा था तो दूसरी ओर विपक्ष इस पर विवेचना किये जाने की वकालत करते हुए राष्ट्रपति के साथ खड़े होने की पृष्ठभूमि बनाता रहा । इस दिशा में इस विधेयक के बारे में सर्वोच्च न्यायालय की राय भी राष्ट्रपति के माध्यम से जानने की मंशा भी विपक्ष की रही, जो सोची-समझी रणनीति की पृष्ठभूमि हो सकती है । जहां विवादों के कटघरे में सरकार को एक बार फिर खड़ा किया जा सके । इस तरह के हालात में लाभ पद विधेयक को लागू करा पाना सरकार के लिये वर्तमान में मुश्किल तो अवश्य दिखाई दिया, साथ ही साथ उसके अस्तित्व पर सवालिया निशान लगता नजर भी आया । पूर्व में ऐसा लगता था कि इस परिस्थिति में वर्तमान लाभ पद विधेयक को राष्ट्रपति के पास तत्काल भेजे जाने की प्रक्रिया में विराम लग सकता है । ऐसी संभावनायें नजर आने भी लगी थी । परन्तु ऐन-केन-प्रकारेण सभी एक बिन्दु पर सहमत दिखाई देने लगे । क्योंकि स्वलाभ के दायरे में खड़े हर जनप्रतिनिधि इस लाभ पद विधेयक के पक्ष में मानसिक रूप से जुड़े अवश्य हैं । उनका नजरिया भी स्वलाभ से जुड़ चला है । जहां राष्ट्रहित से स्वहित सर्वोपरि स्वरूप धारण कर चुका है । जिनका जनसेवक का स्वरूप बदलकर मालिकाना रूप धारण कर चुका है और जो लाभ कमाने के लिये ही यहां तक पहुंचे हैं । ऐसे हालात में इस लाभ पद विधेयक को लागू कराने में सभी की पृष्ठभूमि एक जैसी होते हुए भी पूर्व में मतभेदों का प्रसंग उभरता तो अवश्य दिखाई दे रहा था जहां कहीं न कहीं एक-दूसरे की स्वहित की राजनीति समायी नजर आ रही है । इस तरह के हालात में लाभ पद विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी हेतु अंततः पुनः भेज दिया गया जिस पर सभी एक स्वर में मौन दिखाई दिये । लाभ पद विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल भी गयी । जिस विधेयक को पुनः विचार हेतु पूर्व में राष्ट्रपति ने वापिस कर दिया था उसी विधेयक को ज्यों का त्यों बिना परिवर्तन किये राष्ट्रपति के पास दुबारा भेजे जाने का केवल मानस ही नहीं बनाया गया, ऐने-केन-प्रकारेण मंजूरी हेतु अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गयी । इस परिप्रेक्ष्य में प्रधानमंत्री द्वारा ज्यों का त्यों भेजे विधेयक पर राष्ट्रपति की मंजूरी दिये जाने के पक्ष में अपनी सहमति उजागर करने एवं संसदीय समिति बनाकर उसी पर सही होने की मुहर लगाये जाने की प्रक्रिया विचारणीय है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जहां तक लाभ पद के स्वरुप पर विचारणीय पहलू है, राष्ट्रपति की पूर्व प्रतिक्रिया को राष्ट्रहित के परिप्रेक्ष्य में लिया जाना चाहिए । लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि का दर्जा जनसेवक के रूप में जाना गया है । सही मायने में जनप्रतिनिधि लाभ पद से दूर रहकर ही जनता एवं जनतंत्र की रक्षा कर पायेंगे । देश के सर्वोच्च पद पर विराजमान राष्ट्रपति की सोच में शामिल इस प्रसंग ने लाभ पद विधेयक, जो कहीं न कहीं जनप्रतिनिधि नियम एवं स्वरूप के प्रतिकूल दिखाई दे रहा था, पुनः विचार हेतु भेजने की पृष्ठभूमि बनायी । जिसे नजर‍अंदाज कर दिया गया । इस तरह की पृष्ठभूमि में स्वहित की भावना राष्ट्रहित की भावना से सर्वोपरि होती साफ-साफ दिखायी दे रही है । ‘समरथ को कोई दोष न गोसाई’ रामचरितमानस की यह पंक्‍ति सदैव ही इस तरह के परिवेश में सार्थकता का बोध कराती रहेगी । जहां देश के सर्वोपरि पद पर बैठे व्यक्‍ति की राय की कोई कदर नहीं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जहां तक लाभ पद के बारे में वैचारिक मंथन की आवश्यकता है, एक बात साफ होनी चाहिए की लाभ पद से जनप्रतिनिधियों का क्या वास्ता है जिनकी पहचान जनसेवक के रूप में ही लोकतंत्र के तहत स्थापित की गई हो । यह एक सैद्धांतिक रूप से विचारणीय पृष्ठभूमि तो बन सकती है परन्तु व्यवहारिक पक्ष कुछ और ही यहां दिखाई दे रहा है । लाभ पाने के उद्देश्‍य से आये हुए जनप्रतिनिधियों को लाभ पद के दायरे से अलग कर पाना संभव कहीं नहीं दिखायी देता । इस तरह के परिवेश ने आज लोकतंत्र की परिभाषा ही बदल डाली है । जहां लोकतंत्र के सर्वोच्च पद की गरिम अभी खतरे में हैं ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-5491196593562275400?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/5491196593562275400/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/07/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/5491196593562275400'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/5491196593562275400'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/07/blog-post.html' title='लोकतंत्र के सर्वोच्च पद की गरिमा खतरे में'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-6936508434935848161</id><published>2010-02-03T06:31:00.001-08:00</published><updated>2010-02-03T06:31:45.729-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='आपका                                                               कृष्ण गोपाल मिश्र'/><title type='text'>नव वर्ष की शुभ कामनायें</title><content type='html'>वक्‍त अपना दस्तूर निभाते हुए एक बार पुनः कुछ खट्‌टी-मीठी यादों भरे २००९ को अपने आगोश में समेट कर चला गया और सपनों, आकाक्षांओं, महत्वाकांक्षों एवं आशाओं से भरे सन्‌ २०१० को हमारी झोली में डाल दिया है । जिसका हम सभी बड़े उत्साह से स्वागत कर रहे हैं । &lt;br /&gt;सर्वप्रथम अपने पाठकों को वर्ष २०१० के लिए ढेर सारी शुभ कामनाएं देता हूँ कि यह वर्ष उनके सारे सपनों, महत्वाकांक्षाओं व आशाओं को पूर्ण करे, और ईश्‍वर उन्हें सुख, धैर्य और सन्तोष के साथ ही उनके दिमाग को रचनात्मक व अच्छे विचारों से सिंचित करे । नए वर्ष का यह पहला अंक “नई चुनौती, नए पड़ाव” आपके समक्ष प्रस्तुत है जिसमें राजनैतिक गलियारों से २००९ के राजनैतिक परिदृश्य के जरिए यह दर्शाया गया कि राजनीति में कौन अर्थ पर था तो कौन फर्श पर था । खेल जगत में धोनी के धुरन्धरों की पोल खोलती, एक समीक्षा जिसमें आस्ट्रेलिया सीरीज हाथ से जाने की चूक की एक समीक्षा और अन्तर्राष्ट्रीय कालम्‌ में भारत व रूस की सन्धि एक सकारात्मक दिशा की ओर बढ़ते कदम । साथ ही २००९ में ही राहुल बाबा के राजनैतिक हीरो या कांग्रेस के शोमैन बनकर उभरने की समीक्षा, स्वास्थ्य जगत में २००९ में स्वाईन फ्लू एक बड़ा मुद्दा बना रहा है जिसका कहर अब भी जारी है । अतः इस अंक में प्रस्तुत है एक लेख जिसमें फ्लू व स्वाईन फ्लू में अन्तर और स्वाईन फ्लू से बचाव व उपाय दर्शाया गया है ।&lt;br /&gt;इस वर्ष की ऐतिहासिक उपलब्धि मास्टर ब्लास्टर सचिन तेन्दुलकर की रही है जिसने विश्‍व में भारत का गौरव बढ़ाया है । सचिन के गौरवशाली सफर की और उनके अविस्मणीय उपलब्धियों को समय दर्पण की टीम सलाम करती है, उनके क्रिकेट के गौरवीय जीवन को दर्शाने का प्रयास करता है । साथ में समसामायिक में कैलेण्डरों के उत्पत्ति का इतिहास को भी जानने को मिलेगा । ज्योतिष में वर्ष २०१० की वार्षिक राशिफल के साथ-साथ २०१० ज्योतिषीय आधार पर शेयर-बाजार की स्थिति एवं भारत की आर्थिक स्थिति एवं राजनैतिक स्थिति में दर्शाया गया है । उपरोक्‍त विषय वस्तु के अलावा अन्य बहुत सारी रूचिकर सामग्री पढ़ने को मिलेगा । अतः आशा है उपरोक्‍त सारे विषय वस्तु पर आधारित हमारा यह अंक आपको पसन्द आएगा हम हमेशा आपके अनमोल सुझावों की प्रतीक्षा में हैं । आपसे आग्रह है कि अपने सुझाव भेजकर हमें अनुगृहित करें ।&lt;br /&gt;   एक बार पुनः आपको वर्ष २०१० की ढेर सारी शुभकामनाएं ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-6936508434935848161?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/6936508434935848161/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/02/blog-post.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/6936508434935848161'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/6936508434935848161'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/02/blog-post.html' title='नव वर्ष की शुभ कामनायें'/><author><name>Kiran Mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/02634264612836390123</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-7120825484206772968</id><published>2010-01-16T06:13:00.000-08:00</published><updated>2010-01-16T06:15:07.246-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='कृष्ण गोपाल मिश्रा'/><title type='text'>2012 में प्रलय की भविष्यवाणी एक कोरी कल्पना</title><content type='html'>आये दिन दुनिया की समाप्ति एवं प्रलय की भविष्यवाणियाँ तो लोगों के मन में भय व्याप्त करती रहती हैं, पिछले दिनों 2012में दुनिया समाप्ति की खबर से लोगों के मन में डर तो बना ही हु‌आ है साथ ही समय-समय पर प्राकृतिक आपदा‌ओं को लोग 2012 की भविष्यवाणी से जोड़ कर देखने लगे हैं और भयग्रस्त हो गये हैं। वैसे ऋग्वेद व पुराणों के अनुसार सौर-मंडल के किसी भी ग्रह पर जीवन की उत्पत्ति से प्रलय तक के समय को चार युगों में बाँटा गया है । पहला युग सतयुग जिसकी आयु 17,28000वर्ष मानी गयी है । इसके बाद त्रेतायुग की आयु 12,96000मानी गयी है और उसके बाद द्वापर युग की आयु 8,64000वर्ष मानी गयी है और द्वापर युग के भगवान कृष्ण का जन्म लगभग 5000वर्ष पूर्व हु‌आ था और पौराणिक कहानी के अनुसार युधिष्ठिर के पोते राजा परीक्षित के समय से कलयुग प्रारम्भ हु‌आ । इस प्रकार पौराणिक कथा के और ऋग्वेद के अनुसार भी अभी 4,25000वर्ष कलयुग के शेष हैं । जहाँ तक दुनिया की समाप्ति की भविष्यवाणियाँ हैं तो मैं एक बात बहुत ही मजबूती से कहना चाहूंगा की अभी पृथ्वी के क‌ई हजार वर्ष शेष हैं । इसे समझने के लि‌ए हमें अपने सौर-मण्डल का संक्षिप्त रूप समझना होगा । हमारे सौर -मण्डल में सूर्य के चारों ओर एक निश्चित कक्षा में भ्रमण करने वाले नौ ग्रहों के साथ-साथ उनके उपग्रह भी हैं । ये सभी ग्रह सूर्य के ही अंग हैं । जो सूर्य की अक्षीय गति से अन्तः-आणविक ऊर्जा के ह्रास के कारण अस्तित्व में आये हैं । सूर्य तथा अन्य ग्रहों के मध्य कार्यरत अभिकेन्द्रीय बल एवं अपने सौर मण्डल के बाहर से कार्यरत उत्केन्द्रीय बल के कारण ये सभी अपने अक्ष पर भ्रमण करते हैं । एक सौर-मंडल में एक समय में सिर्फ एक ही ग्रह पर जीवन संभव है जो कि वर्तमान पृथ्वीय कक्षा में है । इसी कक्षा में वे सभी कारक मौजूद हैं जो जीवन के लि‌ए आवश्यक हैं, जैसे ऑक्सीजन, तापमान, जीवद्रव्य, ओजोन की परत, जल आदि । पृथ्वी की कक्षा से बाहर का तापमान इतना कम है वहाँ जीवन संभव नही है इसी तरह बुद्ध तथा शुक्र ग्रह पर तापमान इतना अधिक है जो जीवन के लि‌ए उपयुक्त नहीं है । लेकिन यह पृथ्वी के निरन्तर अक्षीय गति से ह्रास अन्तरा आणविक ऊर्जा के कारण सूर्य और पृथ्वी के बीच कार्यरत अभिकेन्द्रीय बल धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है और सौर मण्डल के बाहर से कार्यरत उत्केन्द्रीय बल मजबूत हो रहा है जिससे पृथ्वी अपनी कक्षा से धीरे-धीरे बाहरी कक्षा की ओर खिसक रही है । यही स्थिति हमारी पृथ्वी को धीरे-धीरे जीवन के अनुकूल वातावरण की समाप्ति की ओर ले जा रही है और यही प्रक्रिया हमारे सौर मण्डल में विद्यमान सभी ग्रहों के बीच कार्यरत है । इसी उपरोक्त सौर मण्डल की निश्चित प्रक्रिया के तहत आज से काफी समय पूर्व कभी मंगल भी पृथ्वी वाले कक्षा में भ्रमण करता था । और तब मंगल पर भी जीवन विद्यमान था लेकिन समय के साथ उस अभिकेन्द्रीय बल के सापेक्ष उत्केन्द्रीय बल का मजबूत होने के कारण मंगल मिलकर अपने वर्तमान कक्षा में भ्रमण कर रहा है जिससे उस पर तापमान घटने से जीवन की समाप्ति हु‌ई । इसी प्रक्रिया के तहत पृथ्वी पर जीवन की समाप्ति उसकी सूर्य से अभिकेन्द्रीय बल के धीरे-धीरे कमजोर होने के कारण और सूर्यसे दूरी बढ़ने एवं उस पर तापमान की कमी के कारण ही संभव है जिसे होने में अभी क‌ई लाख वर्ष शेष हैं ।क्योंकि पृथ्वी की समाप्ति के लि‌ए दो बात लिखित रूप से वैज्ञानिक आधार पर होना चाहि‌ए । पहला यह कि पृथ्वी की अक्षीय गति से ह्रास अन्तरा आणविक ऊर्जा से पृथ्वी की आणविक सह-संजन बल का कमजोर होना, दूसरा इसके द्वारा एक और दूसरे उपग्रह की उत्पत्ति तभी पृथ्वी की एक बहुत बड़े हिस्से की समाप्ति एवं भौगोलिक परिवर्तन होना और इसमें अभी कम से कम लाखों वर्ष लग सकते हैं, क्योंकि अभी पृथ्वी आन्तरिक सह संजन बल काफी मजबूत है । यह बात अलग है कि हमारे सौर मंडल में 9ग्रहों में तीन-तीन ग्रहों का समूह है जो तीन अलग प्रकृति को सन्तुलित करते हैं । यह तीनों क्रमशः अग्नि, वायु एवं ठंडा (बर्फ) प्रकृति प्रतिनिधित्व करते हैं और ग्रहों के सन्तुलित संयोग से इन प्रवृत्तियों में सन्तुलन बना रहता है, जिससे वातावरण या प्रकृति संतुलित रहती है, परन्तु हर 9वर्ष में ग्रहों की आपसी संयोग और स्थिति से किसी एक प्रकृति की प्रबलता बढ़ती है । इसमें उपरोक्त सारी बातें एक साथ कार्य करती हैं, जिससे बीच-बीच में प्रकृति का सन्तुलन बनता-बिगड़ता रहता है । इसे प्रलय का अनुमान लगाना गलत होगा । इस प्रकार उपरोक्त बातें यह सुनिश्चित करती हैं कि पृथ्वी पर जीवन की समाप्ति धीरे-धीरे तापमान घटने से होगी । परन्तु अभी पृथ्वी पर काफी तापमान है । जहाँ तक पृथ्वी फटने की बात है तो आज से हजारों वर्ष पूर्व पृथ्वी पर सूखा पड़ा, पृथ्वी फटना आम बात थी यह प्रक्रियायें ज्यादा होती थीं, क्योंकि तब पृथ्वी का तापमान ज्यादा था । लेकिन हम आधुनिकता एवं भौतिकता के कारण ज्यादा कमजोर हो गये हैं और छोटी-छोटी प्राकृतिक आपदा‌ओं से सशंकित हो गये हैं । इस प्रकार मैं कहना चाहूंगा कि घबराने की को‌ई बात नहीं है यह सब ग्रहों की असन्तुलित स्थिति के कारण प्राकृतिक घटना है ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-7120825484206772968?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/7120825484206772968/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/01/2012.html#comment-form' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/7120825484206772968'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/7120825484206772968'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2010/01/2012.html' title='2012 में प्रलय की भविष्यवाणी एक कोरी कल्पना'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-4315477346598429524</id><published>2009-12-07T22:50:00.000-08:00</published><updated>2009-12-07T22:53:10.928-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='-गोपाल प्रसाद'/><title type='text'>अपना देश बचा लो आज</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/Sx33zEjdz5I/AAAAAAAAALI/tuE7BW94KT0/s1600-h/GOPAL+.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 160px; height: 200px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/Sx33zEjdz5I/AAAAAAAAALI/tuE7BW94KT0/s320/GOPAL+.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5412754783937089426" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भारत सरकार और माफिया में क्या अंतर है? भारत सरकार को कानूनी मोहर (अधिकार) है जबकि माफिया को कानूनी अधिकार नहीं है । आज माफिया सरकार चला रही है । भारत में झूठ बोलकर वोट ले लेने को राजनीति कहते हैं जबकि विदेशों में ऐसा नहीं है । वहाँ पार्टी के घोषणा पत्र पर पूर्णतः अमल करना पड़ता है । इस समस्या के समाधान के लिए “राइट टू रिकॉल” अर्थात जनता को अपने प्रतिनिधि वापस बुलाने का अधिकार मिलने चाहिए । गवाहों की सुरक्षा की योजना बने । जाति और धर्म आरक्षण का आधार नहीं होना चाहिए बल्कि यह आर्थिक आधार पर तय होना चाहिए । &lt;br /&gt;  कुछ लोग हमेशा विरूद्ध मत में होते हैं । वे बहस करते रहे हैं कि अंडा पहले आया या मुर्गी, गाय दूध देती है या हम दूध लेते हैं । जब तक वर्षा के जल को संरक्षित नहीं किया जाएगा तब तक पानी की समस्या का समाधान नहीं हो सकता है । भ्रष्टाचार का कारण जरूरत है या लालच? आप खाली पेट में उसूल नहीं सिखा सकते । टैक्स परिसीमन को भी बदलना होगा । १० करोड़ बच्चों को विद्यालय भेजना हो तो संसद को बंद कर देना चाहिए । क्योंकि संसद में जूतमपैजार, आरोप प्रत्यारोप के सिवा देश की मूलभूत आवश्यकताओं के निदान पर क्या काम होता है? भारी भरकम योजना मंत्रालय और संपूर्ण सरकारी तंत्र के बावजूद मँहगाई जिस हिसाब से बढ़ी है उससे अमीर और ज्यादा अमीर हो गए और गरीब ठीक उसी तरह और अधिक गरीब हो गए । संपूर्ण सरकारी आँकड़ा झूठ का पुलिंदा के सिवाय और क्या है? रोजगारपरक विद्यालय अत्यधिक संख्या में खोले जाने चाहिए, वह तो खुल नहीं रहे अस्पताल और पेय जल की उपलब्धता के लिए कारगर उपाय के बजाय सारी मशीनरी “कॉमनवेल्थ गेम” पर केंद्रित हो गई है । यह कैसा मजाक है? ९०% किसान कोर्ट-कचहरी में धक्‍के खा रहे हैं । इसके निदान हेतु चकबंदी कराना अनिवार्य हो । आज साढ़े तीन करोड़ केस विचारधीन हैं जिसकी सुनवाई में १२४ साल लगेंगे । इस समस्या के निदान के लिए कोर्ट कचहरी तीन शिफ्ट में क्यों नहीं चलाई जाती है? सेवानिवृत न्यायाधीशों को वापस बुलाकर एवं ऑनरेरी मजिस्ट्रेट की नियुक्‍ति कर त्वरित न्याय दिया जा सकता है । समय पर न्याय ना मिलना अन्याय नहीं तो और क्या है? आज हर कोई अलग राज्य की माँग कर रहा है । राज्य अलग करने के बजाय वे सर्वांगीण विकास की माँग क्यों नहीं करते? जब इस देश के हर नागरिक को कहीं भी रहने और काम करने का अधिकार प्राप्त है, कोई भी भाषा, कोई भी धर्म अपनाने का अधिकार प्राप्त है, फिर जाति और भाषा के नाम पर नंगा नाच क्यों हो रहा है?  इस नंगे नाच को शह कौन दे रहा है? ऐसे तत्वों की मंशा क्या देश की एकता और अखंडता के लिए घातक नहीं है?वोट बैंक तुच्छ राजनीति के कारण अपराधियों को पैरोल पर छोड़ दिया जाने हेतु दिल्ली सरकार अनुशंसा करती है । महाराष्ट्र विधानसभा में मनसे विधायकों द्वारा सपा विधायक अबू आजमी के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है । यह संपूर्ण हिंदी समाज पर हमला है और देर सबेर इस हमले का जवाब उपद्रवी तत्वों को जरूर मिलेगा क्योंकि समय का चक्र घूमता रहता है । शांत रहने का मतलब यह नहीं कि हम चुप हैं । हम अपनी ताकत इकट्‌ठी कर रहे हैं, उन हमलावरों के माकूल जवाब देने हेतु । &lt;br /&gt;   राजस्थान में गूजर और मीणा जाति समुदाय के वर्चस्व की लड़ाई से देश का कितना नुकसान हुआ यह आकलन क्या किसी ने किया है? आज हर किसी को आरक्षण चाहिए क्यों? यदि मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहे, सबों को अपना हम मिलता रहे तो फिर आरक्षण की कोई जरूरत ही नहीं होगी, पर अभी भी जातीय वैमनस्यता, छूआछूत तथा विषमताएँ पूर्णतः दूर नहीं हुई हैं और जब तक इसका समाधान ढूँढा नहीं जाएगा विद्रोह घटने के बजाय और बढ़ेगा । &lt;br /&gt;  भारत पहला ऐसा देश है जो समस्याओं का समाधान नहीं निकाल रहा है । अंतरराष्ट्रीय प्रेरक शिव खेड़ा ठीक ही कहते हैं- “यदि आप समस्या का समाधान नहीं कर सकते तो आप अपने आपमें समस्या हैं । मान लीजिए सरकार यदि यह निर्णय कर ले कि कोई बिल्डिंग नहीं बनने देंगे जब तक “सौर ऊर्जा” प्रणाली न अपना ले । तो फिर बिजली समस्या का खुद ही समाधान मिल जाएगा । आजादी के ६२ वर्ष के बाद भी राजधानी दिल्ली में बिजली, पानी सुरक्षा सुविधा कारगर नहीं है । मंदिरों में चुन्‍नियाँ चढ़ाते हैं बाहर चुन्‍नियाँ उतारते हैं । पारदर्शिता लाने एवं भ्रष्टाचार खत्म करने हेतु  RTI एक्ट को और अधिक सशक्‍त करने की जरूरत है क्योंकि विभिन्‍न क्षेत्रों से अभी भी यह सूचना आ रही है कि इस पर पूर्ण रूपेण अमल नहीं किया जा रहा है । अधिकारी गैर जिम्मेदाराना रवैया अपना रहे हैं । कहीं-कहीं तो  RTI  द्वारा पूछे गए प्रश्नों के सही जवाब भी नहीं दिए जा रहे हैं । &lt;br /&gt;  आज उनलोगों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए जो बेईमान हों, भष्टाचारी हों, आततायी हों । हर कोई कहता है कि भगत सिंह, सुभाषचन्द्र बोस, चन्द्रशेखर आजाद और खुद्‌दीराम बोस पैदा हों, पर हमारे घर नहीं । यह कैसी मानसिकता है? ज्यादातर लोग तो’ स्वयं के साथ भी अन्याय होने पर प्रतिकार करने के बजाय अन्य कंधों को ढूँढने में रहते हैं । ऐसे लोग मेरे विचार से मुर्दे ही हैं, बेशक वे चलते-फिरते हों । ऐसे लोग एवं ऐसी मानसिकता की बदौलत कभी क्रांति नहीं आ सकती । क्रांति मात्र उन धारा के विपरीत चलने वाले लोगों के द्वारा ही आएगी जिसकी संख्या तो काफी कम है परन्तु नैतिकता आत्मबल और दृढ़निश्‍चय के मामले में वे काफी सबल हैं । किसी ने ठीक ही कहा था- “हमें खतरा नहीं है गोरे अंग्रेजों से खतरा तो हमें अपने काले अंग्रेजों से है जो हमीं जैसे लगते हैं, फर्क बताना मुश्‍किल है कि कौन गद्दार है ।  हमारे मूर्धन्य नेता रामविलास पासवान कहते हैं कि ३ करोड़ बांग्लादेशियों को नागरिकता दे दी जाय । क्या यह माँग उचित है, गौर से सोचिए और खत्म कर दीजिए ऐसे नेताओं की नेतागिरी को जो ऐसी गैरवाजिब और देशद्रोही बयानों के बदौलत अपनी नेतागिरी चमकाने में रहते हैं । दो धारा के लोग हैं- “सकारात्मक एवं नकारात्मक” । हमें सकारात्मकता की नीति को अपनाने हुए संयम एवं शालीनता के साथ नए कीर्तिमान स्थापित करने हेतु नए मापदंड स्थापित करने होंगे । आज नकली देशभक्‍तों की संख्या बढ़ गई है जबकि असली देशभक्‍तों का मानना है कि “जो देश को चाहिए वही हम करेंगे । आजादी से जियो, जाति छोड़ो-भारत जोड़ो का नारा हमें अपनाना ही पड़ेगा । गोवा में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है, ऐसा क्यों? सिंगापुर और इजराईल में हर परिवार के एक सदस्य का राष्ट्रीय रक्षा सेवा में जाना अनिवार्य है । यह सिद्धांत हमारे देश में क्यों नहीं लागू किया जाता है? कर प्रणाली के साथ-साथ चरित्र प्रणाली और एकल कानून प्रणाली का भी निर्धारण एवम्‌ अमल होना चाहिए । देश हर इंसान से ऊपर है । हर घरेलू कर्मचारियों के लिए पेंशन योजना हो जिसमें २०% नियोक्‍ता का और २०% कर्मचारियों के वेतन से कटे । &lt;br /&gt;  देश के युवा पीढ़ी को इस संकल्प से राजनीति में आना चाहिए कि सरकार तोड़ देंगे मगर उसूल नहीं तोड़ेंगे । वैसे आज ज्यादातर युवा मन बना रहे हैं कि “हमें अब उतरना ही पड़ेगा । ” &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रस्तुत संपादकीय की विषयवस्तु एक प्रमुख कवि गर्गऋषि शान्तनु की कविता ‘सोचेगा कौन’ ने स्पष्ट रूप से झलती हैं- &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भीड़वाले हम अबतक.. झरना नीचे पानी पिये,&lt;br /&gt;चन्द तुम- ऊपर - तब से :&lt;br /&gt;मन्दिर.. पाठागार.. विद्यालय जलाते आए !&lt;br /&gt;अब देश के लिए- बताओ- कौन सोचेगा?&lt;br /&gt;विदेशी या विदेशिनी.. फिर.. नाना या नानी? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;-गोपाल प्रसाद&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-4315477346598429524?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/4315477346598429524/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2009/12/blog-post_2513.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/4315477346598429524'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/4315477346598429524'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2009/12/blog-post_2513.html' title='अपना देश बचा लो आज'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/Sx33zEjdz5I/AAAAAAAAALI/tuE7BW94KT0/s72-c/GOPAL+.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-6066929945276458899</id><published>2009-12-07T22:48:00.000-08:00</published><updated>2009-12-07T22:50:05.061-08:00</updated><title type='text'>अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला २००९ भारत के आधुनिक छवि की प्रस्तुति</title><content type='html'>भारत की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटील ने नई दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित हंसध्वनि थियेटर में एक रंगारंग और खचाखच भरे समारोह में २९ वें भारतीय अन्तरराष्ट्रीय व्यापार मेले का उद्‌घाटन किया । &lt;br /&gt;  इस अवसर पर उपस्थित महानुभावों में केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री आनन्द शर्मा, जिन्होंने उद्‌घाटन समारोह की अध्यक्षता की, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित, उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ भारत सरकार के वाणिज्य सचिव श्री राहुल खुल्लर, इण्डिया ट्रेड प्रमोशन आर्गनाइजेशन के अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक डॉ. सुवास पाणि, अनेक राजनयिक, वरिष्ठ सरकार अधिकारी, भारत और विदेश के भागीदारी तथा मीडिया जगत से जुड़े व्यक्‍ति शामिल थे । &lt;br /&gt;अपने उद्‌घाटन भाषण में भारत की राष्ट्रपति ने इस वर्ष व्यापार मेले को विभिन्‍न पहलुओं की दृष्टि से उसका क्षेत्र व्यापक बनाने और उसे अधिक समृद्ध बनाने के लिए केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और आई टी पी ओ को बधाई दी । उन्होंने बताया कि पिछले अनेक वर्षों से वैश्‍विक व्यापारी समुदाय के समक्ष भारत की तीव्रगति से आधुनिक हो रही छवि को सफलतापूर्वक प्रस्तुत करने में आई आई टी एफ ने प्रतिष्ठा अर्जित की है । भारतीय अन्तरराष्ट्रीय व्यापार मेले में बी-टू-बी गतिविधियों तथा बी-टू-सी सौदों को बड़े पैमाने पर जोड़ने की अद्वितीय क्षमता है । उन्होंने कहा कि अन्तरिक्ष की खोज जैसे क्षेत्रों सहित ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के नेता के रूप में भारत की स्थिति इसके प्रथम प्रधानमंत्री पण्डित जवाहरलाल नेहरू के प्रोत्साहन का परिणाम है । राष्ट्रपति ने आशा व्यक्‍त की कि भारतीय अन्तरराष्ट्रीय व्यापार मेला २००९ के अंग के रूप में ‘भारत की अन्तरिक्ष यात्रा’ प्रदर्शनी लोगों को, विशेषरूप से भारतीय युवाओं को विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अध्ययन और अनुसंधान करने के लिए प्रेरणा प्रदान करेगी । उन्होंने कहा कि भविष्य आविष्कारों, नवीन खोजों और उद्यमों का है । &lt;br /&gt;मेले में आये विदेशी भागीदारों का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति जी ने बताया कि भारत विदेशी कंपनियों, निगमों और व्यापारिक सदनों के लिए एक अनुकूल गन्तव्य स्थल के रूप में उभरा है । भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपने सुदृढ़ स्वदेशी बाजार और प्रगति कर रहे मध्यम वर्ग तथा एक सुदृढ़ विकास दर के कारण विश्‍व में आर्थिक संकट के दौरान ६.५ प्रतिशत से भी अधिक विकास दर बनाये रखकर अपनी स्थिति मजबूत की है । अपेक्षाकृत अच्छी वृद्धि दर विश्‍व में भारत के बढ़ते आर्थिक प्रभुत्व की ओर इंगित करती है । विभिन्‍न देशों के साथ बहु-आयामी व्यापार संबंधों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में उचित मूल्य पर उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों और सेवाओं को उपलब्ध करने की अद्वितीय क्षमता है ।  उन्होंने कहा कि विकसित हो रही अवसंरचना से अगले पांच वर्ष के दौरान भारत में ५५० बिलियन अमेरिकी डालर के पूंजी निवेश उपलब्ध होंगे । &lt;br /&gt;अपने मुख्य भाषण में केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री आनन्द शर्मा ने बताया कि एक देश से दूसरे देश के बीच व्यापार और विशेषरूप से विश्‍व की मुख्य धारा के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था को जोड़ने के लिए उत्प्रेरक का कार्य करने में इस मेले का विशेष महत्व है । यह भी जानकारी दी गयी कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने विदेश व्यापार नीति के अन्तर्गत ३९ नये बाजारों की पहचान करने और उनका विकास करने के लिए प्रमुख पहल की है । फोकस बाजार योजनाओं के अन्तर्गत आने वाले इन २६ नए बाजारों में से १६ लेटिन अमेरिका में तथा १० नये बाजार ओसियाना और एशिया में हैं । दूसरी फोकस योजना में १३ बड़े बाजार विभिन्‍न महाद्वीपों अफ्रीका, दक्षिण अफ्रीका, सुदूर पूर्व, प्रशान्त क्षेत्र और यूरोप में है । &lt;br /&gt;  श्री शर्मा ने इस बात का उल्लेख करते हुए कि भारत की क्षमता और उसकी सामर्थ्य को देखते हुए विश्‍व व्यापार में उसका हिस्सा बहुत ही कम है प्रतिशत की दृष्टि से भारत के वैश्‍विक व्यापार को वर्ष २०१४ तक दुगुना करने के लिए सरकारों की प्रतिबद्धता को दोहराया । इस बात पर पुनः बल दिया कि चुनौतीपूर्ण आर्थिक वातावरण में हमारे देश में विश्‍व अर्थव्यवस्था के साथ स्वयं को एकीकृत करने की क्षमता और प्रतिबद्धता है । उन्होंने जानकारी दी कि भारत ने पहले ओ ई सी डी देशों के साथ व्यापक आर्थिक भागीदारी पर हस्ताक्षर किए और उसके साथ ही विश्‍व व्यापार संगठन के दोहा दौरे को पुनः सक्रिय करने के लिए एक अत्यन्त सुदृढ़ कदम उठाया । ऐतिहासिक त्रृटियों को सुधारने के साथ-साथ नियम आधारित बहु-पक्षीय व्यापार व्यवस्था की आवश्यकता का समर्थन करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गरीब और विकासशील देशों की उचित महत्वाकांक्षाओं पर ध्यान दिये जाने और वैश्‍विक सहयोग के नये अवसर पैदा किये जाने की आवश्यकता है । उन्होंने घोषणा की कि सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक विश्‍व स्तरीय सम्मेलन केन्द्र स्थापित करने के बारे में निर्णय किया है । &lt;br /&gt;उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य और आध्यात्मिक के क्षेत्र में उत्तराखण्ड राज्य की अन्तनिर्हित क्षमताओं पर प्रकाश डाला । श्रीमती शीला दीक्षित ने आई आई टी एफ २००९ में दिल्ली को भागीदारी राज्य का दर्जा दिये जाने पर प्रसन्‍नता व्यक्‍त की । उन्होंने आशा व्यक्‍त की कि दिल्ली आगामी राष्ट्र मण्डल खेल २०१० के लिए की जा रही सभी विकास गतिविधियों के कारण एक उच्च विश्‍वस्तरीय राजधानी के रूप में उभरेगी । स्वागत भाषण में डा. सुवास पाणि ने मेले की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख किया । &lt;br /&gt;मेले के दौरान व्यापार से संबंद्ध विषयों, विशेष प्रदर्शन और सामयिक महत्व के अन्य विषयों और थीमों पर अनेक विचार गोष्ठियां आयोजित की गईं । टेकमार्ट, उत्तम रहन-सहन आदि विशेष प्रदर्शनों में विविध उत्पाद और सेवाएं प्रदर्शित की गईं जिनमें इंजीनियरी, सॉफ्टवेयर, एवं हार्डवेयर, मोटर वाहन, इलेक्ट्रॉनिक चमड़ा, कपड़े, दूर संचार, जूट, रबड़, हस्तशिल्प, आभूषण, उपभोक्‍ता वस्तुएँ आदि शामिल की गयीं । &lt;br /&gt;आई आई टी एफ २००९ की थीम- सेवाओं के निर्यात को राज्य और संघ राज्य क्षेत्रों के मण्डपों और एकल अलग से मण्डप में भी प्रमुखता से दर्शाया गया । &lt;br /&gt;इस वर्ष दिल्ली और उत्तराखण्ड को क्रमशः साझेदार और फोकस राज्य चुना गया है तथा थाइलैण्ड और चीन को क्रमशः साझेदार देश और फोकस देश का दर्जा प्रदान किया गया । &lt;br /&gt;भारत और अन्य २८ देशों के लगभग ७५०० प्रदर्शक मेले में भाग लिया । अन्तरराष्ट्रीय भागीदारी अफगानिस्तान, बंग्लादेश, बेल्जियम, भूटान, चीन, चीन (हांगकांग) क्यूबा, मिस्त्र, जर्मनी, ईरान, ईराक, इण्डोनेशिया, म्यांमार, हालैण्ड, नेपाल, नाइजीरिया, पाकिस्तान, पापुआ और न्यूगिनी फिलीपीन्स, श्रीलंका, दक्षिण कोरिया, सीरिया, थाइलैण्ड, तुर्की, यू के, संयुक्‍त अरब अमीरात, संयुक्‍त राज्य अमेरिका और वियतनाम आदि देशों की रही । क्यूबा, ईराक, नाइजीरिया, पापुआ और न्यूगिनी मेले में पहली बार भाग लिया । &lt;br /&gt;इस वर्ष के आई आई टी एफ को “ग्रीन फेयर” का दर्जा दिया गया जिसमें प्रगति मैदान को धूम्रपान निषेध घोषित किया गया और मेले के अन्दर प्लास्टिक के थैलों का उपयोग करने पर पाबन्दी थी । &lt;br /&gt;मेले की अन्य प्रमुख विशेषता “भारत की अन्तरिक्ष यात्रा” विषय पर नेहरू मण्डप में आयोजित हो रही प्रदर्शनी थी जिसमें भारत द्वारा अन्तरिक्ष युग में प्रवेश करने के विभिन्‍न चरणों पर प्रकाश डाला गया । &lt;br /&gt;इस मेले के दौरान हंसध्वनि,शाकुन्तलम, फलकनुमा, ऐतिहासिक चौक, फूड कोर्ट, श्रृंगार, लाल चौक, एम्फी थियेटर और प्रगति मैदान में नए बने ओपन एअर थियेटर प्रगति आंगन में विभिन्‍न इलाकों के समृद्ध और विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गए । मेले में फूड प्लाजा में “भारत का खाना” के अन्तर्गत विभिन्‍न प्रकार के स्वादिष्ट भारतीय व्यंजनों का स्वाद लेने का भी अद्वितीय अवसर प्राप्त हुआ साझेदार राज्य दिल्ली के मण्डप में विशेष रूप से- ‘दिल्ली का खाना’ खाने को मिला । &lt;br /&gt;प्रगति मैदान के लिए मैट्रो ट्रेन की सेवाओं के फेरों में वृद्धि की गई थी । दिल्ली परिवहन निगम की विशेष सेवायें दिल्ली सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के गाजियाबाद, फरीदाबाद, नोएडा और गुड़गांव शहरों से उपलब्ध थी । पहली  बार प्रदर्शकों, सेवा कार्मिकों और उपभोक्‍ताओं की अन्य श्रेणियों के लिए डिजिटल पहचान पत्र की प्रणाली भी लागू की गई थी । &lt;br /&gt;आम जनता की सुविधा के लिए मेले के प्रवेश टिकट मैट्रो स्टेशनों, डी टी सी के बस डिपो, मदर डेयरी बूथों और कुछ चुनिन्दा पैट्रोल पम्पों तथा भारतीय तेल निगम, भारत, पैट्रोलियम और हिन्दुस्तान पैट्रोलियम के खुदरा बिक्री केन्द्रों पर उपलब्ध थे । इन बिक्री केन्द्रों पर उपलब्ध टिकट प्रगति मैदान के टिकट बूथों पर बेचे जाने वाले टिकटों से १० रूपये सस्ते थे । &lt;br /&gt;टैकमार्ट इंडिया ः &lt;br /&gt;सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को लगाने के लिए एनएस‍आईसी के “टैकमार्ट इंडिया २००९” में कम लागत वाली प्रौद्योगिकियों की प्रस्तुति में सूक्ष्म, लद्यु एवं मध्यम उद्यमों की सामर्थ्य एवं क्षमताओं को प्रदर्शित किया । इस प्रदर्शनी में हलकी इंजीनियरी, मैकेनिकल उत्पाद, इलेक्ट्रिकल्स एवं इलेक्टॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मेस्युटिकल्स, सिरैमिक, मशीन एवं मशीज औजार व सामान्य उत्पाद शामिल थे । इस प्रदर्शनी में एमएसएमई यूनिटों को एक छत के नीचे अपने मार्केटिंग प्रयासों में वृद्धि करने तथा प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान किया गया । &lt;br /&gt;टैकमार्ट इंडिया २००९ के मुख्य उद्देश्य - &lt;br /&gt;भारतीय सूक्ष्म, लद्यु एवं मध्यम उद्यमों की सामर्थ्यों तथा उनके उत्पादों व सेवाओं के संभावित निर्यात को प्रदर्शित करना, स्वरोजगार के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने वाली प्रौद्योगिकी/मशीनों का जीवन्त प्रदर्शन एवं जानकारी देना, भारत एवं विदेशों से संभावित ग्राहकों/सप्लायरों के साथ बैठकों के माध्यम से नए मार्केट अवसरों व प्रौद्योगिकियों की तलाश करना, उद्योगों संबंधी अपने अनुभवों की भागीदारी व उनके आदान-प्रदान तथा सर्वोत्तम व्यापार प्रक्रियाओं व नीतियों पर जानकारी माध्यम से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के बीच मजबूत संबंध और नेटवर्किंग कायम करना आदि है । इस वर्ष एनएस‍आईसी “वर्किंग टेकमार्ट” के विशेष एनक्लोजर का प्रावधान रखा गया जहाँ स्वरोजगार के इच्छुक उद्यमियों के लिए समुचित प्रौद्योगिकियों जैसे सीमेंट-ब्रिक बनाने की मशीन, सोया दूध बनाने की मशीन, फूड प्रोसेसिंग की मशीन, कील बनाने की मशीन, नालेदार (कारूगोटिड) गत्ते को बॉक्स बनाने की मशीन, नोटबुक बनाने की मशीन, दाना बनाने की मशीन, इन्डस्ट्रियल फर्नेस, आयल एक्सपेलर डेयरी फूड, बैल्ट फास्टनर आदि प्रदर्शित की गई । इस प्रदर्शनी के अन्य आकर्षण थे- सेन्टल वूल डेवलपमेंट बोर्ड, जोधपुर की विशेष प्रदर्शनी, महिला उद्यमियों एवं अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति से सम्बद्ध यूनिटों तथा पूर्वोत्तर राज्यों की यूनिटों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों का प्रदर्शन आदि । &lt;br /&gt;व्यापार मेले के नाम पर नियमों की अनदेखी -&lt;br /&gt;विदेशों में व्यापार मेलों के नाम पर इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन में कबूतरबाजी जोरों पर है । दो उप-प्रबंध स्तर के अधिकारियों पर आरोप है कि वह नियमों को ताक पर रखकर बार-बार विदेश यात्रा कर रहे हैं और करोड़ों डकार कर दूसरे लोगों को भी विदेश यात्रा करा रहे हैं । &lt;br /&gt;सूत्रों के मुताबिक आईटीपीओ में अधिकारियों को विदेश भेजने से लेकर व्यापारिक फर्मा के नाम पर विदेश यात्रा करने वालों के चयन में करोड़ों रूपए की धांधली हो रही है । मामला नव नियुक्‍त मुख्य प्रबंध निदेशक सुवास पाणि की जानकारी में भी आ चुका है । पर वह अभी दबाए बैठे हैं । जल्द ही मामला सीबीआई के हवाले किया जा सकता है । मामले को लेकर प्रगति मैदान में अफरा तफरी का माहौल है । यदि समय से सीबीआई की कार्रवाई होती है तो आईटीपीओ के कई वरिष्ठ अधिकारियों की गर्दन फंस सकती है । दर‍असल आईटीपीओ द्वारा भारत सरकार की ओर से दूसरे देशों में हर साल ५० से ६० मेलों का आयोजन किया जाता है । औसतन एक मेले पर सरकार द्वारा एक करोड़ रूपए से ज्यादा की राशि खर्च की जाती है । आरोप है कि मेलों में भागीदारी के लिए जाने वाली १० कंपनियों में से दो फर्जी भी होती हैं । कई मामलों में एक ही कंपनी के लोगों को बार-बार विदेश यात्रा पर भेजा जाता रहा है । &lt;br /&gt;उप-प्रबंधक हितेश सेठी ने २००७ से अक्टूबर २००९ के बीच पांच-छह विदेश यात्राएं कर चुके हैं । इनमें २००७ में दिसंबर में चीन, २००८ में जून में ब्राजील, सितंबर में फ्रांस अक्टूबर में सिंगापुर, २००९ में अप्रैल और मई में कजाकिस्तान की यात्रा पर जा चुके हैं । &lt;br /&gt;आईटीपीओ द्वारा क्रम और वरिष्ठता के आधार पर अधिकारियों को विदेशों में आयोजित होने वाले मेलों में भेजा जाता है । इसके लिए बाकायदा एक समिति द्वारा नामों का चयन किया जाता है । पर कुछ अधिकारियों का आरोप है कि लंबे समय से इस समिति की कोई बैठक नहीं हुई और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा खुद नाम तय करके अधिकारियों को बाहर भेजा जा रहा है । वरिष्ठ प्रबंधक वीपी रस्तोगी सहित लगभग चार दर्जन ऐसे वरिष्ठ अधिकारी हैं जो पिछले ५ से १० साल से विदेश यात्रा पर नहीं जा पाए । ऐसे में कई वरिष्ठ अधिकारियों में इस घपलेबाजी को लेकर उबाल है । जल्द ही यह मामला सीबीआई तक जा सकता है । &lt;br /&gt;आईटीपीओ के वरिष्ठ महाप्रबंधक सफदर एच खान ने भी माना कि यह लोग कुछ ज्यादा ही विदेश यात्राएं कर चुके हैं । उन्होंने बताया कि यह मामले पूर्व निदेशक डॉ. शीला भिडे के समय के हैं । अब नए निदेशक आए हैं तो नई व्यवस्था तय की जाएगी ।  &lt;br /&gt; - गोपाल प्रसाद&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-6066929945276458899?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/6066929945276458899/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2009/12/blog-post_9114.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/6066929945276458899'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/6066929945276458899'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2009/12/blog-post_9114.html' title='अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला २००९ भारत के आधुनिक छवि की प्रस्तुति'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-3166529360851376860</id><published>2009-12-07T22:46:00.000-08:00</published><updated>2009-12-07T22:48:20.438-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='[समसामायिक]'/><title type='text'>26/11  की बरसी या हमारे स्वाभिमान की बरसी</title><content type='html'>२६ नवंबर २००८ को भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई को कथित पाकिस्तानी आतंकवादियों ने सिलसिलेवार बम धमाकों और गोलियों के बौछार से दहला दिया । इस हमले में १७३ लोग मारे गये और ३०८ लोग घायल हो गये । &lt;br /&gt;इस घटना में मुंबई की शान समझे जाने वाले ताजमहल होटल को मुख्यतः निशाना बनाया गया था । यह हमला पूरे विश्‍व में ११/९ की तरह २६/११ के नाम से जाना जा रहा है । &lt;br /&gt;अब २६ नवंबर को इसकी बरसी मनाई जाएगी । क्या भारत में लोग सिर्फ आतंकवादी हमलों की बरसी मनाने के लिए बैठे हैं? रायटर की एक रिपोर्ट के मुताबिक सन २००१ से लेकर अक्टूबर २००७ तक ५९९ लोग आतंकवादी हमलों में मारे जा चुके हैं । आखिर ये क्या चल रहा है इस देश में अब जन्मदिन का उत्सव कम और श्राद्ध क्रियाऐं ज्यादा होने लगे है । आखिर ये सब कब तक चलेगा? &lt;br /&gt;मुंबई हमले में पकड़े गये एक मान आतंकवादी अजमल कसाब के पाकिस्तानी होने के पक्‍के सबूत भारत के पास है । भारत में आतंकी साजिशें कितनी गहरी होती हैं, इसका अंदाजा अभी हाल ही में अमेरिकी खुफिया पुलिस द्वारा अमेरिका में ही गिरफ्तार हेडली और उसके दोस्त तहखूर राणा से हो जाता है । &lt;br /&gt;ये दोनों पाकिस्तान के लिए काम करते थे । इन दोनों का पाकिस्तान के उच्च आयोग से लगातार संपर्क था और इन दोनों के तार २६/११ के हमले से जुड़ते जा रहे हैं । हेडली नाम का ये शख्स पैदा कहीं हुआ, पढ़ाई-लिखाई कहीं हुयी और अपनी आतंकी कारमुजरियों को अंजाम उसने भारत में दिया । भारत के किसी भी स्थान पर कोई भी आतंकवादी घटना अगर घटी है, हो उसका सूत्र किसी ना किसी प्रकार से पाकिस्तान से ही जुड़ा है । हम जानते हैं कि हमारे देश वो अस्थिर करने की साजिश सीमा पार में लगातार चल रही है । वहाँ पर लगातार आतंकवादी संगठनों के सदस्यों को तरह-तरह के प्रशिक्षण देकर भारत भेजा जा रहा है आतंक फैलाने के लिए । आये दिन कई स्थानों पर आतंकवादी, खुफिया विभाग के लोग जासूस पकड़े जाते हैं, सभी कबूल करते हैं कि उनका लिंक पाकिस्तान है । जब भारत सरकार अच्छी तरह से जानती है कि देश की अस्थिरता में पाकिस्तान का हाथ है तो कार्यवाही क्यों नहीं हो रही है? अखिर हम कहाँ कमजोर पड़ रहे हैं । एक नजर डालते हैं भारत की संपूर्ण शक्‍ति के उपर ः- &lt;br /&gt;भारत की जनसंख्या दूसरे स्थान पर सबसे ज्यादा है । भारत की जनसंख्या २००८ में १,१३९,१६४,९३२ थी । ये है भारत का मैन पावर । हमारा देश विश्‍व का सबसे तेजी से उभरता हुआ आर्थिक महाशक्‍ति है । हम संयुक्‍त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता पाने के प्रबल हकदार है । भारत जी २० देशों का सदस्य है । भारत सार्क देशों का सदस्य है । भारत ब्रिक देशों का सदस्य है । भारत की सैनिक शक्‍ति विश्‍व में चौथी है । &lt;br /&gt;भारत का मित्र रूस व जापान है, यूरोपिय देश क्रांस, इंग्लैड, जर्मनी, इटली आदि है । भारत की पूरे विश्‍व में पूछ है । भारत की पूरे विश्‍व में एक अलग पहचान है । तो आखिर आतंकवाद के मामले में हम कहाँ पिछड़ रहे हैं । २००८ में दिल्ली, मुंबई, जयपुर के आतंकवादी घटनाओं पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार से जो कुछ किया वह काफी है । हमारे देश के दुश्‍मन ऐसी कार्रवाइयों से डरने वाले नहीं हैं । हम जानते हैं कि भारत शांतिप्रिय देश हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई हमारे मुंह पर थूक कर चला जाए और हम उसका अफसोस मनाते रहें । भारत की इन्हीं कमजोरियों का फायदा उठाकर पहले भी कई जघन्य घटनाऐं होती रही हैं । कुछ सालों पहले हमारे BSF के २७ वीर जवानों की बी.डी.आर (बांग्लादेश राईफल्स) ने किसी विवाद को लेकर नृशंस हत्या कर दी एवं उनके कटे-कटाऐं शव भारतीय सीमा में फेक दिये । &lt;br /&gt;भारत के ओर से भी गयी जवाबी कार्रवाई संतोषप्रद नहीं लगी । हमारे सबसे अच्छे पड़ोसी देश का तहमा हासिल किये हुए देश नेपाल में माओवादी नेता प्रचंद भारत विरोधी टिप्पणियाँ जिस अंदाज में करता है, उससे मालूम पड़ता है कि शायद भारत भूटान जैसे देशों के समक्ष खड़ा है । उस समय हमारे विश्‍व की तिसरी आर्थिक भयशक्‍ति बनने वाली बात कहाँ गुम हो जाती है पता नहीं चलता । हम जानते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर का मुद्‌दा बेहद संवेदनशील है, लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं कि पाकिस्तान इसका फायदा उठाकर हमारे देश के निरापराध लोगों की हत्या करवाता रहें और हमारी सरकार चुपचाप तमाशा देखती रहे । हम जानते हैं कि नक्सली हमारे देश को उसी तरीके से चाटते जा रहे हैं, जिस प्रकार से दीमक लड़की को चाटता है, लेकिन फिर सरकार अपनी नई-नई रणनीतियाँ नक्सली समस्या के लिए बनाती रहती है । &lt;br /&gt;नक्सली लैंड माईन बिछाकर एक बार में कई पुलिस व अन्य सुरक्षाबलों के जवानों को असमय मौत की नींद सुला देते हैं, लेकिन हमारी सरकार इस पर सिर्फ विचार करती है । अब अजमल कसाब को ही ले लीजिए बरसी आने वाली है २६/११ की लेकिन ये आतंकवादी अब भी चैन की नींद सोकर नये-नये ख्याब बुन रहा है । ऐसा क्यों हो रहा है, क्योंकि हमारी सरकार पिछले सालभर से उस पर मुकदमा जो चला रही है । उसने तो मुंबई में अंधाधुंध गोलियां चलाकर कई घरों को उजाड़ दिया लेकिन हम उसपर मुकदमा चलाकर अपने कर्तव्यनिष्ठ होने का स्वांग रच रहे हैं । वह कसाब कभी कबाब खाने की माँग रखा है तो कभी कुछ और भौतिक सुख-सुविधा की बात करता है । आखिर हम उसकी क्यों सुन रहे हैं? क्या पूरे विश्‍व को यह नहीं पता है कि पाकिस्तान में आतंकवादी ट्रेनिंग कैप चल रहे हैं और वहीं से भारत में आतंकवादी हमले करवाये जा रहे हैं । &lt;br /&gt;अमेरिका के उपर जब हमला हुआ तो उसने इराक और अफगानिस्तान में अपने बल का प्रयोग कर के दिखा दिया कि अगर उसकी तरफ किसी ने आँख उठाकर देखा भी तो वो उसका क्या हर्ष होगा । क्या हमें इस आतंकवाद रूपी दरिन्दो को कोई ऐसा मुंह तोड़ जवाब नहीं देना चाहिए? यदि हम ऐसा कर रहे है तो फिर २६/११ की बरसी हमारे स्वाभिमान की बरसी है । इसलिए भारत को क्या अमेरिका से रूबरू होना चाहिए? फैसला आपके ऊपर । &lt;br /&gt;  [अमेरिका के उपर जब हमला हुआ तो उसने इराक और अफगानिस्तान में अपने बल का प्रयोगकर के दिखा दिया कि अगर उसकी तरफ किसी ने आँख उठाकर देखा भी तो वो उसका क्या हर्ष होगा । क्या हमें इस आतंकवाद रूपी दरिन्दो को कोई ऐसा मुंह तोड़ जवाब नहीं देना चाहिए? यदि हम ऐसा कर रहे है तो फिर २६/११ की बरसी हमारे स्वाभिमान की बरसी है । इसलिए भारत को क्या अमेरिका से रूबरू होना चाहिए? फैसला आपके ऊपर । ]&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  - धन्‍नू मिश्रा&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-3166529360851376860?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/3166529360851376860/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2009/12/2611.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/3166529360851376860'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/3166529360851376860'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2009/12/2611.html' title='26/11  की बरसी या हमारे स्वाभिमान की बरसी'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-8293489875012735318</id><published>2009-12-07T22:45:00.000-08:00</published><updated>2009-12-07T22:46:12.760-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='[समाज]'/><title type='text'>कॉमनवेल्थ गेम से आंखों में अस्थायी सुरक्षा की चमक</title><content type='html'>कॉमनवैल्थ गेम्स जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, दिल्ली को सुरक्षित और सुंदर बनाने के लिए जरूरी कामों को पूरा करने के प्रयासों में भी तेजी आ रही है । इन्हीं प्रयासों में से एक है दिल्ली की सड़कों पर रहने वाली बेघर महिलाओं के लिए अस्थायी तौर पर आवास की व्यवस्था करना । &lt;br /&gt;लंबे समय से माना जाता रहा है कि असामाजिक तत्वों के लिए बेघर महिलाएं सबसे आसान निशाना होती हैं । अस्थायी तौर पर ही सही, ऐसी किसी योजना का मूर्त रूप लेना महिलाओं के खिलाफ होने वाली आपराधिक गतिविधियों को कम करने में सहायक होगा । अगर योजना जल्द ही अमल में आ सकी तो बेघर महिलाओं में से कुछ को भीषण सर्दी की मार से बचाने में भी मदद मिल सकेगी । &lt;br /&gt;दिल्ली महिला आयोग की इस योजना के अनुसार, अस्थायी निवास में आधारभूत सुविधाओं की व्यवस्था होगी, जिसमें एक आवास में ५० से ६० महिलाएं ७ से १० दिनों के लिए ठहर सकेंगी । गैर अधिकारिक आंकड़ों की मानें तो दिल्ली में लगभग डेढ़ लाख लोग बेघर हैं, जिनमें महिलाओं की संख्या दस हजार है । इनमें भी बड़ी संख्या युवा महिलाओं और सिंगल मदर की है । ‘आश्रय अधिकार अभियान’ नामक एनजीओ और इंस्टिट्‌यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार बेघर महिलाओ में से ७७.६ प्रतिशत १६ से ४५ वर्ष की उम्र की हैं । सर्वे में यह भी सामने आया है कि सड़कों पर जीने को मजबूर ९८ प्रतिशत महिलाएं किसी न किसी शोषण का शिकार होती हैं । &lt;br /&gt;हालांकि बेघर महिलाओं की संख्या को देखते हुए एक अस्थायी शेल्टर प्रयास नाकाफी है, पर आयोग के अनुसार समय के अनुसार आवास घरों की संख्या और क्षमता को बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किया जाएगा । &lt;br /&gt;दिल्ली महिला आयोग का मानना है कि इस योजना से कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान शहर की महिलाओं की सुरक्षा के संबंध में सकारात्मक छवि पेश करने में भी मदद मिलेगी । योजना को मूर्त रूप देने के लिए विभिन्‍न एनजीओ से भी बातचीत की प्रक्रिया शुरू हो गई है । जानकारी के अनुसार आयोग द्वारा २२ स्वयंसेवी संगठनों से इस संबंध में बातचीत की जा रही है । संभावना है कि यह आवास साल के आखिर तक पूरा हो जाएगा । इससे आगामी सर्दियों में भी कुछ महिलाओं को राहत मिल सकती है । वर्तमान में राजधानी में तीन शेल्टर निर्मल छाया, यंग वुमन क्रिश्‍चियन एसोसिएशन और बापनो घर, बेघर महिलाओं के लिए कार्य कर रहे हैं । झंडेवालान, निजामुद्दीन, कालकाजी, जामा मस्जिद, फाउंटेन चौक और जमुना बाजार कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जहां बेघर लोगों की संख्या सबसे अधिक देखने को मिलती है । &lt;br /&gt;                                                                       - पूनम जैन&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-8293489875012735318?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/8293489875012735318/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2009/12/blog-post_1548.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/8293489875012735318'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/8293489875012735318'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2009/12/blog-post_1548.html' title='कॉमनवेल्थ गेम से आंखों में अस्थायी सुरक्षा की चमक'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-6342416035885894853</id><published>2009-12-07T22:43:00.000-08:00</published><updated>2009-12-07T22:44:50.698-08:00</updated><title type='text'>अरूणाचल प्रदेश के छात्रों-युवाओं की माँग पर सरकार का ध्यान नहीं</title><content type='html'>ऑल अरूणाचल प्रदेश स्टूडेन्ट्‍स यूनियन के छात्रों ने चीनी दूतावास के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया ।  AAPSU  कार्यकर्त्ता अरूणाचल प्रदेश पर चीन के अवैध दावे का विरोध कर रहे थे । ज्ञात हो कि पिछले दिनों चीन ने भारत के प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह तथा धर्म गुरू दलाई लामा के अरूणाचल प्रदेश जाने पर आपत्ति जाहिर की थी । &lt;br /&gt;  AAPSU  कार्यकर्त्ता अध्यक्ष श्री ताकम तातुन के अगुवाई में करीब १ बजे अपरान्ह चीनी दूतावास के सामने एकत्रित हुए तथा उन्होंने जमकर विरोध प्रदर्शन किया । छात्र ‘चीनी चोट, बुरी नियत छोड़” तथा “ we Born in India/ we will dil in India''  के नारे लगा रहे थे । प्रदर्शन में सैकड़ों छात्र उपस्थित थे । प्रदर्शन कर रहे छात्रों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया इन्हें चाणक्य पुरी थाने ले गयी । ज्ञात हो  AAPSU  ने कल इन्हीं मुद्‌दों को लेकर जन्मर-मन्तर पर प्रदर्शन किया था तथा प्रधानमंत्री की ज्ञापन दिया था । &lt;br /&gt;  बाद में प्रेस क्लब में मीडिया को सम्बोधित करते हुए अध्यक्ष ताकम तातुम ने कहा अरूणाचल प्रदेश स्टूडेन्ट यूनियन अरूणाचल प्रदेश पर चीन के दावे का पुरजोर विरोध करती है । तथा अरूणाचल प्रदेश के समस्त छात्रों तथा नागरिकों की ओट से यह सन्देश देना चाहती है अरूणांचल प्रदेश भारत का अभिन्‍न अंग है तथा रहेगा ।  AAPSU  के महासचिव तोजम पीएम ने कहा कि १९६२ के युद्ध में सबसे ज्यादा भारतीय सेना के जवान किबतु पोस्ट पट शहीद हुए थे । आज इस पोस्ट की सुरक्षा के लिये केवल एक कम्पनी ही तैनात किया है । जबकि इस पोस्ट के ठीक सामने चीनी सेना का एयरपोर्ट तथा शिविर है ।  AAPSU सरकार से माँग करता है किबतु तथा ऐसे ही अन्य संवेदनशील पोस्ट पर अधिक सुरक्षा के प्रबन्ध किये जायें ।  AAPSU ने माँग की है अरूणाचल प्रदेश के विकास व सुरक्षा के लिये विशेष कार्य योजना तैयार की जाये ।  AAPSU  ने इस मुद्‌दे पर देशव्यापी आन्दोलन छेड़ने का आह्‍वान किया है । &lt;br /&gt;       - तीवम दाई , प्रवक्‍ता  AAPSU&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-6342416035885894853?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/6342416035885894853/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2009/12/blog-post_3479.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/6342416035885894853'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/6342416035885894853'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2009/12/blog-post_3479.html' title='अरूणाचल प्रदेश के छात्रों-युवाओं की माँग पर सरकार का ध्यान नहीं'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-3535316522312966217</id><published>2009-12-07T22:40:00.000-08:00</published><updated>2009-12-07T22:42:40.460-08:00</updated><title type='text'>आतंकवाद के खात्में के लिए महारूद्राभिशेक</title><content type='html'>विश्‍व की सबसे बड़ी समस्या बनते जा रहे आतंकवाद से निपटने के लिए अब धार्मिक क्षेत्रों से भी पहल होने लगी है । पिछले दिनों राजधानी दिल्ली में उज्जैन के विश्‍व प्रसिद्ध महाकालेश्‍वर मंदिर के मुख्य पुजारी रमण गुरू ने यही अनूठा प्रयोग किया । बिड़ला मंदिर में आयोजित इस रूद्राभिशेक कार्यक्रम में धर्म, अध्यात्म के जरिये आतंकवाद की समूल नष्ट करने के लिए भव्य आयोजन हुआ । जिसमें देश भर से आये ४०० लोगों ने एक स्वर से धर्म के मूल तत्वों को अपनाने, मानवता को मजबूत करने के लिए महारूद्राभिशेक में शिरकत की । इस अनूठे आयोजन में प्रथमतः महालेश्‍वर मंदिर के मुख्य पुजारी रमण गुरू ने देश भर में आतंक के खात्में के लिए आये ४०० लोगों के बीच शिवालिंग-रूद्राभिशेक किया । तत्पश्‍चात्‌ लोगों को शपथ दिलायी कि - “हम देशहित, समाजहित में आतंकी खात्मे के लिए प्राणपण से जुटेंगे ” । मुख्य पुजारी रमण गुरू ने तत्पश्‍चात लोगों के महाकालेश्‍वर के उद्‌घोष “जय महाकाल” के जरिये आत्म विभोर कर दिया । समाज हित के लिए दयानंद सरस्वती, महात्मा गांधी एवं सरहदी गांधी की तर्ज पर इस आयोजन को आगे बढ़ाने के लिए जन सहयोग की अपील की । उपस्थित भक्‍तों, बुद्धिजीवियों एवं राजनीतिज्ञों ने आतंकवाद के खात्मे के लिए मुख्य पुजारी रमण गुरू को शपथ दिलाकर धार्मिक मूल्यों को बढ़ाने की सहमति जतायी । इस अनूठे कार्यक्रमों को सम्पन्‍न कराने में क्षेत्रीय एस०डी०एम० भूपिन्दर सिंह, ज्योतिषाचार्य शिवहर्ष मिश्र एवं डॉ० जयशंकर पाण्डेय का सराहनीय योगदान रहा ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-3535316522312966217?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/3535316522312966217/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2009/12/blog-post_1220.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/3535316522312966217'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/3535316522312966217'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2009/12/blog-post_1220.html' title='आतंकवाद के खात्में के लिए महारूद्राभिशेक'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-1045952953756971629</id><published>2009-12-07T22:38:00.000-08:00</published><updated>2009-12-07T22:39:56.308-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='(पुस्तक समीक्षा)'/><title type='text'>बच्चों में पर्यावरण चेतना जगाती है यह</title><content type='html'>एक कहावत है जिसका अर्थ है- मूर्ति देखने में छोटी तो होती है किन्तु मान्यता या प्रभविष्णुता में विराट । कमोवेश यही बात समीक्ष्य पुस्तिका “सुबह सवेरे” के लिए सुसंगत है । बहुश्रुत एवं बहुपठित लेखनधर्मी डॉ. ए. कीर्तिवर्द्धन की यह चौथी कृति है किन्तु बालोपयोगी होने के कारण पूर्व कृतियों से भिन्‍न है । &lt;br /&gt;  अल्पवयी पाठकों को सम्बोधित करते हुये कृतिकार चिड़ियों की सामान्य प्रसन्‍नता का कारण यह बताते हैं कि वह हमेशा गाया करती हैं । बच्चों को प्रसन्‍न देखते रहने के लिये ही उनकी सलाह है कि सुबह-सवेरे की कवितायें वह गायें और चिडियों की तरह ही प्रसन्‍न रहा करें- ऐसा करने से वह स्वस्थ भी रहेंगे, जीवन में यशार्जन भी करेंगे । &lt;br /&gt;सोलह पृष्ठों में बड़े अक्षरों में सुमुद्रित कृति बच्चों ही नहीं, सभी आयुवर्ग के पाठकों के लिये पठनीय है । सुबह-सवेरे शीर्षक वाली एक लम्बी रचना विशेषकर बच्चों को सूर्योदय से पूर्व जागकर अपने माता-पिता के चरण स्पर्श करने के उपरान्त समस्त रोजमर्रा की प्राकृतिक जरूरतों से निपटने स्नान-ध्यान के अलावा पक्षियों का कलरव सुनने, साफ-सुथरी हवा में विचरण करने, अपना-अपना भविष्य उत्कर्षमय बनाने के लिए उपवन में खिलखिला रहे फूल, तितलियाँ और भँवरे तथा पूर्व दिशा में उगते बालारूण को देखकर आनंदित होने की सलाह करते हैं । एक अन्य कविता भी इस कृति में सुलभ है जिसमें बच्चे ज्ञान की देवी माँ वीणापाणि से प्रार्थना करते हैं कि वह उन्हें सुशिक्षित बनावें, परोपकारी और बालक श्रवण कुमार की तरह ही मातृ-पितृ भक्‍त भी । वह आपसी ईर्ष्या-द्वेष शून्य, शान्तिप्रिय तथा शक्‍तिमान भी बनाने और महाराणा प्रपात, शिवाजी, गौतम बुद्ध तथा महावीर के बताये मार्ग पर गतिशील रहने की विनती भी करते हैं । &lt;br /&gt;  प्रत्येक पृष्ठ पर बड़े ही आकर्षक रेखाचित्र इस कृति की जान हैं । कवितायें और ये चित्र समवेत रूप से सोना और सुहागा की भूमिका अदा करते हैं । कृति की दोनों ही रचनायें सर्वथा सरल तथा सुग्राह्य भाषा में होने के कारण उनका संदेश पाठकों तक जाता है । बालोपयोगी रचनाओं की इस पुस्तिका के लिए रचनाकार के अलावा प्रकाशक, वितरक तथा रेखा चित्रकार समान रूप से साधुवाद के पात्र हैं । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पुस्तक-“सुबह सवेरे"&lt;br /&gt;रचनाकार- डॉ. ए. कीर्तिवर्द्धन                                                         डॉ. कौशलेन्द्र पाण्डेय(लखनऊ)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-1045952953756971629?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/1045952953756971629/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2009/12/blog-post_5728.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/1045952953756971629'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/1045952953756971629'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2009/12/blog-post_5728.html' title='बच्चों में पर्यावरण चेतना जगाती है यह'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-6857207589827533740</id><published>2009-12-07T22:37:00.000-08:00</published><updated>2009-12-07T22:38:26.921-08:00</updated><title type='text'>बच्चों की पसंदीदा हीरो:गणेश,हनुमान और कृष्ण</title><content type='html'>भारत में बनने वाली कार्टून फ़िल्मों में पिछले कुछ समय से पौराणिक पात्रों पर आधारित फ़िल्मों में बढ़ोत्तरी हु‌ई है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इनकी लोकप्रियता बाल गणेश, मा‌ई फ्रेंड गणेश, हनुमान, रिटर्न ऑफ हनुमान जैसी फ़िल्मों की सफलता से साफ़ झलकती है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    पौराणिक कथा‌एं और उनके किरदार, उनके हाव-भाव, उनकी शक्तियां, बहुत ही दिलचस्प हैं. एनिमेशन और स्पेशल इफेक्ट्स के माध्यम से ये सब अनोखे तरीके से प्रस्तुत कि‌ए जा सकते हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कृष्णा देसा‌ई, डायरेक्टर, टर्नर इंटरनेशल इंडिया&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तो आख़िर क्या वजह है बच्चों में इन फ़िल्मों की बढ़ती लोकप्रियता की, एनिमेशन सिरीज़ लिटिल कृष्णा बनाने वाली बिग एनिमेशन्स के सी‌ई‌ओ आशीष कुलकर्णी का कहना है कि हिन्दुस्तानी एनिमेशन इंडस्ट्री फ़िलहाल शुरु‌आती चरण में है और एनिमेशन किरदारों को बनाने और स्थापित करने में काफ़ी समय, मेहनत और ख़र्चा लगता है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आशीष कुलकर्णी कहते हैं,” पौराणिक कथा‌ओं के पात्रों पर इसलि‌ए एनिमेशन फ़िल्म बन रही हैं क्योंकि वो किरदार और उनकी कहानियां बच्चों की जानी-पहचानी है. इसलि‌ए उन किरदारों को स्थापित करने में, उनका ब्रांड बनाने में सुविधा हो जाती है और ज़्यादा से ज़्यादा पैसा प्रोड्क्शन में लगाया जा सकता है. साथ ही माता-पिता भी चाहते हैं कि बच्चे अपनी संस्कृति के बारे में जाने.”&lt;br /&gt;पौराणिक कथा‌एँ&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;टर्नर इंटरनेशनल इंडिया के डायरेक्टर, प्रोग्रामिंग, कृष्णा देसा‌ई ने बीबीसी को बताया, ” पौराणिक कथा‌एं और उनके किरदार, उनके हाव भाव, उनकी शक्तियां, बहुत ही दिलचस्प हैं. एनिमेशन और स्पेशल इफेक्ट्स के माध्यम से ये सब अनोखे तरीके से प्रस्तुत कि‌ए जा सकते हैं. हम जब भी पौराणिक कथा‌ओं पर आधारित एनिमेशन फ़िल्म या सीरियल दिखाते हैं तो उस स्लॉट की रेटिंग्स सबसे ज़्यादा होती है.”&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एनिमेशन फ़िल्में—बाल गणेश और बाल गणेश टू के निर्देशक पंकज शर्मा की माने तो इन फ़िल्मों की व्यवसायिक सफलता या असफलता भी एक वजह है कि प्रोड्यूसर फ़िलहाल पौराणिक किरदारों पर ही आधारित फ़िल्में ज़्यादा बना रहे हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पंकज शर्मा ने बीबीसी को बताया, ” भारत में ऐसी फ़िल्मों के लि‌ए बजट भी कम होता है इसलि‌ए बहुत ज़्यादा ख़र्चा करके रिकवरी नहीं हो पाती है. ऐसे में नये किरदारों पर आधारित एनिमेशन फ़िल्म बनाने में पाश्चात्य एनिमेशन फ़िल्म्स के साथ तुलना हो जाती है."&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पौराणिक किरदारों पर बनी कार्टून फ़िल्में और सीरfयल भले ही बच्चों को पसंद आ रहे हैं और सफल भी हो रहे हैं लेकिन आशीष कुलकर्णी कहते हैं कि इन किरदारों को प्रस्तुत करना इतना आसान नहीं है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आशीष कुलकर्णी कहते हैं, ” लोगों को इनके बारे में पहले से पता होता है इसलि‌ए ग़लती की गुंजा‌इश नहीं होती. कहानी और किरदार के बारे में पूरी जानकारी के बाद ही स्क्रिप्ट बना‌ई जा सकती है जो सबसे बड़ी चुनौती है. साथ ही मुक़ाबला भी बहुत है क्योंकि और लोग भी इन कथा‌ओं पर एनिमेशन फ़िल्म बना‌एंगे. तो आपका ट्रीटमेंट इतना अलग होना चाहि‌ए कि वो बाकी से बेहतर हो.”&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वैसे ‘जम्बो’ और ‘रोडसा‌इड रोमियो’ जैसे काल्पनिक किरदारों पर आधारित एनिमेशन फ़िल्में पिछले कुछ समय में बनी हैं लेकिन वो बॉक्स ऑफ़िस पर बहुत सफल नहीं रहीं. लेकिन कृष्णा देसा‌ई कहते हैं कि अब पौराणिक कथा‌ओं के बाहर भी कहानियां बन रही हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कृष्णा देसा‌ई ने बीबीसी को बताया, ” टर्नर का एनिमेशन सीरियल ‘छोटा भीम’ पूरी तरह पौराणिक कथा नहीं है. केवल किरदार का नाम और उसकी शक्तियां पौराणिक किरदार के नाम से प्रेरित है लेकिन सारी कहानियां पूर्णत: मौलिक हैं. इसके बावजूद वो काफ़ी लोकप्रिय है. अब धीरे-धीरे एनिमेशन फ़िल्मों में पौराणिक कहानियां तो कम होंगी लेकिन उनमें इन कहानियों का कुछ न कुछ पुट तो फिर भी रहेगा.”&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-6857207589827533740?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/6857207589827533740/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2009/12/blog-post_3116.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/6857207589827533740'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/6857207589827533740'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2009/12/blog-post_3116.html' title='बच्चों की पसंदीदा हीरो:गणेश,हनुमान और कृष्ण'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-7520504980206707891</id><published>2009-12-07T22:36:00.000-08:00</published><updated>2009-12-07T22:37:13.515-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='(बाल जगत)'/><title type='text'>बाल अधिकार एवं बाल साहित्य</title><content type='html'>अगर राष्ट्र को सशक्‍त बनाना चाहते हैं तो बच्चों को शिक्षित एवं चरित्रवान्‌ बनायें । शिक्षा एवं स्वास्थ्य बच्चों का मौलिक अधिकार एवं राष्ट्रीय दायित्व हो । शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में शिथिलता एवं भ्रष्टाचार राष्ट्रीय अपराध घोषित हों । बच्चे राष्ट्र निर्माण में नींव का पत्थर तथा माँ व शिक्षक दोनों शिल्पकार होते हैं जो बच्चों को शिक्षित एवं उनके चरित्र निर्माण में सहायक होते हैं । भारतीय संस्कृति में सदैव ही इस तथ्य के महत्व को स्वीकारा गया । हमारे पौराणिक ग्रन्थ इस बात के साक्षी हैं कि सदैव ही बाल शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर राज कृपा रही और ऋषि, मुनियों, व गुरूजनों ने सबको शिक्षा देने का कार्य किया । कालान्तर में, समय विशेष के दौरान भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं विकास में न केवल रूकावटें आयीं अपितु उसका क्षरण भी हुआ । परिणामतः हमारी सोच गुलामी की ओर अग्रसर हुई और शिक्षा एक गौण विषय बन गयी । यद्यपि समय-समय पर बाल शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने पर आवाजें उठती रहीं, तथापि आजादी के ५० वर्ष बाद तक भी इसमें पूर्ण सफलता नहीं मिल सकी थी । सन्‌ १९९० में थाईलैन्ड के नगर जोमेनियन में विश्‍व शिक्षा सम्मेलन का आयोजन किया गया और ६ से १४ वर्ष तक थी आयु के बच्चों को अनिवार्य शिक्षा पर जोर दिया गया । इसके दस वर्ष पश्‍चात सन २००० में सेनेगल के शहर डकार में पुनः विश्‍व शिक्षा सम्मेलन आयोजित हुआ और २०१५ तक सम्पूर्ण विश्‍व के बच्चों को शिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया । भारत के सन्दर्भ में इसका लक्ष्य सन २०१० निर्धारित किया गया और लक्ष्य पूर्ति के लिये सम्पूर्ण देश में सर्वशिक्षा अभियान चलाया गया । इसके अन्तर्गत ६ से १४ वर्ष की आयु के बच्चों को बाधारहित (अर्थात फीस, किताबें, ड्रेस, खाना सब राज्य दायित्व) शिक्षा दिलाना राज्य का कर्तव्य तथा बच्चों का मौलिक अधिकार घोषित किया गया । इस सम्मेलन में बच्चों के स्वतंत्र व्यक्‍तित्व को स्वीकारते हुये २१ वीं सदी को बच्चों की सदी घोषित किया गया । &lt;br /&gt;  बच्चों के समग्र विकास में बाल साहित्य की सदैव प्रमुख भूमिका रही है । बाल साहित्य बच्चों से सीधे संवाद करने की प्रक्रिया है चाहे वह वाचक शैली में हो, लिखित हो, चित्रों द्वारा व्यक्‍त हो अथवा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से हो । इसकी विषय वस्तु स्वयं बालक भी हो सकता है, उसका परिवेश हो सकता है जिसमें बाल जीवन विकसित होता है अथवा काल्पनिक हो सकता है । बाल साहित्य में मनोरंजन, बाल मनोविज्ञान, सामाजिक-सांस्कृतिक परम्पराओं, संस्कारों, जीवन-मूल्यों, आचार-विचार और व्यवहार का समायोजन होना आवश्यक है । बाल साहित्य की भाषा सरल, रोचक, मनोरंजक, एवं उत्सुकता पूर्ण होनी चाहिये । और यह तभी संभव है जब बाल साहित्यकार स्वयं को बालमन के अनुसार ढालने में सक्षम हो । यह सत्य है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के आगमन से बच्चों की सोच में व्यापक परिवर्तन हुये हैं परन्तु वाचक और लिखित परम्परा के प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता । हेरी पॉटर पात्र को केन्द्र में रख लिखी गई पुस्तक ने रिकार्ड बिक्री की, जो बच्चों में पुस्तकों की वर्तमान लोकप्रियता का सूचक है । आज आवश्यकता यह जानने और समझने की है बच्चों को कल साहित्य से कैसे जोड़ा जाये? इस विषय की गहराई तक जाने के लिये हमारे नीति-निर्धारकों एवं शिक्षा शास्त्रियों को पश्‍चिम जगत की शिक्षा-नीति का अन्धानुकरण बन्द करना होगा । अपने कार्यालयों के वातानुकुलित कमरों से बाहर आकर भारतीय परिवेश में आधुनिकता का समायोजन कर नीति बनानी होगी । पश्‍चिम जगत की खोखली, दूषित शिक्षा प्रणाली के कारण असमय ही बच्चे तनाव ग्रस्त एवं प्रौढ़ लगने लगते हैं । कुंठा, हिंसा एवं उन्मुक्‍त यौन जीवन पश्‍चिम की दूषित तथा बच्चों पर मात्र बोझ बनने वाली शिक्षा प्रणाली से बचाना होगा । बाल साहित्य में पारम्पारिक गीत, कहानी, हितोपदेश, जातक कथायें, रामायण, महाभारत जैसे ग्रन्थों के बालोपयोगी प्रसंग, देशभक्‍ति, विज्ञान, हास्य, चुटकले, पहेली, बच्चों की स्वयं की कवितायें, पशु, पक्षी, जानवर, पेड़-पौधे, धरती, आसमान आदि सभी विषयों को शामिल करना होगा । &lt;br /&gt;दादा-दादी, नाना-नानी, माँ-बुआ द्वारा जारी वाचक परम्परा को पुनः जीवित करना होगा । यात्रा के रोचक प्रसंगों द्वारा बच्चों को शब्दों में विश्‍व भ्रमण पर ध्यान देना होगा । यदि हम ऐसा कर पाये तो निश्‍चित रूप से आने वाली सदी भारतीय बच्चों की होगी और सम्पूर्ण विश्‍व पर भारतीय संस्कृति का विजय ध्वज फहरायेगा । &lt;br /&gt;                                                        - डॉ ए. कीर्तिवर्द्धन&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-7520504980206707891?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/7520504980206707891/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2009/12/blog-post_9390.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/7520504980206707891'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/7520504980206707891'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2009/12/blog-post_9390.html' title='बाल अधिकार एवं बाल साहित्य'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-9070857597282026402</id><published>2009-12-07T22:34:00.000-08:00</published><updated>2009-12-07T22:35:45.962-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='ज्योतिष'/><title type='text'>२०१२ में प्रलय की भविष्यवाणी एक कोरी कल्पना</title><content type='html'>आये दिन दुनिया की समाप्ति एवं प्रलय की भविष्यवाणियाँ तो लोगों के मन में भय व्याप्त करती रहती हैं, पिछले दिनों २०१२ में दुनिया समाप्ति की खबर से लोगों के मन में डर तो बना ही हु‌आ है साथ ही समय-समय पर प्राकृतिक आपदा‌ओं को लोग २०१२ की भविष्यवाणी से जोड़ कर देखने लगे हैं और भयग्रस्त हो गये हैं।  &lt;br /&gt;वैसे ऋग्वेद व पुराणों के अनुसार सौर-मंडल के किसी भी ग्रह पर जीवन की उत्पत्ति से प्रलय तक के समय को चार युगों में बाँटा गया है । पहला युग सतयुग जिसकी आयु १७,२८००० वर्ष मानी गयी है । इसके बाद त्रेतायुग की आयु १२,९६०००वर्ष मानी गयी है और उसके बाद द्वापर युग की आयु ८,६४००० वर्ष मानी गयी है और द्वापर युग के भगवान कृष्ण का जन्म लगभग ५००० वर्ष पूर्व हु‌आ था और पौराणिक कहानी के अनुसार युधिष्ठिर के पोते राजा परीक्षित के समय से कलयुग प्रारम्भ हु‌आ । इस प्रकार पौराणिक कथा के और ऋग्वेद के अनुसार भी अभी ४,२५००० वर्ष कलयुग के शेष हैं । जहाँ तक दुनिया की समाप्ति की भविष्यवाणियाँ हैं तो मैं एक बात बहुत ही मजबूती से कहना चाहूंगा की अभी पृथ्वी के क‌ई हजार वर्ष शेष हैं । इसे समझने के लि‌ए हमें अपने सौर-मण्डल का संक्षिप्त रूप समझना होगा । हमारे सौर -मण्डल में सूर्य के चारों ओर एक निश्चित कक्षा में भ्रमण करने वाले नौ ग्रहों के साथ-साथ उनके उपग्रह भी हैं । ये सभी ग्रह सूर्य के ही अंग हैं । जो सूर्य की अक्षीय गति से अन्तः-आणविक ऊर्जा के ह्रास के कारण अस्तित्व में आये हैं । सूर्य तथा अन्य ग्रहों के मध्य कार्यरत अभिकेन्द्रीय बल एवं अपने सौर मण्डल के बाहर से कार्यरत उत्केन्द्रीय बल के कारण ये सभी अपने अक्ष पर भ्रमण करते हैं । एक सौर-मंडल में एक समय में सिर्फ एक ही ग्रह पर जीवन संभव है जो कि वर्तमान पृथ्वीय कक्षा में है । इसी कक्षा में वे सभी कारक मौजूद हैं जो जीवन के लि‌ए आवश्यक हैं, जैसे ऑक्सीजन, तापमान, जीवद्रव्य, ओजोन की परत, जल आदि । पृथ्वी की कक्षा से बाहर का तापमान इतना कम है वहाँ जीवन संभव नही है इसी तरह बुद्ध तथा शुक्र ग्रह पर तापमान इतना अधिक है जो जीवन के लि‌ए उपयुक्त नहीं है । लेकिन यह पृथ्वी के निरन्तर अक्षीय गति से ह्रास अन्तरा आणविक ऊर्जा के कारण सूर्य और पृथ्वी के बीच कार्यरत अभिकेन्द्रीय बल धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है और सौर मण्डल के बाहर से कार्यरत उत्केन्द्रीय बल मजबूत हो रहा है जिससे पृथ्वी अपनी कक्षा से धीरे-धीरे बाहरी कक्षा की ओर खिसक रही है । यही स्थिति हमारी पृथ्वी को धीरे-धीरे जीवन के अनुकूल वातावरण की समाप्ति की ओर ले जा रही है और यही प्रक्रिया हमारे सौर मण्डल में विद्यमान सभी ग्रहों के बीच कार्यरत है । इसी उपरोक्त सौर मण्डल की निश्चित प्रक्रिया के तहत आज से काफी समय पूर्व कभी मंगल भी पृथ्वी वाले कक्षा में भ्रमण करता था । और तब मंगल पर भी जीवन विद्यमान था लेकिन समय के साथ उस अभिकेन्द्रीय बल के सापेक्ष उत्केन्द्रीय बल का मजबूत  होने के कारण मंगल मिलकर अपने वर्तमान कक्षा में भ्रमण कर रहा है जिससे उस पर तापमान घटने से जीवन की समाप्ति हु‌ई । इसी प्रक्रिया के तहत पृथ्वी पर जीवन की समाप्ति उसकी सूर्य से अभिकेन्द्रीय बल के धीरे-धीरे कमजोर होने के कारण और सूर्यसे दूरी बढ़ने एवं उस पर तापमान की कमी के कारण ही संभव है जिसे होने में अभी क‌ई लाख वर्ष शेष हैं ।&lt;br /&gt;क्योंकि पृथ्वी की समाप्ति के लि‌ए दो बात लिखित रूप से वैज्ञानिक आधार पर होना चाहि‌ए । पहला यह कि पृथ्वी की अक्षीय गति से ह्रास अन्तरा आणविक ऊर्जा से पृथ्वी की आणविक सह-संजन बल का कमजोर होना, दूसरा इसके द्वारा एक और दूसरे उपग्रह की उत्पत्ति तभी पृथ्वी की एक बहुत बड़े हिस्से की समाप्ति एवं भौगोलिक परिवर्तन होना और इसमें अभी कम से कम लाखों वर्ष लग सकते हैं, क्योंकि अभी पृथ्वी आन्तरिक सह संजन बल काफी मजबूत है । यह बात अलग है कि हमारे सौर मंडल में ९ ग्रहों में तीन-तीन ग्रहों का समूह है जो तीन अलग प्रकृति को सन्तुलित करते हैं । यह तीनों क्रमशः अग्नि, वायु एवं ठंडा (बर्फ) प्रकृति प्रतिनिधित्व करते हैं और ग्रहों के सन्तुलित संयोग से इन प्रवृत्तियों में सन्तुलन बना रहता है, जिससे वातावरण या प्रकृति संतुलित रहती है, परन्तु हर ९ वर्ष में ग्रहों की आपसी संयोग और स्थिति से किसी एक प्रकृति की प्रबलता बढ़ती है । इसमें उपरोक्त सारी बातें एक साथ कार्य करती हैं, जिससे बीच-बीच में प्रकृति का सन्तुलन बनता-बिगड़ता रहता है । इसे प्रलय का अनुमान लगाना गलत होगा । &lt;br /&gt;                     इस प्रकार उपरोक्त बातें यह सुनिश्चित करती हैं कि पृथ्वी पर जीवन की समाप्ति धीरे-धीरे तापमान घटने से होगी ।  परन्तु अभी पृथ्वी पर काफी तापमान है । जहाँ तक पृथ्वी फटने की बात है तो आज से हजारों वर्ष पूर्व पृथ्वी पर सूखा पड़ा, पृथ्वी फटना आम बात थी यह प्रक्रियायें ज्यादा होती थीं, क्योंकि तब पृथ्वी का तापमान ज्यादा था । लेकिन हम आधुनिकता एवं भौतिकता के कारण ज्यादा कमजोर हो गये हैं और छोटी-छोटी प्राकृतिक आपदा‌ओं से सशंकित हो गये हैं । इस प्रकार मैं कहना चाहूंगा कि घबराने की को‌ई बात नहीं है यह सब ग्रहों की असन्तुलित स्थिति के कारण प्राकृतिक घटना है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;                                                                 कृष्ण गोपाल मिश्रा&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-9070857597282026402?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/9070857597282026402/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2009/12/blog-post_1885.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/9070857597282026402'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/9070857597282026402'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2009/12/blog-post_1885.html' title='२०१२ में प्रलय की भविष्यवाणी एक कोरी कल्पना'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-479202001385083474</id><published>2009-12-07T22:32:00.000-08:00</published><updated>2009-12-07T22:34:14.507-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='धर्म-अध्यात्म'/><title type='text'>भारतीय नववर्ष तथा कालगणना</title><content type='html'>प्राचीन काल में मुर्गे की बाँग, पक्षियों की उड़ान आकाश में चाँद, तारों व सूर्य की स्थिति, सूर्य की किरणों के कारण वृक्ष, पहाड़ आदि की छाया से लोग समय व कालखंड का अनुमान लगाते थे । इस कालखंड को मापने के लिये मानव ने जिस विधा या यंत्र का आविष्कार किया, उसे हम काल निर्णय, कालनिर्देशिका व कैलेन्डर कहते हैं । दुनिया का सबसे प्राचीनतम कैलेण्डर भारतीय है । इसे सृष्टि संवत कहते हैं । भारतीय कालगणना का आरम्भ सृष्टि के प्रथम दिवस से माना जाता है । इसलिये इसे सृष्टि संवत कहते हैं । यह संवत  1975949109  एक अरब सत्तानबे करोड़, उनतीस लाख, उनचास हजार, एक सौ नौ वर्ष पुराना है । &lt;br /&gt;  कैलेण्डर के निर्माण में अनेक अवधारणायें उपलब्ध हैं । वैदिक काल में साहित्य में ऋतुओं के आधार पर कालखंड के विभाजन द्वारा कैलेण्डर के निर्माण का उल्लेख मिलता है । बाद में नक्षत्रों की चाल, स्थिति, दशा और दिशा से वातावरण व मानव स्वभाव पर पड़ने वाले प्रभावों के अध्ययन के आधार पर भी कैलेण्डर का निर्माण किया गया । हमारे खगोलशास्त्रियों ने ३६० अंश के पूरे ब्रह्याण्ड को २७ बराबर भागों में बांटा । इन्हें नक्षत्र कहते हैं । इन नक्षत्रों के नाम क्रमशः अश्‍विनी, भरिणी, कृतिका, रोहिणी, मृगसिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, अश्लेषा, मघा, पू.फा., उ.फा., हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, गूला, पूषा, उषा, श्रवण, घनिष्टा, शततार, पू.भा, उ.भा तथा रेवती रखे गये । इसमें से बारह नक्षत्रों में चन्द्रमा की स्थिति के आधार पर बारह महीनों के नाम रखे गये । एक, तीन, पाँच, आठ, दस, बारह, चौदह, अठारह, बीस, बाईस व पच्चीसवें नक्षत्र के आधार पर भारतीय महीनों के नाम - चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ, श्रावण, भाद्रपद, अश्‍विन, कार्तिक, मृगशिरा, पौष, माघ व फाल्गुन रखे गये । &lt;br /&gt; प्रश्न यह है कि भारतीय नववर्ष का प्रारम्भ चैत्र मास से ही क्यों? वृहद नारदीय पुराण में वर्णन है कि ब्रह्मा जी ने सृष्टि का सृजन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही प्रारम्भ किया था । वहां लिखा है-&lt;br /&gt;                  “चैत्र मासि जगत ब्रह्यससजप्रिथमेऽइति । ” &lt;br /&gt;इसलिये ही-भारतीय नववर्ष का प्रारम्भ आद्‌याशक्‍ति भगवती दुर्गा की पूजा-उपासना के साथ चैत्र मास से शुरू करते हैं । प्रत्येक माह में कितने दिन होंगे, इसे समझने से पहले आपको दिनों के नाम व सप्ताह के बारे में बताते हैं- &lt;br /&gt;  हमारे ऋषि-मुनियों ने वैज्ञानिक गणना तथा सूर्य के महत्व को समझते हुये रविवार को ही सप्ताह का पहला दिन माना । उन्होंने यह भी आविष्कार किया कि सूर्य, शुक्र, बुधश्‍च, चन्द्र, शनि, गुरू तथा मंगल नामक सात ग्रह हैं । जो निरन्तर पृथ्वी की परिक्रमा करते रहते हैं और निश्‍चित अवधि पर सात दिन में प्रत्येक ग्रह एक निश्‍चित स्थान पर आता है । अतः इन ग्रहों के आधार पर ही सात दिनों के नाम रखे गये । सात दिनों के इस अन्तराल को सप्ताह कहा गया । इसमें दिन-रात शामिल हैं । ज्योतिषीय गणित की भाषा में दिन-रात को महोरात्र कहते हैं । यह चौबीस घंटे का होता है । एक घंटे की एक घेरा होती है । इसी ‘घेरा’ शब्द से अंग्रेजी का “ऑवर” शब्द बना है । प्रत्येक घेरा का स्वामी कोई ग्रह होता है । जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि स्थूल ग्रह सात होते हैं और उन्हीं के नाम पर सात दिवस माने जाते हैं । सूर्योदय के समय जिस ग्रह की प्रथम घेरा होती हैं उसी के आधार पर उस दिन का नाम रखा गया है । इस प्रकार हमारा प्रथम दिवस रविवार से प्रारम्भ होकर सोमवार, मंगलवार, बुधवार, वृहस्परिवार, शुक्रवार तथा अन्तिम दिन शनिवार पर खत्म होता है । &lt;br /&gt;भारतीय ऋषि-मुनियों ने कालगणना का सूक्ष्मतम तक अध्ययन किया । इसके अनुसार दिन-रात के चौबीस घंटों को सात भागों में बांटा गया और एक भाग का नाम रखा ‘घटी” । इस प्रकार एक घटी हुई चौबीस मिनट के बराबर और एक घंटे में हुई ढाई घटी । इससे आगे बढ़ें तो एक घटी में साठ पल, एक पल में साठ विपल, एक विपल में साठ प्रतिफल । &lt;br /&gt;        २४ घंटे = साठ घटी&lt;br /&gt;        १ घटी =  साठ पल&lt;br /&gt;        १ पल = साठ विपल&lt;br /&gt;        १ विपल = साठ प्रतिपल&lt;br /&gt;अगर हम कालगणना की बड़ी ईकाई का अध्ययन करें तो देखें- &lt;br /&gt;        २४ घंटे = एक दिन&lt;br /&gt;        ३० दिन = एक माह&lt;br /&gt;        १२ माह = एक वर्ष&lt;br /&gt;        १० वर्ष = एक दशक&lt;br /&gt;        १० दशक = एक शताब्दी&lt;br /&gt;        १० शताब्दी = एक सहस्त्राब्दी&lt;br /&gt;हजारों सालों को मिलाकर बनता है एक युग । युग चार होते हैं- जिनमें-  &lt;br /&gt;कलयुग =    चार लाख बत्तीस हजार वर्ष       ४३२००० वर्ष&lt;br /&gt;द्वापर युग = आठ लाख चौंसठ हजार वर्ष     ८६४०००&lt;br /&gt;त्रेतायुग =   बारह लाख छियानवे हजार वर्ष  १२९६०००&lt;br /&gt;सतयुग  =    सत्रह लाख अट्ठाईस हजार वर्ष    १७२८०००&lt;br /&gt;एक महायुग   चारों युगों का योग               = ४३२०.००० वर्ष &lt;br /&gt;१००० महायुग = एक कल्प &lt;br /&gt;एक कल्प को ब्रह्मा जी का एक दिन या एक रात मानते हैं । अर्थात ब्रह्मा जी का एक दिन व एक रात २००० महायुग के बराबर हुआ । हमारे शास्त्रों में ब्रह्मा जी की आयु १०० वर्ष मानी गयी है । इस प्रकार ब्रह्मा जी की आयु हमारे वर्ष के अनुसार ५१ नील, १० खरब, ४० अरब वर्ष होगी । वर्त्तमान में ब्रह्मा जी की आयु के ५१ वर्ष. एक माह, एक पक्ष के पहले दिन की कुछ घटिकायें व पल व्यतीत हो चुके हैं । &lt;br /&gt;समय की ईकाई का एक अन्य वर्णन भी हमारे ग्रन्थों में पाया जाता है- &lt;br /&gt;१ निमेष = पलक झपकने का समय (न्यूनतम ईकाई)&lt;br /&gt;२५ निमेष = एक काष्ठा &lt;br /&gt;३० काष्ठा = एक कला&lt;br /&gt;३० कला = एक मूहर्त&lt;br /&gt;३० मूहर्त = एक अहोशत्र (रात व दिन मिलाकर)&lt;br /&gt;१५ दिन व रात = पखवाड़ा या एक पक्ष&lt;br /&gt;२ पक्ष = एक माह (कृष्ण पक्ष व शुक्ल पक्ष)&lt;br /&gt;६ माह = एक अयन&lt;br /&gt;२ अयन = एक वर्ष (दक्षिणायन व उत्तरायण)&lt;br /&gt;४३ लाख बीस हजार वर्ष = एक पर्याय (कलयुग, द्वापर, त्रेता व सतयुग का योग)&lt;br /&gt;७१ पर्याय = एक मन्वन्तर&lt;br /&gt;१४ मन्वन्तर = एक कल्प &lt;br /&gt;वर्तमान भारतीय मान्य गणना के अनुसार वर्ष में ३६५ दिन १५ घटी, २२ पल व ५३.८५०७२ विपल होते हैं । तथा चन्द्रगणना के आधार पर भारतीय महीना २९ दिन, १२ घंटे, ४४ मिनट व २७ सैकेन्ड का होता है । सौर गणना के अन्तर को बांटने के लिये अधिक तिथि और अधिक मास तथा विशेष स्थिति में क्षय की भी व्यवस्था की गई है । प्रत्येक तीसरे वर्ष अधिक मास का आवर्तन होता है । वास्तव में भारतीय गणना अतिसूक्ष्म है । उपरोक्‍त गणनाओं के अनुसार अभी सृष्टि के खत्म होने में ४ लाख २६ हजार ८६६ वर्ष, कुछ महीने, कुछ पक्ष कुछ सप्ताह, कुछ दिन, कुछ प्रहर, कुछ घटिकायें, कुछ पल व विपल बाकी हैं । &lt;br /&gt;हमारे ग्रन्थों की रचना करते समय भी ऋषि-मुनियों ने कालगणना के अनूठे गणित को गुप्त सूत्रों में पिरोने का प्रयास किया । शतपथ ब्राह्मण (१०/४२/२२/२५) के अनुसार ऋग्वेद में कुल ४३२०००० अक्षर हैं, जिनका योग महायुग के वर्ष के बराबर है । इनसे १२००० वृहदी छंद बनाये गये हैं । प्रत्येक छंद में ३६० अक्षर हैं । &lt;br /&gt;यजुर्वेद में ८००० तथा सामवेद में ४००० वृहदी छंदों का वर्णन है । इनका योग भी १२०० वृहती छंद तथा अक्षर ४३२०००० है । जब पंक्‍ति छंद ४० अक्षर का बनाते हैं तब छंद संख्या १०८०० होती है । एक वर्ष में ३६० दिन और एक दिन में ३० मुहुर्त होने से भी वर्ष में १०८०० मूहर्त बनते हैं । &lt;br /&gt;इस प्रकार हम कह सकते हैं कि भारतीय कैलेण्डर एवं कालगणना विश्‍व में सबसे प्राचीन एवं सूक्ष्मतम है । &lt;br /&gt;आभार-इस आलेख के लिये ब्रह्मा-पुराण, वैदिक सम्पत्ति (पं. रधुनन्दन शर्मा), कार्त्तवीर्यार्जुन पुराण, समयोपाख्यान (विलास गुप्ता) विरासत (डा. रवि शर्मा ) तथा शतपथ ब्राह्माण से तथ्यों का उल्लेख किया गया है । &lt;br /&gt;                                                              - डॉ. ए. कीर्तिवर्द्धन&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4718272616819180385-479202001385083474?l=samaydarpan.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://samaydarpan.blogspot.com/feeds/479202001385083474/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2009/12/blog-post_5000.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/479202001385083474'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4718272616819180385/posts/default/479202001385083474'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://samaydarpan.blogspot.com/2009/12/blog-post_5000.html' title='भारतीय नववर्ष तथा कालगणना'/><author><name>Samay Darpan</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13464242199151253010</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='16' src='http://2.bp.blogspot.com/_W_dQ0-9jUNk/SpOHlyS95-I/AAAAAAAAABc/eAvYkyYqcL8/S220/nc-lOGO_01.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4718272616819180385.post-8199589547839131628</id><published>2009-12-07T22:31:00.001-08:00</published><updated>2009-12-07T22:31:47.912-08:00</updated><title type='text'>सबसे महंगी महिला एंकर बनेंगी बिल्‍लो रानी</title><content type='html'>बिल्लो रानी सचमुच बहुत सयानी निकलीं. बिपाशा बसु टीवी की सबसे महंगी महिला एंकर बनने वाली हैं. वे जल्द ही एक मॉडल हंट शो को एंकर करती नज़र आ सकती हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बॉलीवुड में
